अपने दो दिवसीय दौरे पर तमिलनाडु पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मदुरै के मीनाक्षी अम्मन मंदिर में पूजा-अर्चना की। इस दौरान वह पारंपरिक धोती और शर्ट पहने नजर आएं। आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर प्रधानमंत्री का दक्षिण भारत का यह दौरा बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मीनाक्षी मंदिर में पूजा करते समय की पीएम मोदी की कई तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल भी हो रही हैं।
मीनाक्षी अम्मन मंदिर की वास्तुकला दुनियाभर में प्रसिद्ध है। इतना ही नहीं इस मंदिर का काफी ज्यादा ऐतिहासिक महत्व भी है। मंदिर भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है। मंदिर में भगवान शिव सुन्दरेश्वर और माता पार्वती मीनाक्षी के रूप में पूजी जाती हैं।

आइए आपको मीनाक्षी मंदिर के बारे में कुछ रोचक जानकारी देते हैं -
मंदिर का निर्माण
मीनाक्षी अम्मन मंदिर के बारे में कई लोककथाएं प्रचलित हैं। ऐसी ही एक लोककथा के अनुसार इस मंदिर का निर्माण इंद्र देव ने करवाया था। उन्होंने अपने पापों के प्रायश्चित के रूप में इस मंदिर का निर्माण करवाया था। मंदिर की वास्तुकला द्रविड़ शैली की है। जानकारी के अनुसार वर्तमान मंदिर का निर्माण 1623-1655 के बीच की गयी थी। तिरुमलाई नायक के शासनकाल (1623-55) के दौरान मंदिर परिसर का निर्माण हुआ था। माना जाता है कि मंदिर का गर्भगृह 3500 वर्षों से भी अधिक पुराना है। यह मंदिर भारत के सबसे अमीर मंदिरों में शामिल हैं।

हैरान करती है वास्तुकला
मीनाक्षी मंदिर की वास्तुकला हैरान करने वाली है। मदुरै शहर में वैगई नदी के दक्षिण तट पर मीनाक्षी मंदिर स्थित है। मंदिर में 12 प्रवेश द्वार हैं जिनकी ऊंचाई करीब 40 मीटर है। इन सभी गोपुरमों पर हिंदू देव-देवियों की मूर्तियां बनी हुई हैं। मंदिर में 14 गोपुरम और 985 स्तंभ हैं। इनमें से 8 स्तंभों पर देवी लक्ष्मी की प्रतिमाएं उकेरी हुई हैं। इस मंदिर अद्भुत वास्तुकला की वजह से ही इसे दुनिया के 7 अजूबों में शामिल करने के लिए नामांकित भी किया जा चुका है।

अलाउद्दीन ने किया था हमला
मीनाक्षी अम्मन मंदिर का नाम भारत के उन मंदिरों की सूची में आता है, जहां मुगलों ने न सिर्फ लुटपाट मचाया था बल्कि तोड़फोड़ भी की थी। कहा जाता है कि 14वीं सदी में दिल्ली के सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी के कमांडर मलिक काफूर ने इस मंदिर पर आक्रमण किया था। उसने मंदिर से मूल्यवान आभूषण और रत्नादि को पूरी तरह से लुट लिया था। कहा जाता है कि मीनाक्षी मंदिर के 14 मीनारों में से सुन्दरेश्वर और मीनाक्षी को छोड़कर बाकी सभी मीनारों को उसने तोड़ डाला था। बाद में मंदिर का फिर से निर्माण किया गया था।

क्या है मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार देवी पार्वती ने मदुरै के राजा पांड्य राजा मलयध्वज की घोर तपस्या से खुश होकर, उनकी बेटी मीनाक्षी के रूप में उनके घर जन्म लेने का आर्शिवाद दिया था। मान्यता के अनुसार मीनाक्षी ने तीन स्तनों के साथ जन्म लिया था। उन्हें आर्शिवाद प्राप्त था कि जब उनके जीवन में किसी सही व्यक्ति का प्रवेश होगा, तब उनका तीसरा स्तन गायब हो जाएगा। मान्यता के अनुसार सुन्दरेश्वर के रूप में भगवान शिव जब मीनाक्षी अम्मा से मिले, तो बिल्कुल ऐसा ही हुआ। मीनाक्षी अम्मा को भगवान विष्णु की बहन माना जाता है।

क्यों हैं देवी की प्रतिमा का रंग हरा?
मीनाक्षी अम्मन मंदिर की हर तस्वीर में आपने गौर किया होगा, कि देवी की प्रतिमा का रंग हरा होता है। इसके पीछे भी एक पौराणिक मान्यता है। कहा जाता है कि मीनाक्षी का रंग सांवला था। दक्षिण भारतीय मान्यताओं के अनुसार सांवले रंग पर जब कोई हल्दी का उबटन या लेप लगाता है तो उसका रंग हरा दिखता है। इसी वजह से मीनाक्षी अम्मन मंदिर में देवी की प्रतिमा का रंग हरा दिखाया गया है।



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