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वीकेंड पर करें मंदारगिरि पर्वत का सफर

बैंगलोर से महज़ 65 किमी दूर स्थित मंदागिरि पर्वत वीकएंड पर घूमने के लिए बैस्‍ट जगह है। आगे पढ़ें मंदारगिरि पर्वत और इसके आसपास के दर्शनीय स्‍थलों के बारे में।

By Namrata Shatsri

शहर में भले ही कितने थिएटर, फूड हब और एंटरटेनमेंट सेंटर हों लेकिन मन को सुकुन तो किसी एंकात जगह पर ही जाकर मिलता है। शहर की भागदौड़ भरी जिंदगी और प्रदूषण से दूर कहीं खुली हवा में सांस लेने का मन हर किसी का करता है। अगर आपको लगता है कि बैंगलोर में रहने पर वीकेंड पर दो दिनों के लिए आप कहीं घूमने नहीं जा सकते तो आप गलत हैं। बैंगलोर से महज़ 65 किमी दूर स्थित मंदागिरि पर्वत वीकेंड पर घूमने के लिए बैस्‍ट जगह है।

मंदारगिरि को बसदी बेट्टा के नाम से भी जाना जाता है। इस पहाड़ी पर कई जैन मंदिर स्थित हैं। यह टुमकुर जिले में स्थित है। इस मोनोलिथ पर ट्रैकिंग करना काफी आसान है क्‍योंकि इसमें सिर्फ 460 सीढियां चढ़ने के बाद आप पहाड़ी की चोटी पर पहुंच जाएंगें। अलग-अलग आकार और साइज़ के पत्‍थरों से घिरा मंदारगिरि फोटोग्राफी के लिए बहुत बढिया है।

साल में कभी भी आप मंदारगिरि पर्वत पर ट्रैकिंग का मज़ा लेने आ सकते हैं। हालांकि, यहां पर स्थित जैन मंदिर विशेष मौकों पर ही खुलते हैं।

बैंगलोर से मंदारगिरि पर्वत का रूट

बैंगलोर से मंदारगिरि पर्वत का रूट

पहला रूट : राजाजी नगर - एनएच 48 - दबासपेत - क्‍याथसंद्रा - मंदारगिरि (62 किमी - 1 घंटा 45 मिनट)

 नेलामंगला

नेलामंगला

बैंगलोर 26 किमी की दूरी पर स्थित नेलामंगला शहर बेहद खूबसूरत है। बिन्‍नामंगला को विश्‍व शांति आश्रम के नाम से भी जाना जाता है। ये काफी सुंदर पार्क है जिसके साथ पांछुरंगा और विश्‍वरूप विजय विटला की मूर्तियां हैं। यहां के लक्ष्‍मी वेंकेटरमन स्‍वामी मंदिर की खास बात यह है कि इस मंदिर में देवी की

पूजा गरुड़ के साथ पूजा होती है। इस मंदिर में स्‍तंभों के बीच तीन मूर्तियां स्‍थापित हैं जोकि चोला शैली में निर्मित हैं। इसके अलावा यहां बिन्‍नामंगला, विश्‍व शांति आश्रम जैसे शांतिमय पार्क भी हैं जहां पांडुरंगा और विश्‍वरूप विजय विट्टल की विशाल मूर्तियां स्‍थापित हैं। यहां गीता मंदिर, अष्‍टलक्ष्‍मी मंदिर और विनायक मंदिर भी हैं।
PC: official site

शिवगंगे

शिवगंगे

बैंगलोर से 52.3 किमी दूर स्थित है शिवगंगे। शिवगंगे में आपके मन और आत्‍मा को शांति की अनुभूति तो होगी ही साथ ही आप यहां रोमांच का भी भरपूर मज़ा ले सकते हैं। शिवगंगे पर्वत शिवलिंग के आकार का है और इसके पास ही गंगा नदी भी बहती है। इन दो कारणों से ही इस जगह का नाम शिवगंगे पड़ा है। यहां पर आप रॉक क्‍लाइंबिंग और ट्रैकिंग का मज़ा ले सकते हैं। इस पर्वत से आसपास का बेहद सुंदर नज़ारा दिखाई देता है।PC:Christian Lederer

