कैलाश शिखर के दर्शन के लिए जाना...हर धार्मिक व्यक्ति का यह सपना होता है कि जीवन में एक बार महादेव के कैलाश शिखर के दर्शन हो सकें। धार्मिक और अध्यात्मिक दृष्टिकोण के अलावा यात्रा के नजरिये से भी यह एक ऐसा सफर होता है जिसकी यादों को हर कोई जीवन भर संजो कर रखना चाहेगा। कैलाश पर्वत की मान्यताएं सिर्फ हिंदू धर्म में ही नहीं, बौद्ध धर्म में भी काफी ज्यादा है।
इस वजह से दुनिया भर से लोग इसके दर्शन करने आना चाहते हैं। अब कैलाश पर्वत के दर्शन करने के लिए चीन जाने की जरूरत नहीं होगी। भारतीय भूखंड से ही कैलाश शिखर और ओम पर्वत के दर्शन हो सकेंगे। क्यों, क्योंकि जल्द ही पिथौरागढ़ का लिपुलेख दर्रा (Pass) खुलने वाला है।
श्रद्धालु उत्तराखंड में 18300 फीट की ऊंचाई पर मौजूद लिपुलेख दर्रा से तिब्बत में मौजूद कैलाश शिखर के दर्शन कर सकेंगे। यह दर्रा उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले की व्यास घाटी में मौजूद है। पिथौरागढ़ जिला पर्यटन अधिकारी कीर्ति चंद्र आर्य ने इस बात की पुष्टि करते हुए मीडिया को दिये अपने बयान में कहा कि श्रद्धालु धारचूला से अपने वाहनों से लिपुलेख दर्रा तक जा सकेंगे और वहां से उन्हें कैलाश शिखर व ओम पर्वत के स्पष्ट दर्शन मिलेंगे।
कब से खुलेगा लिपुलेख दर्रा?
India.com की एक रिपोर्ट के मुताबिक श्रद्धालुओं के लिए लिपुलेख दर्रा 15 सितंबर से खोल दिया जाएगा। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार श्रद्धालुओं को ऑक्सीजन लेने में कई दिक्कत न हो, इसके लिए उन्हें 2 दिन पहले गूंजी में रुकना पड़ेगा। उसके बाद उन्हें कैलाश शिखर के दर्शन के लिए रवाना किया जाएगा। लिपुलेख दर्रा के कैलाश शिखर व्यू प्वाएंट पर किसी को ऑक्सीजन की परेशानी न हो, इसके लिए वहां भी ऑक्सीजन की व्यवस्था की जाएगी।
बता दें, कोविड-19 अतिमारी के कारण वर्ष 2019 में लिपुलेख दर्रा के माध्यम से कैलाश-मानसरोवर की यात्रा पर रोक लगा दी गयी थी। उसके बाद से लेकर अब तक चीन ने इस मार्ग को नहीं खोला है। इस वजह से श्रद्धालु कैलाश पर्वत के दर्शन के लिए भी नहीं जा पा रहे थे। लेकिन अब इस दर्रे के खुल जाने के बाद उन्हें भारतीय भूभाग से ही कैलाश चोटी और ओम पर्वत के दर्शन हो सकेंगे। गौरतलब है कि उत्तराखंड के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज और उनकी पत्नी ने गत 22 जून को लिपुलेख दर्रा से कैलाश शिखर के दर्शन भी किये थे।
कैसे होंगे कैलाश शिखर के दर्शन?
कैलाश शिखर और ओम पर्वत के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को अब किसी पासपोर्ट या वीजा अथवा हवाई उड़ान की जरूरत नहीं पड़ेगी। मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार श्रद्धालुओं को धारचुला से अपने वाहनों से लिपुलेख पहुंचना होगा।
लिपुलेख से करीब 800 मीटर का पैदल रास्ता तय करने के बाद ही उन्हें कैलाश शिखर के स्पष्ट दर्शन मिलेंगे। यह दर्शन उन्हें भारतीय भूभाग से ही बिना किसी अड़चन के ही मिलेगा। बता दें, उत्तराखंड का पिथौरागढ़ जिला कुमाऊं की शाम माना जाता है। पर्यटन के लिहाज से इस जगह का काफी महत्व माना जाता है।
पिथौरागढ़ हिल स्टेशन समुद्र तल से करीब 2010 मीटर की ऊंचाई पर मौजूद है। सैलानी यहां नंदा देवी, नंदा कोट और पंचचूली पहाड़ियों को निहार सकते हैं। ये हिमश्रृंखलाएं बेहद खूबसूरत हैं और उत्तराखंड घूमने आने वाले हर पर्यटकों को खूब आकर्षित करता है।



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