ना वीजा होता है और ना ही पासपोर्ट। इसके बावजूद साल के इस समय में दुनिया भर से हजारों मील का सफर तय कर लाखों की तादाद में आने वाले विदेशी मेहमानों का स्वागत हम दिल खोलकर करते हैं। इन विदेशी मेहमानों को ना सिर्फ रुकने के लिए उनकी पसंदीदा मुहैया करवायी जाती है बल्कि इनकी सुरक्षा का भी पूरा-पूरा ध्यान रखा जाता है। मगर अफसोस की बात...

कुछ समय तक हमारी मेहमानवाजी का आनंद उठाने के बाद ये परदेसी बिना कुछ कहे एक दिन यूं ही हजारों मील दूर स्थित अपने घरों के लिए उड़ान भर लेते हैं। मगर हमें इन विदेशी मेहमानों से इतना प्यार है कि वापस लौट जाने के बाद हम फिर से अगले साल इनके वापस लौटने का बेसब्री से इंतजार करना शुरू कर देते हैं। अब तक आप नहीं समझे! अरे जनाब! हम हर साल देशभर के पक्षी अभयारण्यों में लाखों की तादाद में आने वाले प्रवासी पक्षियों के बारे में बात कर रहे हैं।
अगर आप भी इन विदेशी मेहमानों से मिलना चाहते हैं तो सर्दियों का मौसम ही बेस्ट होता है जब विभिन्न राज्यों के झीलों और पक्षी अभयारण्यों में ये प्रवासी पक्षी पहुंचने लगते हैं।
ओखला पक्षी अभयारण्य, दिल्ली

अगर आप सर्दियों के मौसम में राजधानी दिल्ली घूमने जाने का प्लान बना रहे हैं तो अपने टूर प्लान में ओखला पक्षी अभयारण्य को जरूर शामिल करें। इस समय यहां विभिन्न देशों से कई तरह के पक्षी आते हैं जिनके आने का सिलसिला शुरू होना ही सर्दियों के आने का संदेश लेकर आता है। शहरों के व्यस्त जीवन में थोड़ी देर राहत की जगह चुराना चाहते हैं तो ओखला पक्षी अभयारण्य जरूर आएं। यहां आप पैदल चलते हुए पक्षियों को अपने रोजमर्रा के कामों को निपटाते हुए देख सकते हैं।
सुल्तानपुर पक्षी अभयारण्य, हरियाणा
दिल्ली के पास ही मौजूद सुल्तानपुर पक्षी अभयारण्य बर्ड वॉचिंग का बेस्ट लोकेशन हो सकता है। सर्दियों के मौसम में हरियाणा के इस पक्षी अभयारण्य में सैंकड़ों की संख्या में प्रवासी पक्षी आते हैं। यहां आप किंगफिशर, पेलीकैंस और गल्स ऑफ स्ट्रोक जैसे पक्षियों को करीब से देख सकते हैं। सुल्तानपुर बर्ड सेंचुअरी गुरुग्राम में मौजूद है।

चिल्का लेक, ओडिशा
चिल्का लेक एशिया का सबसे बड़ा कोस्टल लगून है। यहां साल भर पर्यटकों का आना-जाना लगा रहता है जो मुख्य रूप से डॉल्फिन देखने के लिए आते हैं। लेकिन क्या आपको पता है चिल्का लेक 100 से अधिक प्रजाति के पक्षियों का घर भी है। इसके अलावा यहां सर्दियों के मौसम में सैंकड़ों की संख्या में प्रवासी पक्षी भी आते हैं। प्रवासी पक्षियों को देखने के लिए चिल्का लेक के पास ही स्थित मंगलाजोड़ी भी एक अच्छी जगह है।
भरतपुर पक्षी अभयारण्य, राजस्थान
राजस्थान का यह पक्षी अभयारण्य देश के प्रमुख पक्षी अभयारण्य में से एक है। यहां आपको करीब 370 प्रजाति के पक्षी दिख सकते हैं जिनमें से कई यहां के स्थानीय निवासी होते हैं और कई प्रवासी पक्षी होते हैं जो हजारों मीलों का सफर तय कर भरतपुर, राजस्थान तक पहुंचते हैं।

सांतरागाछी झील, पश्चिम बंगाल
हावड़ा के सांतरागाछी झील में सैंकड़ों ने बल्कि करीब 3000-4000 की संख्या में प्रवासी पक्षी आते हैं। ये प्रवासी पक्षी नवंबर के महीने से यहां आना शुरू करते हैं और फरवरी में ये वापस अपने-अपने घरों के लिए उड़ान भरते हैं। पिछले साल यहां आने वाले प्रवासी पक्षियों की संख्या रिकॉर्ड 6,742 पर पहुंच गया था। सांतरागाछी झील में मुख्य रूप से साइबेरिया से आने वाले प्रवासी पक्षी पहुंचते हैं।

सलीम अली पक्षी अभ्यारण्य, गोवा
गोवा में मंडोवी नदी के तट पर एक शानदार पक्षी अभयारण्य भी मौजूद है, जिसके बारे में काफी कम लोगों ही पता होता है। यहां पक्षियों के साथ-साथ आप शानदार मैनग्रोव जंगलों का भी आनंद उठा सकते हैं। यहां पहुंचने के लिए आपको रवींद्र से फेरी सेवा लेनी पड़ेगी। गोवा में मौज-मस्ती और आनंद के बीच में जंगल और प्रकृति के बीच थोड़ा समय जरूर बिताएं। इससे रोजमर्रा की थकान दूर करने में आपको जरूर मदद मिलेगी।
थट्टेकड पक्षी अभयारण्य, केरल

केरल का थट्टेकड पक्षी अभयारण्य, वेस्टर्न घाट में मौजूद है जो विभिन्न प्रजाति के पक्षियों के लिए लोकप्रिय है। यहां आपको श्रीलंका से आने वाले कई दुर्लभ प्रजाति के प्रवासी पक्षी भी दिखेंगे। इनमें से कई पक्षियों की प्रजाति इस पक्षी अभयारण्य की स्थानीय है जो यहां सालभर नजर आती है।



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