बॉलीवुड एक्टर शत्रुघ्न सिन्हा, जिनके घर का नाम 'रामायण' और उनके दो बेटों का नाम 'लव-कुश' है। रामायण के आधार पर यूं ही उनका या उनके बच्चों का नाम नहीं रखा गया है, बल्कि इसके पीछे बनारस के रमापति बैंक का हाथ है। जी हां, वहीं बैंक जहां राम नाम की कर्ज दिया जाता है। अयोध्या के अलावा बनारस के इस बैंक में भी भगवान श्रीराम रामलला के रूप में विराजते हैं।

पिछले 96 सालों से चल रहे इस बैंक की तरफ से राम मंदिर के उद्घाटन के समय अयोध्या में खिलौने की भेंट भेजी जाएगी, जिसमें वो सभी खिलौने होंगे जो रामलला को बेहद प्रिय हैं।
सबसे पहले बताते हैं कि रमापति बैंक क्या है?
वाराणसी में चल रहा रमापति बैंक एक ऐसा बैंक है, जिसमें लाखों खाताधारक हैं, लेकिन वे यहां एक रूपया भी जमा नहीं करते हैं। वाराणसी में विश्वनाथ धाम के निकट त्रिपुरा भैरवी गली में चल रहे इस बैंक में जमा होता है तो पुण्य और मिलता है राम-नाम का कर्ज। किसी भी आम बैंक की तरह काम करने वाले रमापति बैंक खाता खुलवाने के लिए सभी प्रक्रियाओं को पूरी किया जाता है। इस बैंक में बकायदा कर्मचारियों की नियुक्ति की गयी है।

जब भी कोई श्रद्धालु बैंक में अपना खाता खुलवाने आता है तो उसे बैंक के सभी नियमों का पालन करते हुए फॉर्म भरवाया जाता है। इन फॉर्म में रामभक्त का नाम, उनका पता और राम-नाम का कर्ज लेने का कारण के साथ-साथ अपनी मन्नत भी लिखनी होती है। भक्तों द्वारा लिखे गये राम नाम के कागजों को लाल रंग की पोटलियों में बड़ा ही संभाल कर रखा जाता है, जिनकी संख्या अरबों से ऊपर पहुंच चुकी है।
शत्रुघ्न सिन्हा और रमापति बैंक का कनेक्शन

बॉलीवुड एक्टर शत्रुघ्न सिन्हा के माता-पिता ने भी बनारस के रमापति बैंक से रामनाम का कर्ज लिया था। स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार शत्रुघ्न सिन्हा के माता-पिता को जब लंबे समय तक कोई संतान नहीं हुई तो बनारस के घाट पर घुमते एक संत ने उनकी मां को रमापति बैंक से रामनाम का कर्ज लेने के लिए कहा। इसके बाद ही एक-एक कर शत्रुघ्न सिन्हा समेत उनके 4 भाईयों का जन्म हुआ, जिनके नाम राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न रखे गए।
इस बात का उल्लेख बॉलीवुड के इस दिग्गज एक्टर ने अपनी आत्मकथा में भी किया है। इसी वजह से ही शत्रुघ्न सिन्हा ने अपने घर का नाम 'रामायण' और अपने दो बेटों का नाम 'लव-कुश' रखा है। शत्रुघ्न सिन्हा काफी पहले अपनी पत्नी और बेटी सोनाक्षी सिन्हा के साथ रमापति बैंक में आए भी थे।
कैसे लेंगे राम-नाम का कर्ज?

साल में सिर्फ एक बार राम नवमी के समय ही इस बैंक में खाता खुलवाने के लिए लोग आते हैं। फॉर्म भरने पर बैंक के रूप में काम करने वाले इस मंदिर में भक्तों को लाल स्याही, कलम और सादा कागज दे दिया जाता है। अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए भक्त यहां रामनाम का कर्ज लेते हैं। इस कर्ज को उन्हें 8 माह 10 दिनों में वापस लौटाना होता है। यानी हर रोज 500 राम नाम के हिसाब से सवा लाख बार भगवान राम का नाम सादे कागज पर लाल स्याही से लिखना पड़ता है।
कोई श्रद्धालु चाहे तो हर रोज 500 राम नाम के हिसाब से 21 माह या तीन वर्ष तक राम नाम का जाप कर सकता है। इसके बाद संपूर्ण लेखन को पूरे विधि-विधान के साथ लाल पोटली में बांध कर बैंक को जमा करनी होती है। इस बैंक से राम नाम का कर्ज लेने का मुख्य कारण अध्यात्म और राम भक्ति को बढ़ावा देना और अपनी मनोकामनाओं को पूरा करना होता है। कर्ज के आधार पर लोग रामनाम लेखन, रामनाम पाठ या राम मंत्र का जाप चुन सकते हैं। भगवान शिव की नगरी में श्रीराम ही नहीं बल्कि शिवनाम का कर्ज भी लिया जा सकता है।
रामलला के लिए भेजे जाएंगे खिलौने

अयोध्या में रामलला जब अस्थायी मंदिर में विराजमान थे, उस समय भी रमापति बैंक में भगवान श्रीराम रामलला के स्वरूप में चांदी के सिंहासन पर विराजमान थे। रमापति बैंक में भगवान राम को भेंट स्वरूप लकड़ी से बने रंग-बिरंगे खिलौने चढ़ाए जाते हैं, जिनमें तीर-धनुष, हाथी, घोड़े आदि होते हैं। रमापति बैंक की तरफ से अयोध्या में राम मंदिर के उद्घाटन के समय खिलौनों की भेंट भेजी जाएगी।
करना होगा किन कड़े नियमों का पालन?
रामनाम लेखन के लिए जिन कड़े नियमों का पालन करना होता है वो निम्न हैं :-
- भक्त केवल सुबह 4 बजे से 7 बजे तक यानी ब्रह्ममुहूर्त में ही भगवान राम का नाम लिख सकते हैं।
- नाम ठीक 1.25 लाख बार या हर रोज 500 बार ही होना चाहिए।
- 1.25 लाख बार नाम लिखने का काम 8 महीने 10 दिनों में ही पूरा होना चाहिए।
- इस पूरी प्रक्रिया के दौरान भक्तों को मांसाहार का त्याग करना होगा।
- भक्त प्याज और लहसुन युक्त भोजन भी नहीं खा सकेंगे।
- मदिरा का सेवन नहीं कर सकेंगे।
- एक थाली से जुठा भोजन नहीं खा सकेंगे।
- किसी के जन्म या मृत्यु के अशुद्ध भोजन को ग्रहण नहीं कर पाएंगे।
मिले आंकड़ों के अनुसार पिछले साल तक इस बैंक में 19 अरब 39 करोड़ 59 लाख 25 हजार केवल रामनाम और 1.25 करोड़ शिवनाम जमा हो चुके हैं।



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