पश्चिमी भारत में बसा गुजरात, भारत के इतिहास में सांस्कृतिक और व्यापार का केंद्र माना जाता रहा है। भारत का अत्यंत महत्वपूर्ण राज्य गुजरात, कच्छ, सौराष्ट्र, काठियावाड, हालार, पांचाल, गोहिलवाड, झालावाड और गुजरात उसके प्रादेशिक सांस्कृतिक अंग हैं।
अगर इस राज्य के इतिहास पर नजर डाली जाये तो, यह करीबन 2000 वर्ष पुराना माना जाता है। पौराणिक कथायों के मुताबिक, भगवान कृष्ण मथुरा छोड़कर सौराष्ट्र के पश्चिमी तट पर जा बसे, जो द्वारका यानी प्रवेशद्वार कहलाया। बाद के वर्षो में मौर्य, गुप्त, गुर्जर प्रतिहार तथा अन्य अनेक राजवंशों ने इस प्रदेश पर राज किया।
पुराने समय की वास्तुकला आज भी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं। इसके अलावा , अगर गुजरात की जीवंत संस्कृति के बारे में बात करें तो रास और गरबा जैसे लोकप्रिय समारोह को भूलना गलत होगा। गुजरात का हर कोना अपने आप में अनूठा है अपने आप में अलग है जिसके पास आपको देने के लिए बहुत कुछ है । वर्तमान गुजरात सरकार भी अपनी तरफ से अथक प्रयास कर रही है कि राज्य के पर्यटन को बढ़ावा मिले और देश के अलवा विदेश से भी भारत घूमने आने वाले पर्यटक प्रदेश की विविधताओं के बारे में जानें। आइये जानते है कि, जीवन में एकबार गुजरात घूमना क्यों है जरूरी

गुजरात का बेहतरीन खान-पान
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हर राज्य का अपना खान-पान है, अगर बात गुजराती खाने की, की जाये तो यह अन्य खानों से काफी अलग है, कहा जाये तो बेहद सरल और शाकाहारी होता है। गुजराती व्यंजन में स्वाद, प्रस्तुति और खाना पकाने की तकनीकों के बारे में काफी कुछ बताया जाता है। एक ठेठ भोजन में गेहूं के आटे या बाजरे के आटे से बनी रोतली या ब्रेड, एक शाक या सब्ज़ी का पकवान, दाल, चावल, छास का एक ग्लास और एक मिठाई होता है। गुजराती खाने की एक बेहद खास विशेषता है कि, उनमें मिठास की एक छोटी सी रंगत होती है - और इसलिये गुजराती पकवान में गुड़ या फिर हल्की चीनी का प्रयोग किया जाता है।

अतिथि देवो भव
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जब बात मेहमानों का स्वागत करने की आती है, तो गुजरातियों को कोई नहीं पछाड़ सकता है। गुजरती अपने मेहमान का स्वागत बांहे और दिल खोलकर करते हैं।

गुजरात के त्यौहार
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प्राचीन मंदिर
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ऐतिहासिक जगहों का भंडार
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गुजराती हस्तशिल्प
गुजरात वास्तव में भारत की सांस्कृतिक राजधानी है। गुजराती हस्तशिल्प आप भारत में कहीं और नहीं पा सकते हैं। यहाँ की कला एवं शिल्प का मिश्रित संयोजन सभी को अपनी तरफ आकर्षित करता रहा है। गुजरात की ये कला पिछले कई सालों से पीढ़ी-दर-पीढ़ी पोषित होती रही हैं और हजारों हस्तशिल्पकारों को रोजगार प्रदान करती हैं।

समुद्री तट
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गुजरात के खूबसूरत हिल स्टेशन
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रण ऑफ कच्छ
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गिर नेशनल पार्क में वन्यजीवों को देखें
Pc: Nikunj vasoya
देश में टाइगर्स को बिग कैट भी कहा जाता है। इस अभ्यारण्य में आप जंगल के राजा एशियाटिक शेर को भी देख सकते हैं। गिर वन्यजीव अभ्यारण्य में एशियाटिक शेर अब खत्म होने की कगार पर हैं। ये पहले सीरिया के क्षेत्रों में पाए जाते थे लेकिन 1870 में इनका शिकार किए जाने के कारण ये प्रजाति लुप्त हो गई। संरक्षण प्रयासों के कारण इस प्रजाति के शेरों की संख्या को बढ़ाया जा सका है। कभी-कभी ये शेर अपने आप ही दीउ के तट और संरक्षण क्षेत्र में चले जाते हैं। एशियाटिक शेर के अलावा इस अभ्यारण्य में पशुओं की 40 अन्य प्रजातियां भी देखने को मिलती हैं जिनमें स्पॉट हिरण, सांबर, गैज़ेले आदि भी शामिल हैं।



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