दुनिया के सात अजूबों में से एक है आगरा का ताजमहल। सामने से भले ही ताज का दीदार करने के ज्यादा मौके न मिले हो लेकिन हजारों बार ताजमहल की तस्वीरें आपने जरूर देखी होंगी। पर क्या आपने कभी सोचा है कि शाहजहां को ताजमहल का डिजाइन कहां से मिला होगा? कहाँ से शाहजहाँ को अपनी सबसे प्यारी बेगम मुमताज महल के मकबरे का इतना नायाब सा डिजाइन मिला कि उसने दुनिया का सातवां अजूबा ही बनवा डाला?
कहा जाता है कि शाहजहाँ को ताजमहल का डिजाइन राजस्थान के एक महल को देखकर मिला था। ऐसे में सवाल उठता है कि दिल्ली सल्तनत का बादशाह, जिसकी राजधानी आगरा हुआ करती थी, वह राजस्थान के किसी महल से कैसे प्रेरित हो गया!

कौन सा है वह महल, जिससे प्रेरित हुआ था शाहजहाँ
स्थानीय लोगों का मानना है कि आगरा में ताजमहल का डिजाइन तैयार करते समय शाहजहाँ के दिमाग में राजस्थान के जिस महल का ख्याल आया था, वह है उदयपुर का जग मंदिर पैलेस। यह पैलेस उदयपुर के लेक पिछोला के दक्षिण द्वीप पर मौजूद एक शानदार महल है। जानकारी के अनुसार इस महल का निर्माण कार्य महाराणा अमर सिंह ने वर्ष 1551 में शुरू करवाया था, लेकिन इसका निर्माण पूरा होने से पहले ही उनकी मौत हो गयी थी।
उनके बाद महाराणा कर्ण सिंह ने इसका निर्माण जारी रखवाया था। 17वीं शताब्दी के शुरुआती वर्षों में महाराणा जगत सिंह (1628-1652) ने इसका निर्माण पूरा करवाया। इसी वजह से इसे जग मंदिर या जगत मंदिर पैलेस कहा जाता है।

शाहजहाँ ने ली थी यहां शरण
कहा जाता है कि 1620 से 1624 के बीच इस क्षेत्र पर जब महाराणा कर्ण सिंह का शासन था, उस समय शहजादा खुर्रम (जो आगे चलकर बादशाह शाहजहाँ के नाम से प्रसिद्ध हुआ) ने अपने पिता से बगावत कर दी थी। चुंकि शहज़ादा खुर्रम की माँ एक राजपूती महिला थी, इसलिए शहज़ादा खुर्रम को महाराणा कर्ण सिंह ने उदयपुर के सिटी पैलेस में सुरक्षित आश्रय प्रदान किया था। लेकिन कहा जाता है कि शाहजहाँ जब राजपूती रीति-रिवाजों का पालन नहीं कर पाया तो कर्ण सिंह ने उन्हें जग मंदिर पैलेस में स्थानांतरित कर दिया।
जिस समय जग मंदिर पैलेस में शाहजहाँ को रखा गया था, तब वह निर्माणाधिन था। इतिहासकारों का मानना है कि शाहजहाँ ने इस पैलेस में कई महीने गुजारे थे। शाहजहाँ ने उसी समय जग मंदिर पैलेस के डिजाइन को अपने मन-मस्तिष्क में बैठा लिया था। बाद में जब उसने ताजमहल का निर्माण करवाया तो इस पैलेस के डिजाइन का ही इस्तेमाल किया था।

जग मंदिर पैलेस की खासियतें क्या है?
तीन मंजीला इस भव्य पैलेस का निर्माण पीले रंग की बलुआ पत्थर और संगमरमर के पत्थरों से किया गया है। इस पैलेस का सबसे पहला और मुख्य आकर्षण इसकी पहली पंक्ति में रक्षकों की तरह दिखते हाथियों की नक्काशी है। लेक पिछोला से घिरे होने की वजह से इस पैलेस की सुन्दरता कई गुना बढ़ जाती है। रात के समय इस पैलेस की खुबसूरती देखते ही बनती है।
कैसे पहुंचे जग मंदिर पैलेस?
जग मंदिर पैलेस उदयपुर में लेक पिछोला के दक्षिण दिशा में मौजूद एक टापू पर मौजूद है। इसलिए यहां तक आने का एकमात्र जरिया नाव ही है। उदयपुर के सिटी पैलेस के बगल में बंसी घाट से नाव द्वारा जग मंदिर पैलेस जाया जा सकता है। इस द्वीप पर प्रवेश करने के लिए टिकट लगता है, जिसे उदयपुर सिटी पैलेस के प्रवेश द्वार से खरीदा जा सकता है।

पैलेस में 'दारीखाना' नाम का एक रेस्तरां भी है, जहां आपको काफी स्वादिष्ट राजस्थानी भोजन मिल जाएगा। यहां मौजूद म्यूजियम भी देखने जा सकते हैं, जो इस पैलेस के इतिहास के बारे में काफी कुछ बताता है। यहां तक पहुंचने के लिए नाव की लागत अलग-अलग होती है। अगर आप व्यक्तिगत नाव लेते हैं तो ₹175 से ₹500 प्रति व्यक्ति किराया हो सकता है।
नियमित नाव के लिए प्रति बच्चा ₹150 और वयस्क ₹700 लगता है। सनसेट बोट लेने पर प्रति बच्चा ₹300 है और उसी के आधार पर वयस्कों का किराया भी होता है।



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