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दिल्ली में प्रदूषण रोकने के लिए उठाए गए सख्त कदम, 1 अप्रैल से इन वाहनों को नहीं मिलेगा ईंधन

पिछले कई सालों से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में प्रदूषण एक बड़ी समस्या और चुनौती बनकर उभर रही है। खासतौर पर सर्दियों के मौसम में दिल्ली में प्रदूषण एक बड़ा सिरदर्द साबित होता है। लेकिन अब दिल्ली में प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए बड़े फैसले लिये गये हैं।

शनिवार को दिल्ली के नए मंत्रिमंडल के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने पर्यावरण, एससीडी और एनडीएमसी के साथ बैठक की। इस बैठक में प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए कई कड़े और सख्त फैसले लेने पर सहमति बनी है।

delhi pollution

पर्यावरण मंत्री सिरसा ने दिल्ली में प्रदूषण फैसले के 3 मुख्य कारण बताए -

1. धूल से फैलता प्रदूषण - हवा में धूल के कणों का लगातार बढ़ना इस प्रदूषण के फैलने का मुख्य कारण है। इसकी मुख्य वजह स्प्रिंकलर का नहीं लगना बताया गया।

2. वाहन से फैलता प्रदूषण - सड़कों पर धुआं उड़ाती वाहनों से निकलने वाली जहरीली हवा प्रदूषण का कारण होता है।

3. निर्माण कार्यों से फैलता प्रदूषण - पूरे महानगर के विभिन्न जगहों पर निर्माण कार्य तो हो रहे हैं, लेकिन कहीं भी एंटी-स्मॉग गन जैसी तकनीकों का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है, जो प्रदूषण को फैलने से रोक सकें।

दिल्ली में प्रदूषण को फैलने से रोकने के लिए उठाए गये सख्त कदम -

नहीं मिलेगा ईंधन - दिल्ली में प्रदूषण को फैलने से रोकने के लिए सबसे पहला और बड़ा जो कदम उठाया गया है, वह है 1 अप्रैल से 15 साल से पुराने वाहनों को पेट्रोल-डीजल नहीं दिया जाएगा। ऐसे वाहनों की पहचान के लिए विशेष टीम का गठन किया जाएगा। इस फैसले में चार पहिया वाहनों के साथ-साथ दो पहिया वाहनों को भी शामिल किया गया है। बताया जाता है कि वाहनों की पहचान के लिए जिस टीम का गठन किया जाएगा, उसमें विश्वविद्यालयों के छात्रों को भी शामिल किया जाएगा।

एंटी-स्मॉग गन का इस्तेमाल अनिवार्य - दिल्ली में हो रहे सभी तरह के निर्माण कार्यों की वजह से फैल रहे प्रदूषण को रोकने के लिए सभी कंस्ट्रक्शन साइट पर एंटी-स्मॉग गन का इस्तेमाल करना अनिवार्य किया गया है। दिल्ली की हर ऊंची इमारत में स्मोक गन लगाना होगा। एयरपोर्ट्स को 100 प्रतिशत ग्रीन बनाया जाएगा।

इसके साथ दिल्ली में नए वन क्षेत्रों को विकसित किया जाएगा, ताकि प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सकें। इसके लिए दिल्ली में खाली पड़ी जमीनों का उपयोग किया जाएगा। वृक्षारोपण के अभियान से भी यूनिवर्सिटी के छात्रों को जोड़ा जाएगा।

क्लाउड सीडिंग तकनीक - पिछले लंबे समय से दिल्ली में प्रदूषण को कम करने या नियंत्रित करने के लिए क्लाउड सीडिंग तकनीक की सहायता लेने के बारे में बात की जा रही है। दिल्ली के पर्यावरण मंत्री सिरसा ने शनिवार की बैठक के बाद इस बारे में घोषणा करते हुए कहा कि दिल्ली में प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित करने के लिए कृत्रिम बारिश की मदद ली जाएगी, जिसके लिए क्लाउड सीडिंग तकनीक अपनायी जाएगी।

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