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सत्य के मार्ग से होते हुए अहिंसा पर चलने का पाठ पढ़ाते हैं भारत के ये बौद्ध मठ

By Syedbelal

दुनिया का चौथा सबसे बड़ा धर्म बुद्धिज़्म या बौद्ध धर्म, भारत की श्रमण परम्परा से निकला धर्म और दर्शन है। अगर ऐतिहासिक साक्ष्यों की माने तो इस धर्म की जड़ें 483 ईसा पूर्व से 563 ईसा पूर्व के मध्य मिलती हैं। इतिहासकारों के लिए इस धर्म की शुरुआत हमेशा से ही कौतुहल का विषय रही है। अगर हम बौद्ध धर्म की बात कर रहें हैं तो जो सबसे पहली चीज हमें इस विशेष धर्म के प्रति आकर्षित करती है वो है गौतम बुद्ध और फिर इस विशेष धर्म का प्रचार करने वाले सम्राट अशोक। सम्राट अशोक के शासनकाल को गौर से देखने पर पता चलता है कि कलिंग के युद्ध के पहले और उसके बाद सम्राट अशोक के दो रूप इतिहास में देखने को मिलते हैं।

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कलिंग के युद्ध के बाद ही राजा ने हिंसा का त्याग किया और बौद्ध धर्म के प्रचार प्रसार के लिए उन्होंने अपनी एड़ी चोटी का जोर लगा दिया। बहरहाल ये कहना अतिश्योक्ति न होगी कि अपने शुरूआती दौर से लेके आज तक बौद्ध धर्म ने कई अहम उतार चढ़ावों को देखा है। चाहे खुद भगवान गौतम बुद्ध का दौर रहा हो या उसके बाद का समय हमेशा ही बौद्ध धर्म लोगों को अपनी तरफ आकर्षित करता चला आया है। बात अगर वर्त्तमान दौर की करें तो आज भी भारत के अलावा दुनिया में कई लोग ऐसे हैं जो महात्मा बुद्ध के बताये रास्ते पर चल रहे हैं।

जहां एक तरफ भारत बौद्ध धर्म की जन्म भूमि है तो वहीं दूसरी ओर अपने आदर्शों के कारण आज बड़ी ही तेजी के साथ बौद्ध धर्म दूसरे देशों में भी फल फूल रहा है और लोग इसके सिद्धांतों पर चलते हुए इसे अपना रहे हैं। ये बौद्ध धर्म की बातें ही हैं कि आज भले ही भारत में भी भारतीय युवा इस धर्म को न माने लेकिन काफी हद तक वो इस धर्म के सिद्धांतों का पालन कर रहे हैं।

कुल मिला के ये कहा जा सकता है की आज धर्मों की विविधता के चलते भारत पूरे विश्व में खासा लोकप्रिय है। जैसा की हमने कहा बौद्ध धर्म ने हमेशा से ही लोगों को अपनी तरफ आकर्षित किया है और यही कारण है की आप पूरी दुनिया के अलावा भारत में भी उत्तर से लेके दक्षिण तक बौद्ध धर्म से जुड़े कई सारे मठ देख सकते हैं। तो आइये जाने भारत में पड़ने वाले रंग बिरंगे प्रमुख बौद्ध मठों के बारे में।

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नामग्याल मठ, धर्मशाला

नामग्याल मठ, धर्मशाला

नामग्याल मठ, मेकलियोदगंज के पास स्थित पर्यटन का एक प्रमुख केंद्र है। यह बौद्ध संरचना तिब्बती सैनिकों के सम्मान के प्रतीक के रूप में बनाया गया जिन्होंने तिब्बत के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान उनकी जान गँवा दी। इसकी स्थापत्य शैली तीसरी सदी में महान सम्राट अशोक के शासन के दौरान बनाए गए स्तूपों के समान हैं। इस स्तूप में साख्यमुनि बुद्ध, जिन्हें गौतम बुद्ध के रूप में भी जाना जाता है, की एक मूर्ति है जो एक छोटे से कक्ष में रखी गई है। कई बौद्ध भक्त प्रार्थना करने के लिये इस मंदिर की यात्रा करते हैं।

