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जानिये वास्तु और कला की दृष्टि से क्यों महत्त्वपूर्ण हैं गुजरात के ये टॉप 6 मंदिर

By Staff

हम आपको अपने पिछले कई लेखों के जरिये आपको गुजरात से अवगत करा चुके हैं। ज्ञात हो कि जब कभी भी आपके सामने भारत के सबसे खूबसूरत राज्यों में शुमार और सांस्कृतिक रूप से धनी गुजरात का नाम आता होगा तो कुछ चीजें जैसे कई सारे मंदिर, बंजर इलाके, कच्छ का मरुस्थल जैसी चीजें अपने आप ही आपके सामने आ जाती होंगी।

गौरतलब है कि भारत के पश्चिम में बसा राज्य गुजरात अपनी स्थलाकृतिक और सांस्कृतिक विविधता के लिए जाना जाता है। सिंधु घाटी सभ्यता के उद्गमस्थल के रूप में विख्यात गुजरात हमेशा भारत के इतिहास में सांस्कृतिक और व्यापार का केंद्र माना जाता रहा है। अब बात यदि गुजरात में पर्यटन के आयामों पर हो तो आपको बताते चलें कि यहां ऐसा बहुत कुछ है जिसके चलते एक पर्यटक इस सुन्दर राज्य की तरफ आकर्षित हुआ है।

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तो इसी क्रम में हम आज अपने इस लेख के जरिये आपको दिखाने जा रहे हैं सिंधु घाटी सभ्यता के उद्गमस्थल गुजरात के वो मंदिर जो जहां एक तरफ बेहद खूबसूरत हैं तो वहीं दूसरी तरफ इनका वास्तु कौशल इतना बेमिसाल है कि ये किसी भी व्यक्ति को मोहित कर सकते हैं।

अक्षरधाम मंदिर

अक्षरधाम मंदिर

अक्षरधाम गुजरात के महान मंदिरों में से एक है। यह भक्ति, वास्तुकला, कलाकार्यों ओर प्रदर्शनियों का एक दुर्लभ संयोग है। भगवान स्वामीनारायण की मूर्ति इस मंदिर की सैद्धांतिक मूर्ति है। गांधीनगर आने वाले यात्री इस स्मारक और मंदिर की अनूठी सुंदरता को देखने आते हैं। यदि आप अक्षरधाम की टैगलाइन पर नज़र डालें तो मिलेगा कि -'यह वह स्थान है जहाँ कला चिरयुवा है, संस्कृति असीमित है और मूल्य कालातीत हैं।

Photo Courtesy: Honza Soukup

पिंपलेश्वर महादेव मंदिर

पिंपलेश्वर महादेव मंदिर

गुजरात स्थित मेहसाणा जिले के अंतर्गत आने वाले सल्दी में पिंपलेश्वर महादेव मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक प्राचीन मंदिर है। ये स्थान अपने एक प्राचीन पर्व सलादि नो मेलो के कारण हर साल हज़ारों पर्यटकों का ध्यान आकर्षित करता है। आपको बताते चलें कि ये पर्व यहां हर श्रावण के अंतिम सोमवार को लगता है। इस मंदिर की ख़ास बात ये है कि और शिव मंदिरों की तरह यहां शिवलिंग नहीं है यहां जलाधारी (बहते हुए पानी ) की पूजा होती है। यहां आने वाले लोगों की मान्यता है कि भगवान शिव लोगों को पाप से मुक्त करते हैं।

Photo Courtesy: Vazodanj

श्री स्‍वामी नारायण मंदिर

श्री स्‍वामी नारायण मंदिर

1822 में निर्मित, यह स्वामी नारायण संप्रदाय का पहला मंदिर है जिसे ब्रिटिश काल में स्‍वामी आदिनाथ के द्वारा बनवाया गया था। इस मंदिर को बर्मी टीक की लकड़ी से बनाया गया था। इस पर की गई नक्‍काशी बेहद खूबसूरत है और कई धार्मिक ग्रंथों में उल्‍लेख की गई आकृतियों को यहां उकेरने की कोशिश की गई थी और उनमें सुंदर रंग भी भरे गए थे। ज्ञात हो कि इस मंदिर में महिलाओं के लिए विशेष भाग है जहां उनके लिए शिक्षा और समारोह होते है। यह मंदिर, रंगों का उत्‍सव है जो पुराने शहर के प्राचीन रंग में डूबा हुआ है। नर नारायण इस मंदिर के प्रमुख देवता है।

