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बल्हारशाह जंक्शन पर क्यों रुकती हैं दक्षिण जाने वाली सभी ट्रेनें? जानिए वैज्ञानिक कारण

बल्हारशाह एक छोटा सा कस्बा, जिसे आम तौर पर केवल वही लोग जानते हैं, जो उत्तर से दक्षिण की ओर ट्रेन से यात्रा करते हैं। अगर आप भी दिल्ली, लखनऊ, कानपुर, भोपाल, झांसी, आदि स्टेशन से बेंगलुरु, चेन्नई, तिरुवनंतपुरम, आदि जा रहे हैं, तो बल्हारशाह पर लाइव दोसा काउंटर पर दोसा जरूर ट्राई कीजियेगा....

Balharshah Junction Railway Station

बेंगलुरु, चेन्नई, तिरुवनंतपुरम या कहीं भी जाना हो, अगर आप उत्तर से दक्षिण की ओर ट्रेन का सफर कर रहे हैं, तो आपकी ट्रेन कहीं रुके न रुके, महाराष्‍ट्र के एक छोटे से स्टेशन बल्हारशाह जंक्शन पर जरूर रुकेगी। यह स्टेशन इतना खूबसूरत है, जो आपको एक अलग ही फील देगा, भले ही यहां से कोई बड़ा शहर कनेक्ट होता है, जो भारी संख्‍या में लोग यहां पर उतरें और न हीं इस स्टेशन पर भोजन के बड़े-बड़े आउटलेट हैं, लेकिन फिर भी दक्षिण की ओर जाने वाली सभी ट्रेनें यहां रुकती हैं। ऐसा क्यों? सवाल भले ही साधारण है, पर इसका उत्तर बड़ा ही दिलचस्प है। और हां, हमारी गारंटी है कि इसे पढ़ने के बाद आपकी जनरल नॉलेज में आज एक खास चीज जुड़ने वाली है।

शुरुआत करते हैं बल्लारशाह के इतिहास से

बात 14वीं शताब्दी की है, जब सिरपुर (जो अब तेलंगाना में है) के राजा सूरजा बल्लालसिंह के निधन के बाद उनके बेटे खंडाक्या बल्लाला ने गद्दी संभाली, लेकिन वो अपनी राजधानी से खुश नहीं थे। भौगोलिक, आर्थिक और वित्तीय कारणों को सोचते हुए उन्‍होंने नई राजधानी बनाने का निर्णय लिया। उन्होंने 400 किलोमीटर दूर वरधा नदी के पास एक जगह तलाशी और वहां उन्होंने एक नया शहर बसाने का निर्णय लिया, वो भी अपने पिता के नाम पर। नई राजधानी में उन्होंने एक किले का निर्माण किया और शहर का नाम बल्लारसाहा रखा। उन्होंने सारा शासन यही से आगे बढ़ाया और फिर उत्तर की आरे एक और किला चंदरपुर किले का निर्माण करवाया।

Balharshah Junction Railway Station

वरधा नदी के पूर्वी छोर पर ऊंची-ऊंची दीवारें बनवा कर किले की सुरक्षा का इंतजाम किया, ताकि बाढ़ का प्रकोप किले पर नहीं पड़े। आज किला भले ही खंडहर में तब्दील हो चुका है, लेकिन ऊंची-ऊंची दीवारें और स्तंभ यहां आज भी मौजूद हैं।

दूर-दराज़ से आकर लोग बस गये

बल्हारशाह एक छोटा सा कस्बा है, जो महाराष्‍ट्र के चंद्रपुर जिले में आता है। राजा खंडाक्या बल्लाला द्वारा व्यापार को बढ़ावा दिये जाने के कारण यहां पर दूर-दूर से लोग व्यापार करने आते थे। आगे चलकर यहां बड़ी संख्‍या में लोग बाहर से आकर बस गये। मराठी लोगों के अलावा यहां पर रहने वाले लोग मूल रूप से दक्षिण भारत, बिहार, झारखंड से हैं।

रोज़ाना गुजरती हैं 175 से अधिक ट्रेनें

यह अपने आप में एक अनोखा स्टेशन है, जहां पर दिन भर में 175 से अधिक ट्रेनें गुजरती हैं, लेकिन मात्र एक ट्रेन है, जो केवल एक मिनट के लिए रुकती है। वो है क्रांति भोपाल एक्सप्रेस (07619)। तीन ट्रेनें हैं जो 5 मिनट रुकती हैं, और बाकी की सभी ट्रेनें कम से कम 10 मिनट के लिए रुकती हैं। इनमें 10 ट्रेनें ऐसी भी हैं जो 20 मिनट तक रुकती हैं।

