भारत के बारे में कहा जाता है कि यहां कोस-कोस पर पानी और बोली दोनों बदलती है। भारत को यूं ही विविधताओं का देश नहीं कहा जाता है। इसके एक-एक राज्य में असंख्य भाषाओं में लोग बातें करते हैं। जितने लोग उतने ही मंदिर और प्रार्थनास्थल और हर प्रार्थनास्थल की अपनी अलग विशिष्टता। आमतौर पर मंदिरों में जाने पर प्रसाद के रूप में लड्डू, नारियल, फल या फिर मिठाई दी जाती है। लेकिन...

आज हम कुछ ऐसे मंदिरों के बारे में बात करने वाले हैं, जहां प्रसाद के तौर पर ऐसी चीजें दी जाती हैं, जिनके बारे में आपने कभी सोचा भी नहीं होगा।
नूडल्स का प्रसाद
कोलकाता में मां काली के मंदिर सबसे अधिक प्रसिद्ध हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कोलकाता में एक काली मंदिर ऐसा भी है, जहां मां काली को चाइनीज व्यंजन प्रसाद के रूप में चढ़ाया जाता है। सिर्फ चढ़ाया ही नहीं जाता बल्कि इस मंदिर में नूडल्स प्रसाद के रूप में भक्तों में वितरित भी किया जाता है। कोलकाता के टेंगरा इलाके में करीब 23 साल पहले इस काली मंदिर की स्थापना भारतीय और चीनी समुदाय के लोगों ने मिलकर की थी।

इस मंदिर में प्रसाद के साथ ही जो धूप जलाई जाती है, वह भी चीनी ही होती है। इस वजह से इस मंदिर की खुशबू दूसरे मंदिरों से काफी अलग होती है। हालांकि यहां पूजा हिंदू रीति-रिवाजों के मुताबिक ही की जाती है।
अलग-अलग फ्लेवर के जैम का प्रसाद
ब्रेड के साथ जैम खाना अगर आपको पसंद है, तो तमिलनाडू के पलानी में स्थित भगवान मुरुगन के मंदिर में जरूर जाएं। इस मंदिर में हर रोज भगवान मुरुगन को अलग-अलग फलों से बना और स्वाद वाली जैम प्रसाद में चढ़ाई जाती है जिसे बाद में भक्तों में वितरित भी किया जाता है। इससे पता चलता है कि जैम सिर्फ भगवान के भक्तों को ही नहीं बल्कि भगवान मुरुगन का भी फेवरेट है।
चॉकलेट की माला से लेकर प्रसाद

भगवान मुरुगन को सिर्फ जैम ही नहीं बल्कि चॉकलेट भी बहुत पसंद है। इस बात का सबूत केरल के अलेप्पी में मौजूद भगवान मुरुगन का मंदिर है। इस मंदिर में भगवान को भोग के रूप में अलग-अलग तरह की चॉकलेट चढ़ाई जाती है। यहां भगवान को सिर्फ चढ़ाई ही नहीं बल्कि कई बार उन्हें चॉकलेट से बने मालाओं से सजाया भी जाता है। यूं तो हर मंदिर में जाना भक्तों को बहुत पसंद होता है लेकिन हम दावे के साथ कह सकते हैं कि बच्चों के बीच केरल का यह मंदिर खूब लोकप्रिय होगा।
प्रसाद में रज से भींगा कपड़ा
असम के गुवाहाटी में स्थिति मां कमाख्या के मंदिर की खासियतों से तो सभी वाकिफ हैं। यह दुनिया का एकलौता ऐसा मंदिर है, जिसके बारे में कहा जाता है कि यहां देवी मां भी रजस्वला (मासिक धर्म) होती हैं। साल के एक विशेष समय में मंदिर को 4 दिनों के लिए बंद कर दिया जाता है। उस समय मंदिर के गर्भगृह में देवी मां के विग्रह के पास सुखा कपड़ा रख दिया जाता है। 5वें दिन जब मंदिर को खोला जाता है, तब मंदिर के गर्भगृह में रखा वह कपड़ा पूरी तरह से गीला मिलता है। दावा किया जाता है कि यह देवी मां के रज से गीला हुआ है और उस गीले कपड़े को ही प्रसाद के रूप में टूकड़ों में काटकर भक्तों में वितरित किया जाता है।
भोग में चढ़ता है कई क्विंटल प्याज

राजस्थान के हनुमानगढ़ी में मौजूद गोगामेड़ी मंदिर में देवता को भोग के रूप में मिठाई नहीं बल्कि प्याज चढ़ाने की परंपरा है। बताया जाता है कि यह परंपरा हजारों साल पुरानी है, जिसका आज भी पालन किया जा रहा है। कहा जाता है कि भाद्र के महीने में यहां 15 दिनों का मेला लगता है। उस समय मंदिर में दर्शन करने आने वाला हर भक्त भगवान को प्याज चढ़ाता है, जिससे सैंकड़ों क्विंटल प्याज जमा हो जाती है। मेला खत्म होने के बाद प्याज की बिक्री कर उस पैसे से मंदिर में भंडारा आयोजित किया जाता है।



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