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राजस्थान की भव्य हवेलियां,जिन्हें नहीं देखा तो कुछ भी नहीं देखा

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खूबसूरती और परफेक्ट आर्टवर्क के साथ राजस्थान की हवेलियों को जीवन में एकबार अवश्य देखना चाहिए। पूर्ण राजस्थान में स्थित खूबसूरत हवेलियां पुराने जमाने की राजपूत वंश के आकर्षण और भव्यता को दर्शाती हैं। जयपुर से जैसलमेर और बीकानेर से जोधपुर तक, इन रंगीन संरचनाओं ने हमें हमारे पुराने जमाने की खूबसूरती से रूबरू कराया।

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मुगलों से हिंदुओं और शेखावाटों से लेकर अमीर गोएंका तक, प्रत्येक हवेली अपने मालिकों की कक्षा और भव्यता को दर्शाती है। ये खूबसूरत हवेलियां राजस्थान आने वाले वाले हर पर्यटक को अपनी ओर आकर्षित करती हैं।

बागोड की हवेली

बागोड की हवेली

मेवाड़ साम्राज्य की ऐतिहासिक राजधानी में राजसी बागोड की हवेली है। इस हवेली का निर्माण 18 वीं शताब्दी में अमीर चंद बैडवा ने कराया था। बागोड़ की हवेली पिछोला झील के किनारे स्थित है, जिसमे करीबन 100 कमरे हैं..और इसकी बालकनी और कमरे भित्ति चित्रों परिपूर्ण हैं, जो पुराने जमाने की नक्काशी आदि को दर्शाती है।Pc:Manoj Vasanth

पिरमल हवेली

पिरमल हवेली

पिरमल हवेली का निर्माण वर्ष 1924 में पिरमल चतुर्भुज मखनाजा द्वारा किया गया था,यह हवेली पारंपरिक वास्तुकला के लिए एक आधुनिक दृष्टिकोण दर्शाती है। सेठ परिमल एक बड़े व्यापारी थे,जोकि चांदी, कपास और अफीम के व्यापारी थे।

बागर में हवेली का निर्माण राजस्थान और इतालवी शैली में वास्तुकला के रूप में किया गया है, जिसमें आंगन के चारों ओर आठ कमरों को जोड़ने वाले यूरोपीय शैली के स्तंभ हैं। संरचना अब एक बुटीक होटल में परिवर्तित हो चुकी है, जो पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है।Pc:officialy page

समोद हवेली

समोद हवेली

यह हवेली जयपुर के पूर्व प्रधान मंत्री रावल शू सिंह ने करीब 175 साल पहले बनवाई थी । इस हवेली को वर्ष 1988 में एक विरासत होटल में परवर्तित करा दिया गया था। इस हवेली के प्रत्येक कोने में शानदार कलाकृति के साथ मेहमानों को अपनी ओर आकर्षित करती है। प्रवेश द्वार पर विस्तृत रंगीन डाइनिंग रूम, हवादार आंगनों और हाथी रैंप, राजाओं की भव्य जीवन शैली को दर्शाते हैं।

नथमल जी की हवेली

नथमल जी की हवेली

यहां बनाए गए जटिल फूलों के पैटर्न और लैट्टियों रॉयल्स के जीवन और समय का प्रतिनिधित्व करते हैं। 18 वीं शताब्दी में जैसलमान हवेली दीवान मोहाता नथमल का घर था, जो जैसलमेर के पूर्व प्रधान मंत्री थे और 1885 में इसे कमीशन किया गया था। एक हवेली के दोनों किनारों में वास्तु अंतर को ध्यान से देखा जा सकता है, जो दो वास्तुकारों के बीच अलग तरह से निर्माण किया गया है।Pc:Daniel Villafruela.

पतवन की हवेली

पतवन की हवेली

18 वीं सदी में निर्मित, पतवन की हवेली, एक दूसरे के आस-पास बने पांच हवेली का एक परिसर है। इस हवेली का निर्माण गुमान चंद पटवा ने किया था, जो कपड़ा और कीमती धातुओं के एक प्रसिद्ध व्यापारी थे। पीले बलुआ पत्थर की विस्तृत चित्र इन पांचो हवेलियों के क्लस्टर की भव्यता को और भी खूबसूरत बनाते हैं।Pc:Daniel Villafruela.

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