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ये है भारत की भूतिया झील,यहां जो भी गया वो कभी वापस नहीं आ सका

ए लेक ऑफ़ नो रिटर्न भारत के अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर स्थित है। यह म्यांमार के नागाओं के सीमावर्ती शहर पंसू के क्षेत्र में मौजूद है।

By Goldi

भारत विवधतायों का देश है,यहां देखने के लिए किले से लेकर पहाड़, जंगल, घाटियां झीलें आदि मौजूद हैं,जिन्हें देखने दूर देश विदेश से लोग आते हैं। हमने आपको अब तक अपने लेखों से भारत की कई झीलों के बारे में अवगत कराया है, इसी क्रम में आज हम आपको एक ऐसी झील के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां जो भी गया, वह से कभी कोई वापस नहीं आ सका।

अब आप सोच रहे होगें, कि ये कुछ भी बोलेंगे और हम सच मान लेंगे..तो आपको बता दें कि यह सच है..यह झील भारत-बर्मा की सीमा के पास स्थित है, जिसे 'ए लेक ऑफ़ नो रिटर्न' के नाम से जाना जाता है, यह झील कुछ रहस्यमयी घटनाओं के कारण कुख्यात है।

कहां स्थित है यह झील?

कहां स्थित है यह झील?

यह झील भारत के अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर स्थित है। जोकि म्यांमार के नागाओं के सीमावर्ती शहर पंसू के क्षेत्र में मौजूद है। यह क्षेत्र तंगासा जनजाति का घर है।PC:Sanatdutta

नाम के पीछे कहानी

नाम के पीछे कहानी

इस झील के नामकरण के पीछे बड़ी कहानी छिपी हुई है। किंवदंतियों के अनुसार द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अमेरिका ने यहां पर समतल जमीन समझकर आपातकालीन लैंडिंग करा दी थी। परिणाम स्वरुप उसके हवाई जहाजों के साथ कई कर्मचारी आचानक गुम हो गये थे। तभी से इसे ‘ए लेक ऑफ नो रिटर्न' कहा जाने लगा।

द्वितीय विश्व युद्ध' का कनेक्शन

द्वितीय विश्व युद्ध' का कनेक्शन

इस झील से जुड़ी हुई एक लोककथा बहुत मशहूर है... कहते हैं द्वितीय विश्व युद्ध अपने चरम पर था। इसी कड़ी में एक युद्ध के बाद जापानी सैनिक वापस लौटते वक्त अपना रास्ता भटक गये थे। वह जब इस झील के पास पहुंचे तो रहस्यमय तरीके से लापता हो गये। वहीं इस झील के पास लेडो रोड पर काम करने वाले अमेरिकी सैनिकों को झील का परीक्षण करने के लिए भेजा गया, तो वह भी वापस नहीं लौट सके... कहानियां यहीं नहीं खत्म होती, माना जाता है कि 1942 में ब्रिटिश सैनिकों का एक समूह इस झील के पास मौजूद रेत में धंस गया था।

PC: flicker

एक ही रात में पूरा गांव हो गया था जल मग्न

एक ही रात में पूरा गांव हो गया था जल मग्न

इस झील के आसपास रहने वालों के मुताबिक, कई साल पहले इस झील के किनारे एक खुशहाल गांव हुआ करता था, एक बार गांव वाले जब मछली पकड़ने गये तब जाल में एक बेहद भारी-भरकम मछली फंस गयी..जिसके बाद गांव वालों ने जलसा मनाया, लेकिन इस दावत में गांव की एक बूढ़ी औरत और उसकी पोती शरीक नहीं हुईं। उन्हें यह ठीक नहीं लग रहा था। उन्हें किसी बड़ी अनहोनी की आहट सुनाई पड़ रही थी। वह दोनों जंगल की ओर भाग गईं। कहा जाता है कि उसी रात पूरा का पूरा गांव इस झील में जलमग्न हो गया था।

ए लेक ऑफ़ नो रिटर्न

ए लेक ऑफ़ नो रिटर्न

यह जगह भारत और बर्मा दोनों ही देशों के बीच आकर्षक पर्यटक स्थल बन चुका है।इस झील के आसपास का इलाका बंजर है..काफी खोज के बाद भी इस झील के बारे में किसी को भी सही जानकारी नहीं है..इस जगह का खौफ सिर्फ इंसानों में ही नहीं बल्कि पशु-पक्षियों में भी है..आप यहां दूर दूर तक किसी जानवर या पक्षी को नहीं देख सकते।

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