अगर आप शांति के साथ साथ प्राकृतिक सुन्दरता की खोज कर रहे हैं, तो दार्जलिंग स्थित मंगपू आपके लिए एक परफेक्ट जगह हो सकती है।यकीन मानिए पहली बार में ही आपको इस जगह से प्यार हो जायेगा।यहां के चाय के बागानों के साथ ऑर्किड और कुनैन के पेड़ इस जगह को और भी सुंदर बनाते हैं। ये छोटा सा गांव छुट्टियां मनाने के लिए सबसे सही है।

लोकप्रिय हिल स्टेशन दार्जीलिंग से महज़ एक घंटे की दूरी पर स्थित है मुंगपू जो रबींद्रनाथ टैगोर को भी बहुत पसंद था। उत्तरी बंगाल के इस रास्ते में बहुत ही कम लोग रहते हैं।
दार्जीलिंग के चाय के बागनों से मंगपू तक का पहाड़ी सफर बेहद सुहावना है और इस बीच आपको कई मनोरम दृश्य भी दिखाई देंगें। कलिंपोंग के पहाड़ी जिले में स्थित मुंगपू तीस्ता नदी से 4000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है।
खूबसूरत वनस्पति और दुर्लभ जीव
पूर्वोत्तर भारत में स्थित इस जगह पर 1864 में देश की पहली कुनैन की फैक्ट्री लगाई गई थी। पूर्व में सिंचोना पड़े से कुनैन को निकालकर उससे मलेरिया की दवा बनाई जाती थी।
आर्टिफिशियन कुनैन के आने से पहले इस शहर के लोग सिंचोना की खेती पर ही निर्भर रहते थे। यहां मंगपू सिंबिडियम ऑर्चिड पार्क में 150 से ज्यादा ऑर्चिड की वैरायटी पाई जाती है।

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कोयल की आवाज़ से गूंजते इस शहर से शानदार कलिजहोरा झरने का खूबसूरत नज़ारा दिखाई देता है। 550 फीट की ऊंचाई से गिरते इस झरने का पानी तीस्ता नदी में जाकर मिल जाता है। महानंदा वन्यजीव अभ्यारण्य के उत्तरी ओर बहती है तीस्ता नदी। इसके आगे डिंचेन शेराप चोएलिंग गोंपा आता है जहां बौद्ध धर्म के लोग प्रार्थना करते हैं।
टैगोर का खजाना
नोबेल पुरस्कार से सम्मानित रबींद्रनाथ टैगोर को पहली बार उनकी शिष्या मैत्रई देवी ने यहां पर आमंत्रित किया था। मैत्रई ने सिंचोना के खेतों और शहर की कुनैन की फैक्ट्री के पास स्थित अपने बंगले पर टैगोर जी को आमंत्रित किया था। तब से टैगोर गर्मी के मौसम में हर बार मुंगपू आने लगे। यहां उनके मन को शांति मिलती थी।

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कोलकाता में लंबी बीमारी से देहांत होने से पहले टैगोर आखिरी बार 1940 में यहां आए थे। इसके बाद उनके घर को संग्रहालय में बदल दिया गया और उसे रबींद्र भवन का नाम दिया गया। इसमें टैगोर द्वारा की गई मूल कलाकृतियां, हाथ से लिखे गए दस्तावेज और उनके डिजाइन किए गए फर्नीचर को रखा गया है। इन पर रबींद्रनाथ टैगोर के बेटे ने नक्काशी की थी।
कब जाएं
इस पहाड़ी शहर में घूमने का सबसे सही समय जून का महीना है और आप यहां अक्टूबर से दिसंबर के बीच भी आ सकते हैं। इन महीनों में यहां का मौसम बहुत सुहावना होता है। वैसे तो आप इस जगह सालभर आ सकते हैं लेकिन इन महीनों में यहां का तापमान बिलकुल सही रहता है इसलिए इस दौरान यहां पर्यटकों की भारी भीड़ रहती है।



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