Photo Courtesy: Bhudiya2

सोमनाथ महादेव मंदिर

सोमनाथ महादेव मंदिर

सोमनाथ महादेव मंदिर गुजरात के सोमनाथ में स्थित है। इसे आदि ज्योतिर्लिंग के नाम से भी जाना जाता है। इस मंदिर को सात बार नष्ट किया गया, पर हर बार इसका पुनर्निर्माण किया गया। इसे चंद्रदेव सोम ने सोने से, सूर्यदेव रवि ने रजत से और भगवान श्री कृष्ण ने लकड़ी से बनवाया था। साथ ही 11वीं शताब्दी में सोलंकी राजपूत ने इसे पत्थर से बनवाया। आखिरी बार इसका पुननिर्माण 1951 में किया गया था। मंदिर की संपत्ति और वैभव के कारण इस पर कई बार आक्रमण भी किया गया। यह मंदिर अपनी उत्कृष्ट नक्काशी, चांदी के दरवाजे, नंदी की प्रतिमा और केंद्रीय शिवलिंग के लिए जाना जाता है। कार्तिक चार दिन तक चलने वाले पुर्णिमा त्योहार के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालू आते हैं।

Photo Courtesy: BeautifulEyes

द्वारकाधीश मंदिर

द्वारकाधीश मंदिर

द्वारकाधीश मंदिर द्वारका का मुख्य मंदिर है जिसे जगत मंदिर (ब्रह्मांड मंदिर) भी कहा जाता है। किवदंती है कि जगत मंदिर - द्वारकाधीश मंदिर का मुख्य मंदिर लगभग 2500 वर्ष पुराना है और इसका निर्माण भगवान कृष्ण के पड़ पोते वज्रनाभ ने किया था। ऐसा भी कहा जाता है कि महाभारत के युद्ध के बाद जब द्वारका जो भगवान कृष्ण का राज्य था, पानी में डूब गई थी तब इस मंदिर का निर्माण किया गया था। जगत मंदिर के आसपास की अन्य कलात्मक संरचाओं का निर्माण 16 वीं शताब्दी में हुआ। इस मंदिर का शिखर 43 मीटर ऊंचा है जिसके ऊपर एक बड़ा ध्वज लगा हुआ है जिस पर सूर्य और चंद्रमा बने हुए हैं जिन्हें 10 किमी. की दूरी से भी देखा जा सकता है।

Photo Courtesy: Scalebelow

श्री हनुमान मंदिर

श्री हनुमान मंदिर

गुजरात के सारंगपुर में स्थित हनुमान मंदिर राज्य का एक प्राचीन मंदिर है जो स्वामीनारायण संप्रदाय के वड़तल गड़ी के अंतर्गत आता है। आपको बताते चलें कि भगवान हनुमान को समर्पित इस मंदिर में उनके एक रूप कष्ट भंजन की पूजा होती है। बताया जाता है कि इस प्राचीन मंदिर में भगवान हनुमान की मूर्ति को सद्गुरु गोपलानंद स्वामी द्वारा स्थापित किया गया था। यहां के लोग ये भी मानते हैं कि जब सद्गुरु गोपलानंद स्वामी मूर्ति स्थापित कर रहे थे तो उन्होंने उसे लकड़ी से छू लिया जिसके बाद मूर्ति जीवित हो गयी। ये मंदिर गुजरात में स्थित सभी मंदिरों में सबसे खूबसूरत है और हमारा दावा है कि इसकी वास्तुकला अवश्य ही आपका मन मोह लेगी।

Photo Courtesy: Kaushik Patel

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