देश में जल्द की गर्मी की शुरुआत होने वाली है। ठंड के प्रकोप के बाद बिना वसंत आए अचानक से ही गर्मी झुलसाने लगी है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस साल होली (25 मार्च) के समय ही लु चलने की शुरुआत हो जाएगी। उनका अनुमान है कि साल 2024 की गर्मी रिकॉर्ड तोड़ने वाली हो सकती है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार पिछले 100 साल से अधिक समय के मुकाबले साल 2023 के दिसंबर और 2024 के जनवरी में कम बारिश हुई थी। भारत मौसम विज्ञान विभाग का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ हिमालय को चकमा देता रहा है, जिसके परिणामस्वरूप असमान और कम वर्षा हुई। दिसंबर की बारिश में 65% की कमी आयी थी। वहीं जनवरी में बारिश की कमी 91% थी जो 1901 के बाद से दूसरी सबसे कम कमी है। हालांकि फरवरी में औसत कमी की भरपाई हुई और यह 33% पर आ गई।

पिछले साल से अधिक गर्म रही फरवरी
वहीं अगर तापमान की बात की जाए तो न्यूनतम तापमान में लगातार वृद्धि हो रही है, जिससे रात और दिन के बीच दैनिक तापमान में अंतर कम हो रहा है। क्या आप जानते हैं, पिछले साल के मुकाबले इस साल (2024) की फरवरी अधिक गर्म रही है। जी हां, भारत में सबसे गर्म फरवरी का महीना साल 1877 में दर्ज किया गया था, जिसका रिकॉर्ड पिछले साल (2023) की फरवरी ने तोड़ा था। साल 2023 की फरवरी में भारतीय क्षेत्र का औसत अधिकतम तापमान 29.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ था। लेकिन इस साल की फरवरी पिछले साल के औसत तापमान को भी पार कर गयी है।
पर्यावरणविदों ने इस बाबत अध्ययन भी किया है। आइए जानते हैं इस अध्ययन में क्या पता चला है -

तापमान बढ़ने का कारण बना अल नीनो
पर्यावरणविदों ने पिछले साल की तुलना में इस साल फरवरी का महीना अधिक गर्म होने की प्रमुख वजह अल नीनो की समुद्री घटना को माना है। अल नीनो हमेशा सामान्य से कम मानसून, गर्म सर्दियों और कोहरे वाले दिनों से जुड़ा होता है। अभी तक सीजन में इसी तरह का मौसम देखने को मिला था।
अल नीनो प्रशांत महासागर में औसतन हर 2 से 7 सालों में तैयार होता है और आमतौर पर 9 से 12 महीने तक रहता है। यह अपनी अपनी अनुपस्थित प्रकृति के लिए जाना जाता है। जब भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में सतह का पानी औसत से अधिक गर्म हो जाता है तब अल नीनो जैसी स्थिति उत्पन्न होती है।
क्या कहना है विशेषज्ञों का?
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने इस घटना के बार में कहा, "अगर अल नीनो की स्थिति उत्पन्न होती है तो उष्णकटिबंधीय क्षेत्र के पास गर्म हवा बढ़ जाती है और यह ठंडी हवा को उत्तर की ओर धकेल देती है। यह भारतीय क्षेत्र में पश्चिमी विक्षोभ के पैसज को सीमित कर देता है।" उन्होंने आगे कहा, "अल नीनो जैसी घटना के कारण ही न्यूनतम तापमान सामान्य से अधिक रहा और यह देश में गर्म सर्दियों के मौसम का कारण बना।"

ग्लोबल वार्मिंग भी है गर्म मौसम की वजह
पर्यावरणविद फरवरी के अधिक गर्म होने की एक और वजह ग्लोबल वार्मिंग के होने से भी इंकार नहीं कर सके हैं। IMD के एक अध्ययन के अनुसार अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में समुद्र की सतह का तापमान (SST) बढ़ रहा है। जमीन की सतह का तापमान और समुद्री सतह के तापमान के बीच एक गहरा संबंध है जो जलवायु पर प्रभाव डालता है।
उष्णकटिबंधीय अक्षांशों में समुद्र की सतह के तापमान में वृद्धि हुई है और समुद्र के पानी के तापमान में इस वृद्धि की प्रतिक्रिया के रूप में, उष्णकटिबंधीय भूमि की सतह के तापमान के साथ-साथ उष्णकटिबंधीय क्षोभमंडल तापमान में भी वृद्धि हुई है।



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