अगर आपकी ट्रेन भी 20 मिनट के लिए रुक रही है, तो एक बार प्लेटफॉर्म पर उतर कर इस स्टेशन की खूबसूरती जरूर देखियेगा। यहां पर पूरे रेलवे स्टेशन पर आपको जंगली जानवरों की पेंटिंग दिखाई देंगी। यूं कहिये कि यहां पर शेर, चीता, बाघ, तेंदुए से लेकर हिरन, मगरमच्‍छ सब हैं।

बल्हारशाह जंक्शन का इडली-वड़ा, लाइव दोसा काउंटर

अगर आप दक्षिण की सैर करने निकले हैं तो ध्‍यान रहे, नागपुर से करीब साढ़े तीन घंटे बाद बल्हारशाह स्टेशन आता है। यहां पर आपको वेब बिरयानी, पूड़ी सब्जी, वड़ा पॉव, आदि नहीं मिलेगा। लेकिन जो मिलेगा वो बेहद स्वादिष्‍ट होता है। जी हां यहां की इडली-वड़ा और दोसा जरूर ट्राई कीजियेगा। उससे भी खास है यहां पर लाइव दोसा काउंटर, जोकि महज़ एक ठेले पर होगा। दोसे के साथ आपको सांभर नहीं मिलेगा, लेकिन चटली ला जवाब होगी। गर्मा-गरम दोसा आपकी इस यात्रा को अविस्मरणीय बना देगा। खास बात यह है कि गर्मी हो या जाड़ा, यहां पर सभी प्‍लेटफॉर्म पर आपको इडली, दोसा जरूर मिलेगा।

Balharshah Junction Railway Station

क्यों रुकती हैं सभी ट्रेनें?

आइये अब आपको बताते हैं कि आखिर क्या कारण हैं, जो बल्हारशाह पर उत्तर से दक्षिण जाने वाली सभी ट्रेनें 10 से 20 मिनट के लिए रुकती हैं।

1. बल्हारशाह वो जंक्शन है, जहां पर यह तय होता है कि ट्रेन दक्षिण में किस ओर जानी है। जी हां यहीं से एक रूट सिकंदराबाद के लिए कटता है, दूसरा चेन्नई के लिए। यहीं से तय हो जाता है कि ट्रेन आगे चलकर केरल की ओर टर्न लेगी या कर्नाटक की ओर।

2. सभी टीटीई, गार्ड, लोको पायलट की 8 घंटे की शिफ्ट होती है और यह शिफ्ट बल्हारशाह पर आकर समाप्त हो जाती है। जी हां, यहीं पर ट्रेनों के टीटी, ड्राइवर, गार्ड सब चेंज हो जाते हैं।

3. यहां पर ट्रेनों के इंजन की चेकिंग की जाती है। साथ में एक यूनिट ट्रेनों के वैक्यूम ब्रेक्स का जायजा भी लेती है। इसीलिए रेलवे की भाषा में बल्लारशाह के हॉल्‍ट को टेक्निकल हॉल्‍ट बोला जाता है।

4. टॉयलेट क्लीनिंग, टैंक फिल, आदि का काम भी इसी स्टेशन पर होता है। खास बात यह है कि ट्रेनों की साफ-सफाई करने वाले स्टाफ की फुर्ती भी देखने वाली होती है। सभी डिब्बों के बाथरूम व कॉमन एरिया की साफ सफाई और टैंक भरने का काम मात्र 15 से 20 मिनट में कर लेते हैं। साथ में यात्रियों से फीडबैक फॉर्म भी उसी समय अंतराल में भरवाना होता है।

बल्लारशाह पर ट्रेनें रुकने का वैज्ञानिक कारण

आखिर बल्हारशाह स्टेशन को ही इस काम के लिए क्यों चुना गया? दरअसल इसके पीछे भी वैज्ञानिक कारण है। बल्हारशाह नागपुर और काज़ीपेट के ठीक बीच में आता है और नागपुर भारत का भौगोलिक केंद्र है। पूरब, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण किसी भी दिशा से आने पर नागपुर सेंटर पर पड़ेगा। अब चूंकि नागपुर पहले से ही बहुत व्यस्त रेलवे स्टेशन है, इसलिए साफ-सफाई, वॉटर फिलिंग आदि का काम वहां से संभव नहीं है, इसलिए जब भारतीय रेल ने अपना विस्तार दक्षिण की ओर किया तो इस बात को ध्‍यान में रखते हुए बल्लारशाह को इस काम के लिए चुना।

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