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क्रिसमस2017: जाने ईसाईयों के प्रमुख तीर्थस्थलों के बारे

केरल हमेशा ईसाइयों के लिए लिए जाना जाता है,और यह भारत में सबसे महत्वपूर्ण ईसाई तीर्थयात्रियों में से एक है।

By Goldi

इसमें कोई शक नहीं है कि,यह खूबसूरत राज्य शानदार बैकवाटर, समुद्र तटों,हिल स्टेशन के साथ साथ बेहद ही सुंदर गिरिजाघरों के लिए भी जाना जाता है।

अगर आप एकदम शांति वाली जगह पर क्रिसमस के दौरान छुट्टियां मनाना चाहते हैं,केरल एक उत्तम जगह साबित हो सकती है। इसी क्रम में हम आपको बताने जा रहे हैं, केरल कुछ बेहद ही चर्च के बारे में..जहां क्रिसमस के दौरान आप अपने परिवार और दोस्तों के साथ छुट्टियां बिताने जा सकते हैं।

सैंट फ्रांसेस चर्च, कोच्ची

सैंट फ्रांसेस चर्च, कोच्ची

केरल के कोच्ची में स्थित सैंट फ्रांसेस चर्च का निर्माण 1503 में किया गया। यह चर्च भारत के सबसे पुराने गिरिजाघरों में से एक है। यह चर्च महान पुर्तगाली नाविक वास्को दा गामा से जुड़ा हुआ है। गामा की कब्र चर्च के पास ही स्थित है..जिनका निधन 16 वीं शताब्दी में हुआ था..चौदह वषों के बाद उनके शव को लिस्बोन ले जाया गया। चर्च का निर्माण पहले लकड़ी द्वारा किया गया था। हालांकि 1506 में फ्रांसीसी भिक्षुओं ने गारे और ईंटों का उपयोग करके इस चर्च का पुन: निर्माण किया। नए चर्च का निर्माण 1516 में पूर्ण हुआ। चर्च के अलावा पर्यटक यहां कोच्ची किला,मरीन दिर्वे आदि देख सकते हैं।Pc:Ranjith Siji

सेंट एंड्रयू फॉरेन चर्च, आरथुंकल

सेंट एंड्रयू फॉरेन चर्च, आरथुंकल

ईसाईयों के अलावा अन्य धर्मों के लोगों के लिए आरथुंकल एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है। केरल का यह तटीय शहर अलेप्पी से 21 किमी दूर स्थित है और मुख्य रूप से शानदार सेंट एंड्रयू फरेन चर्च के लिए जाना जाता है।

इस चर्च का निर्माण पुर्तगाली मिशनरियों द्वारा 16 वीं शताब्दी में कराया गया था। पूरे साल यहां भक्तों का तांता लगा रहता है, खासकर की थैंक्सगिविंग डे और क्रिसमस के दौरान यहां की रौनक देखते ही बनती है।Pc:Challiyil Eswaramangalath Vipin

बेसिलिका ऑफ़ आवर लेडी ऑफ डोलोर्स चर्च, त्रिशूर

बेसिलिका ऑफ़ आवर लेडी ऑफ डोलोर्स चर्च, त्रिशूर

त्रिशूर के श्रद्धेय शहर में स्थित,बेसिलिका ऑफ़ आवर लेडी ऑफ डोलोर्स चर्च इंडो गॉथिक वास्तुकला में निर्मित एक बेहद ही खूबसूरत चर्च है। यह सिरो-मालाबार कैथोलिक चर्च की एक छोटी सी बेसिलिका है।

25 हजार स्क्वायरफीट में फैला यह चर्च भारत का शबे बड़ा हो सकता है..इस चर्च का निर्माण 1814 में किया गया था..यह एशिया के सबसे लम्बे गिरिजाघरों में से एक है। त्रिशुर की यात्रा के दौरान इस चर्च को जरुर घूमना चाहिए..

गिरजाघरों के अलावा त्रिशुर हिंदुयों का प्रमुख तीर्थ स्थल है..यहां वड़क्कननाथ मंदिर देख सकते हैं..साथ ही अप्रैल और मई के महीने में त्रिशुरपुरम देख सकते हैं।Pc:Trilok Rangan

सेंट जोसेफ के कैथेड्रल, त्रिवेंद्रम

सेंट जोसेफ के कैथेड्रल, त्रिवेंद्रम

स्थानीय तौर पर पलायम पल्ली के नाम से जाना जाता है, सेंट जोसेफ के कैथेड्रल का निर्माण 1873 में किया गया था। इस मंदिर में लगी हुई घंटियां बेल्जियम से मंगाई गयी थी। चर्च के अलावा पर्यटक त्रिवेंद्रम कनककुन्नु पैलेस, पूवर आइलैंड,आदि देख सकते हैं।pc:Carol Nettar

सांता क्रूज़ कैथेड्रल, कोच्चि

सांता क्रूज़ कैथेड्रल, कोच्चि

सांता क्रूज़ कैथेड्रल चर्च कैथेड्रल फोर्ट में स्थित है, और भारत के प्रथम चर्च में से एक है। इसका स्था देश के मौजूदा आठ बेसीलिकाओं में है।यह गिरिजाघर शैली, स्थापत्य कला और भव्यता का शानदार संयोजन है। यह शहर की उन इमारतों में से एक है जो गॉथिक प्रभाव को प्रदर्शित करती है।इस चर्च का निर्माण पुर्तगाली द्वारा किया गया था, लेकिन बाद में इसे अंग्रेजों ने बनवाया..यदि आप क्रिसमस के दौरान कोच्ची में हैं..तो इस चर्च की यात्रा जरुर करें।Pc:Elroy Serrao

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