कश्मीर घाटी को देश के दूसरे हिस्सों से जोड़ने के लिए लंबे समय से चल रही उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक (USBRL) परियोजना ने ऐतिहासिक कामयाबी प्राप्त की है। इस परियोजना पर ट्रैक का काम पूरा हो चुका है, जिस बात की जानकारी केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने खुद दी। यह परियोजना भारत की आजादी के बाद सबसे चुनौतीपूर्ण परियोजनाओं में से एक थी, जिसकी शुरुआत 1990 के दशक में हुई थी।
हिमालय के पर्वतीय क्षेत्रों को रेल मार्ग से जोड़ने की दिशा में उठाए गये इस कदम ने देश के रेलवे इतिहास को ही बदलकर रख दिया था। USBRL के आखिरी हिस्से में रेलवे ट्रैक बिछाने के साथ ही 272 किमी लंबी यह परियोजना पूरी हो गयी। क्या आप जानते हैं, यह परियोजना इतनी महत्वपूर्ण क्यों है? दिल्ली-श्रीनगर वंदे भारत एक्सप्रेस का इस परियोजना के पूरे होने क्या संबंध है?
USBRL परियोजना का Details
मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो वित्तीय वर्ष 1994-95 में तत्कालिन प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव ने USBRL परियोजना का प्रस्ताव रखा था, जिसे पूर्ण सहमती से पारित भी कर दिया गया था। कई सालों तक काफी धीमी गति से आगे बढ़ती हुई यह परियोजना अब अपने आखिरी पड़ाव पर पहुंच चुकी है। इस परियोजना के पूरे होने की वजह से रेलवे नेटवर्क उत्तर कश्मीर में बारामूला तक विस्तृत हो जाएगा।
अब तक यात्री व मालवाही ट्रेनों का संचालन दिल्ली से श्रीनगर के बीच ही किया जाता था। क्या आप जानते हैं, दिल्ली-श्रीनगर वंदे भारत एक्सप्रेस, जिसकी शुरुआत अगले साल जनवरी में की जा सकती है, वह भी USBRL से ही होकर गुजरेगी। USBRL परियोजना का मुख्य आकर्षण चिनाब रेल ब्रिज है, जो दुनिया का सबसे ऊंचा रेल ब्रिज है। इसके अलावा हिमालय के पर्वतीय क्षेत्रों को काटकर, सुरंग बनाकर इस परियोजना के तहत रेलवे ट्रैक को बिछाया गया है, जो अपने-आप में ही बहुत बड़ी चुनौती थी।
रेल मंत्री ने लिखा
अपने आधिकारिक X हैंडल पर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने एक पोस्ट करते हुए इसे एक ऐतिहासिक मील का पत्थर करार दिया। उन्होंने इस बात की पुष्टि करते हुए लिखा कि USBRL के अंतिम ट्रैक का काम पूरा हो चुका है। 3.2 किमी लंबी सुरंग T-33, जो श्री माता वैष्णो देवी श्राइन के पास स्थित है, में बिना गिट्टी वाले ट्रैक का काम सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है। यह कटरा को रियासी से जोड़ेगा।
मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार 272 किमी लंबी USBRL परियोजना में से 200 किमी का काम पूरा हो चुका है। बाकी के हिस्से का काम अभी भी जारी है। इस परियोजना की सबसे लंबी सुरंग T-49 है, जो करीब 12.77 किमी लंबी है।
इस सुरंग को शुरू करने के बाद यह देश की सबसे लंबी रेलवे ट्रांसपोर्टेशन सुरंग बन जाएगी। अब तक USBRL परियोजना को लेकर करीब ₹41,000 करोड़ से भी ज्यादा का खर्च हो चुका है। हालांकि जिस समय इस परियोजना को मंजूरी दी गयी थी, तब इसे ₹2500 करोड़ की लागत से पूरा करने का लक्ष्य बनाया गया था।
इस परियोजना का मुख्य आकर्षण चिनाब रेल ब्रिज है, जो 1315 मीटर लंबी और 467 मीटर चौड़ी है। इसे चिनाब नदी पर 359 मीटर की ऊंचाई पर बनाया गया है। अगले साल जनवरी में दिल्ली से श्रीनगर के बीच वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की शुरुआत होगी, वह चिनाब रेल ब्रिज से ही होकर गुजरेगी।



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