सिद्दार बेट्टा

सिद्दार बेट्टा

दोबास्‍पेत क्षेत्र में एक और पर्वत स्थित है और वो है सिद्दा बेट्टा अर्थात् निजागलबेट्टा। शिवगंगा के मुकाबले इस जगह के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। इस पर्वत पर कई ऐतिहासिक खंडहर मौजूद हैं। निजागलबेट्टा किले के बारे में माना जाता है कि इसे 17वीं शताब्‍दी में चिक्‍कादेवाराय वोडेयार द्वारा बनवाया गया था।

इस पर्वत की चोटि से शिवगंगा और चट्टानी क्षेत्र का मनोरम नज़ारा दिखाई देता है लेकिन पत्‍थरों के आने पर ट्रैकिंग का रूट आसान हो जाता है।

मंदारगिरि पर्वत

मंदारगिरि पर्वत

शिवगंगा से 20 किमी दूर है बसदी बेट्टा और मंदारगिरि पर्वत। बसदी का मतलब है जैन तीर्थ और मंदिर। दक्षिण भारत में मंदिर शब्‍द के लिए बसदी का प्रयोग किया जाता है। पर्वत पर अनेक जैन मंदिर होने के कारण इस शब्‍द का प्रयोग किया जाता है।

पर्वत की तलहटी में पिंची आकार का गुरु मंदिर स्थित है। मोर के पंख के आकार का होने के कारण इस खूबसूरत मंदिर का नाम पिंची पड़ा है जिसका मतलब मोर होता है।

मंदिर के अंतिम छोर से मिदाला झील का मनोरम दृश्‍य दिखाई देता है। मंदिर के प्रशासन से अनुमति लेकर आप रात को इस पर्वत पर रूक सकते हैं।PC:Sagar Lake

जैन मंदिर परिसर

जैन मंदिर परिसर

मंदारगिरि पर्वत पर चार मंदिर परिसर हैं जिनमें से दो भगवान चंद्रनाथ को समर्पित हैं जिन्‍हें बारहवीं शताब्‍दी में बनवाया गया था। अन्‍य दो मंदिर भगवान पार्श्‍वनाथ और भगवान सुपरश्‍वनाथ के हैं जिन्‍हें 14वीं शताब्‍दी में बनवाया गया था। बड़ी संख्‍या में श्रद्धालु इस मंदिर के दर्शन करने आते हैं और कुछ लोग यहां ध्‍यान भी करते हैं।PC:Ingo Mehling

मंदारगिरि पर ट्रैकिंग और कैंपिंग

मंदारगिरि पर ट्रैकिंग और कैंपिंग

जैसा कि हमने पहले भी बताया कि मंदारगिरि पर 435 सीढियों का आसान ट्रैक है इसलिए इसे आप 30 मिनट से भी कम समय में पूरा कर लेंगें। हालांकि अगर आप पूरी रात पहाड़ी पर कैंप लगाना चाहते हैं तो इसके लिए आपको मंदिर के प्रशासन से अनुमति लेनी पड़ेगी। इस जगह पानी और खाने की कोई स्‍टॉल नहीं है इ‍सलिए अपने साथ खाना और पानी की बोतल लेकर जाएं। पर्वत की तलहटी में मंदिर का कार्यालय स्थित है।

अगर मंदिर बंद है तो पर्वत पर चढ़ाई करने से पहले आप कार्यालय में मंदिर की चाबी मांग सकते हैं।PC:Leigh Blackall

देवरायनदुर्ग

देवरायनदुर्ग

मंदारगिरि पर्वत से 20 किमी दूर है देवरायनदुर्ग। टुमकुर के पास स्थित एक हिल स्‍टेशन है देवरायनदुर्ग। ये पहाड़ी इलाका घने जंगलों से

घिरा हुआ है और इसकी पर्वत चोटि पर कई मंदिर स्थित हैं जिनमें से अनेक मंदिर योगनरस्मिहा और भोगनरसिम्‍हा को समर्पित हैं।

ये मंदिर समुद्रतट से 3940 फीट की ऊंचाई पर स्थित हैं। इस जगह का वास्‍तविक नाम अनेबिदासरी है जिसे बाद में मुखिया जदाका के नाम पर जदाकना दुर्ग नाम दिया गया और इसके बाद इसे चिक्‍का देवराज वोडेयर द्वारा देवरायनदुर्ग नाम दिया गया।PC: Mishrasasmita

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