हेमिस मठ, हेमिस

हेमिस मठ, हेमिस

हेमिस मठ, जम्‍मू कश्‍मीर में लेह के दक्षिण-पूर्व दिशा में शहर से 45 किमी. की दूरी पर स्थित है। यह मठ शहर का मुख्‍य आकर्षण है जिसका निर्माण 1630 ई. में सबसे पहले स्‍टेग्‍संग रास्‍पा नंवाग ग्‍यात्‍सो ने करवाया था। 1972 में राजा सेंज नामपार ग्‍वालवा ने मठ का पुर्ननिर्माण करवाया और एक धार्मिक स्‍कूल का निर्माण किया जिसमें तंत्र विद्या को सिखाया जाता था। हेमिस मठ तिब्‍बती स्‍थापत्‍य शैली में बना हुआ है जो बौद्ध जीवन और संस्‍कृति को प्रदर्शित करता है। मठ के हर कोने -कोने में कुछ न कुछ खास है और कई श्राइन भी हैं लेकिन पूरे मठ का आकर्षण बिंदु ताबें की भगवान बुद्ध की प्रतिमा है।

स्पीति के पांच मठ

स्पीति के पांच मठ

की, कोमिक, ताबो, धनकर और कुंगरी स्पीति के पांच प्रमुख मठ हैं। स्पीति के ये मठ बेहद खूबसूरत और आकर्षक है जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता के चलते यहां आने वाले किसी भी व्यक्ति का मन बड़ी ही आसानी के साथ मोह सकते हैं। इन मठों में प्रार्थना कक्ष अनियमित हैं, जो संकीर्ण मार्ग, घुमावदार सीढ़ियों, और छोटे दरवाजे से जुड़े हुए हैं। मठ की वास्तुकला 'प्रसाद' प्रकार के निर्माण का प्रतिनिधित्व करती है। यहां के ये मठ उल्लेखनीय दीवारों, पेंटिंगों पेंटिंग, ठाँकों, दुर्लभ पांडुलिपियों, प्लास्टर चित्रों, और हवा उपकरणों के लिए भी जाने जाते हैं ।

रूमटेक मठ, रूमटेक

रूमटेक मठ, रूमटेक

रूमटेक मठ, रूमटेक में स्थित है जो गंगटोक से 24 किमी. की दूरी पर स्थित है। यह मठ, तिब्‍बती बौद्ध धर्म के प्रसिद्ध धार्मिक केन्‍द्रों में से एक है। इसे धर्म चक्र केंद्र के रूप में भी जाना जाता है। यह मठ, समुद्र स्‍तर से 5800 फीट की ऊंचाई पर स्थित है और गंगटोक शहर के समीप ही बना हुआ है। यह मठ तिब्‍बत के बाहर, काग्‍यु वंश के महत्‍वपूर्ण केन्‍द्रों में से एक है। रूमटेक मठ, तिब्‍बत के सुरफू मठ के समान बनवाया गया है। यह मठ चार मंजिला है जो पूरे सिक्किम में सबसे बड़ा मठ है। तिब्‍बत पर चीनी आक्रमण के बाद, तिब्‍बत के ग्‍यालवा कारमापा के 16 वें अवतार अपने कुछ भिक्षुओं के साथ यहां आकर बस गए। इसके बाद, चोग्‍याल ने रूमटेक के इस क्षेत्र को इन भिक्षुओं को तोफहे के रूप में दे दिया था, जिसे बाद में धार्मिक अध्‍ययन के लिए एक केन्‍द्र बना दिया गया था।

नमड्रॉलिंग मठ, कूर्ग

नमड्रॉलिंग मठ, कूर्ग

कर्नाटक के कूर्ग के अंतर्गत आने वाला नमड्रॉलिंग मठ और स्वर्ण मंदिर एक प्रमुख बौद्ध स्थल होने के अलावा एक बेहद खूबसूरत जगह भी है। जब आप यहां आएँगे तो यहां आपको एक बिलकुल नया कल्चर देखने को मिलेगा जिसको देखने के बाद आपको ये एहसास होगा कि आप तिब्बत में हैं। यहां आने वाले लोगों के अनुसार इसे कर्नाटक का मिनी तिब्बत कहा जाता है।

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