गुलाबी सर्दियां शुरू हो चुकी है। मौसम में हो रहे बदलाव को अब महसूस किया जा सकता है। एक तरफ दिन में धूप की तीव्रता में कमी आ गयी है तो दूसरी ओर शाम ढलने के बाद मौसम भी हल्का ठंडा होने लगा है। और सर्दियों की दस्तक के साथ ही शुरू हो जाता है फेस्टिवल्स की शुरुआत। लेकिन जरा ठहर जाइए...हम यहां पारंपरिक त्योहारों की नहीं बल्कि बड़े ही खास त्योहारों की बात कर रहे हैं।
हम बात कर रहे हैं Winter Festivals की। जिस तरह मानसून के समय में खासतौर पर गोवा में कई तरह के मानसून फेस्टिवल्स मनाए जाते हैं उसी तरह से हमारे देश में भी अलग-अलग राज्यों में कई Winter Festivals मनाएं जाते हैं जो सर्दियों के खुशनुमा दिनों को और भी यादगार बना देते हैं।

तो चलिए जान लेते हैं, भारत के 5 बेहतरीन Winter Festivals के बारे में, जिनको एंजॉय करने का प्लान आप इन सर्दियों में बना सकते हैं -
1. दिवाली
Winter Festivals हमारे देश के सबसे जगमगाते त्योहार दिवाली से ही होती है। दरअसल, दिवाली को सर्दियों के आगमन का प्रतीक भी माना जाता है। इसलिए इसे Winter Festivals के तौर पर ही मनाया जाता है। देश के हर कोने में अलग-अलग नामों से दिवाली का त्योहार मनाया जाता है।
कुछ सालों पहले तक दिवाली के दिन फोड़े जाने वाले पटाखे बच्चों से लेकर बड़ों तक को उत्साहित करते थे लेकिन इससे पर्यावरण को होने वाले नुकसान को ध्यान में रखते हुए अब पटाखे न के बराबर फोड़े जाते हैं। लेकिन दिवाली के दिन घर और आस-पड़ोस की जो साज-सज्जा होती है, वह किसी की भी आंखें चौंधिया देने के लिए पर्याप्त ही होती है।
2. रण उत्सव
गुजरात के कच्छ में स्थित नमक के रेगिस्तान रण में मनाया जाने वाला यह उत्सव बड़ा ही खास होता है। इस उत्सव में शामिल होने के लिए दूर दराज के देशों से भी बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक गुजरात पहुंचते हैं। इस साल रण उत्सव की शुरुआत 1 नवंबर 2024 से होगी जो 28 फरवरी 2025 तक चलेगी।
इस दौरान कच्छ के रण में टेंट सिटी में लोगों को ठहराया जाता है, जहां पारंपरिक गुजराती व्यंजनों से मेहमानों का स्वागत किया जाता है। इसके अलावा कई तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होते हैं, जिसे देखकर विदेशी तो क्या देसी मेहमानों के पैर भी थिरकने लगते हैं।

3. पुष्कर पशु मेला
राजस्थान में स्थित भगवान ब्रह्मा की नगरी के तौर पर प्रसिद्ध पुष्कर में हर साल सर्दियों के शुरुआत में ही पशु मेला आयोजित किया जाता है, जिसका मुख्य आकर्षण ऊंट होते हैं। इस मेले को पुष्कर मेला के नाम से भी जाना जाता है। इस साल पुष्कर मेला 9 से 15 नवंबर तक चलेगा। इस मेले में शामिल होने के लिए भी बड़ी संख्या में विदेशी मेहमान साल-दर-साल पुष्कर आते रहते हैं।
शुरुआत में इस मेले में मुख्य रूप से ऊंटों की खरीद बिक्री ही हुआ करती थी लेकिन समय के साथ-साथ इसमें बदलाव हुआ और अब यहां ऊंटों को करतब दिखाने के लिए भी लाया जाता है। पुष्कर मेला परिसर में जब ऊंट अपना करतब दिखाना शुरू करते हैं तब लोग दांतों तले ऊंगलियां दबाने को मजबूर हो जाते हैं।

4. चेरी ब्लॉसम फेस्टिवल
हर साल चेरी ब्लॉसम के पेड़ों पर फूल बहुत कम समय के लिए ही खिलते हैं। अलग-अलग जगह पर मौसम के अनुसार वहां चेरी ब्लॉसम के पेड़ों पर छोटे-छोटे ये गुलाबी रंग के सुन्दर से फूल खिलते हैं। इस साल 15 और 16 नवंबर को शिलॉन्ग में चेरी ब्लॉसम फेस्टिवल मनाया जाएगा।
इस दौरान विभिन्न तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रम, नृत्य संगीत के कार्यक्रमों के साथ-साथ शानदार स्थानीय व्यंजनों का आनंद उठाने की भी पूरी व्यवस्था की जाती है। मेघालय की प्राकृतिक सुन्दरता को एंजॉय करने, रॉक कॉन्सर्ट के मॉडर्न तड़के के साथ इस फेस्टिवल को मनाना बिल्कुल अलग अनुभव होगा।
नोट - लद्दाख में चेरी ब्लॉसम की तरह ही खुबानी फ्लावर फेस्टिवल मनाया जाता है, जो अप्रैल-मई के महीने में मनाया जाता है। वहीं चेरी ब्लॉसम की सुन्दर को एंजॉय करने के लिए आप मार्च से अप्रैल के बीच कश्मीर का रुख भी कर सकते हैं।

5. हॉर्नबिल फेस्टिवल
नागालैंड का प्रसिद्ध हॉर्नबिल फेस्टिवल भी एक ऐसा विंटर फेस्टिवल है, जिसका पर्यटक बड़ी ही बेसब्री से इंतजार करते हैं। इस साल हॉर्नबिल फेस्टिवल 25वें साल मनाया जाने वाला है। इस फेस्टिवल के दौरान एक साथ 16 आदिवासी जनजातियों के प्रति नाच-गाने के साथ सम्मान जताया जाता है। इसके साथ फेस्टिवल में आने वाले मेहमानों के लिए विशेष स्थानीय व्यंजन परोसे जाते हैं।
अगर आप नागालैंड के आदिवासियों द्वारा बनायी गयी कलाकृतियों को अपने साथ घर लाना चाहते हैं, तो हॉर्नबिल फेस्टिवल में आपको हैंडीक्राफ्ट के सामान भी बड़ी संख्या में मिल जाएंगे। हॉर्नबिल फेस्टिवल में जिस Event को बिल्कुल मिस मत किजीएगा, वह है नागाओं की मिर्च खाने की प्रतियोगिता।



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