श्रीनगर में डल झील के खुबसूरत नजारें निश्चित रूप से बेहद सुकून देते हैं। लेकिन यहां के मंदिरों में आपको एक अलग सी शांति मिलेगी। एक से बढ़कर एक खूबसूरत मंदिरों में से एक है शंकराचार्य मंदिर, जहां पर भारत का समृद्ध इतिहास आज भी जीवित है। जी हां यह वो मंदिर है जहां पर मुगल शासक शाहजहां ने स्तंभ बनवाया था। आइये डालते हैं एक नज़र मंदिर से जुड़ी और भी रोचक बातों पर।

शंकराचार्य मंदिर, जहां हैं 244 सीढ़ियां
शंकराचार्य मंदिर श्रीनगर के जिस पहाड़ पर बना हुआ है, उसे गोपाद्रि के नाम से जाना जाता है। अद्वैतवाद के महान प्रणेता शंकराचार्य के नाम से जाना जाता है। कश्मीरी पंडित मानते हैं कि 8वीं सदी में आदि शंकरा यहां पर आये थे। इस वजह से ही इस मंदिर का नाम शंकराचार्य मंदिर पड़ा है। भगवान शिव का यह मंदिर ज्येठेश्वर महादेव के नाम से भी लोकप्रिय है।
करीब 244 सीढ़ियां चढ़कर भक्त मंदिर के सामने पहुंचते हैं। इतनी ऊंचाई पर स्थित होने की वजह से इस मंदिर से श्रीनगर शहर और पूरे डल झील का भव्य नजारा दिखाई देता है। यह मंदिर श्रीनगर से करीब 1000 फीट की ऊंचाई पर बना हुआ है। मंदिर का गर्भगृह गोलाकार है। मुख्य द्वार से मंदिर के सामने स्थित बाग तक पहुंचने के लिए 244 सीढ़ियां और मंदिर के गर्भगृह तक पहुंचने के लिए और 30 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं।

शाहजहां ने बनवायी थी मंदिर की छत एवं स्तंभ
गर्भगृह में भगवान शिव का विशालाकाय लिंग स्थापित है। इस मंदिर की शैली को देखकर अंदाजा लगाया जाता है कि यह छठी या सातवीं शताब्दी में बनवाया गया था। गर्भगृह से कुछ सीढ़ियां नीचे उतरने के बाद आपको पत्थरों से बना ही एक छोटा सा कमरा दिखाई देता है जिसे शंकराचार्य की तपस्या स्थल माना जाता है।
इससे थोड़ी दूर ही एक कुंड है, जिसे गौरी कुंड के नाम से जाना जाता है। हालांकि अब यह कुंड सुख चुका है। मंदिर की सीढ़ियों पर फारसी भाषा में लिखे दो अभिलेख हैं, जिनके अनुसार इस मंदिर की स्थापना 1659 ईसवी में की गयी थी। दूसरे अभिलेख के अनुसार 1644 ईसवी में शाहजहां ने मंदिर की छत और स्तंभ बनवाया था।

कैसे पहुंचें शंकराचार्य मंदिर
मंदिर तक पहुंचने के लिए आपको डल गेट के सामने से ई-रिक्शा और किराए पर गाड़ियां आसानी से मिल जाएंगी जो आपको एक निर्धारित स्थान पर छोड़ेंगी। उस स्थान से आपको फिर ऑटो रिक्शा लेकर मंदिर के मुख्य द्वार तक पहुंचना होगा। आप चाहे तो यह दूरी पैदल भी बड़ी आसानी से तय कर सकते हैं। मंदिर के अंदर आपको कैमरा ले जाने की अनुमति होगी लेकिन सिर्फ गर्भगृह में तस्वीरें खींचने की अनुमति नहीं है। गर्भगृह से बाहर आप फोटो खींच सकते हैं।



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