सिक्किम के पूर्वी सिक्किम जिले का एक छोटा सा गांव है 'जुलुक' या 'दजुलुक'। समुद्रतल से लगभग 10,000 फीट की ऊंचाई पर बसा यह गांव एक परफेक्ट हनीमुन डेस्टिनेशन है। लेकिन कोई अगर अपने पूरे परिवार के साथ जुलुक घूमने जाना चाहे तो उसका भी दिल खोलकर इस गांव में स्वागत किया जाता है। जुलुक पुराने सिल्क रूट का एक हिस्सा था, जो जेलेप ला (तिब्बत) से होते हुए ल्हासा के लिए एक व्यापारिक मार्ग हुआ करता था।

शहरों के भीड़भाड़ से दूर, जो लोग शांत वातावरण में ठंड का आनंद उठाते हुए कुछ दिन बिताना चाहते हैं, वे सिक्किम में जुलुक आ सकते हैं।
याद रहेगा जुलुक तक का सफर
कहा जाता है कि मंजिल से ज्यादा खुबसूरत को रास्ते होते हैं। जुलुक तक पहुंचने का रास्ता आपको हर पल इसी बात की याद दिलाएगा। जुलुक तक का रास्ता बिल्कुल किसी पुराने हिंदी फिल्म के गाने 'नागिन की तरह बलखाती' हुई आगे बढ़ती है।

जुलुक तक के पूरे रास्ते में लगभग 35 हेयरपीन बेंड्स मिलते हैं, जिनसे होकर ही 10,000 फीट की ऊंचाई पर बसे इस गांव में पहुंचा जा सकता है। ऊंचाई पर पहुंचकर जब आप नीचे की तरफ देखेंगे, इन हेयरपीन बेंड्स की खुबसूरती तब सबसे ज्यादा दिखाई देगी।
साफ दिखाई देती हैं कंचनजंघा की चोटियां
यूं तो कंचनजंघा कई दूसरे शहरों से भी दिखाई देती है। लेकिन सर्दियों के मौसम में कंचनजंघा का दिखाई देना अक्सर आसमान के साफ होने और बादलों की उपस्थिति पर निर्भर करता है। जुलुक से लगभग 10-12 किमी की दूरी पर मौजूद है थम्बी व्यू प्वाएंट।

यह व्यू प्वाएंट समुद्रतल से लगभग 11,000 फीट की ऊंचाई पर मौजूद है। इस जगह से देखने पर ऐसा लगता है मानों हाथ बढ़ाकर ही कंचनजंघा को छु लिया जा सकेगा। इस जगह पर बहुत सुन्दर फोटो ली जा सकती है। थोड़ा आगे बढ़ने पर आपको कुपुप लेक दिखेगा जिसे स्थानीय लोग एलिफेंट लेक या बिटन चो भी कहते हैं। यह लेक सिक्किम के सबसे पवित्र झीलों में से एक है।
नहीं है कोई भी होटल

सबसे अधिक दिलचस्प बात है कि जुलुक में कोई होटल नहीं है। फिर कहां रुकेंगे आप? दरअसल, इस गांव के कई घरों में होमस्टे की व्यवस्था है। यानी स्थानीय लोगों के साथ उनके घर में मेहमान बनकर रहने का मौका मिलता है। इसका एक फायदा तो यह होता है कि आपको सिक्किम और जुलुक की स्थानीय संस्कृति को और भी करीब से जानने-समझने का ढेर सारा मौका मिल जाता है।

ट्रिप पर जाकर भी आपको लगातार घर जैसी सुख-सुविधाएं मिलती रहती हैं। आसपास घुमने और देखने लायक जगहों के बारे में आपको स्थानीय लोगों से जानने का मौका मिलता और सबसे बड़ी बात की इतनी सारी सुविधाओं के लिए आपको होटल की तुलना में काफी कम किराया चुकाना पड़ता है। यकीन मानिए सिक्किम के लोग बेहद मिलनसार होते हैं और वो इतनी गर्मजोशी के साथ अपने मेहमानों का स्वागत करते हैं कि बस यहीं बस जाने का दिल करता है।
कब और कैसे जाएं जुलुक
जुलुक चीन के काफी करीब है। इसलिए यहां आने के लिए पर्यटकों को विशेष परमिट की जरूरत होती है। देश के बाकी हिस्सों से काफी अलग जुलुक आपको एक ही दुनिया में होने का अहसास करवाती है। हल्की गर्मी और सुहाने मौसम का लुत्फ उठाना चाहते हैं तो आपको अगस्त-सितंबर में जुलुक आना चाहिए।

लेकिन अगर आपने सर्दियों में जुलुक से कंचनजंघा की सुन्दता को निहारने का मन बनाया है तो दिसंबर के अंतिम से लेकर अप्रैल तक आप यहां बर्फबारी का आनंद उठा सकते हैं। जुलुक पहुंचने के लिए आपको सबसे पहले गैंगटोक पहुंचना होगा। गैंगटोक से जुलुक के लिए आपको किराए पर गाड़ी या टैक्सी आसानी से मिल जाएगी। गैंगटोक से जुलुक पहुंचने में लगभग 3 घंटे का समय लग जाता है।
नोट : जैसा हमने पहले ही बताया है, गैंगटोक से जुलुक तक के रास्ते में आपको लगभग 32 (या उससे कुछ ज्यादा) हेयरपीन बेंड्स से होकर गुजरना पड़ता है। इसलिए गैंगटोक से जुलुक का सफर शुरू करने से ठीक पहले भर पेट खाना या मसालेदार कुछ मत खाएं। इससे टेढ़े-मेढ़े पहाड़ी रास्तों में आपको जी मितलाने की परेशानी हो सकती है। इसके बजाए कुछ हल्का-फुल्का खाना खा लें। अगर जरूरी हो तो अपने पास बैग में च्वींगम या लौंग जैसी चीजें रखें जिनसे आपका ध्यान भटका रहेगा।



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