अरब सागर पर बना निम्न दबाव का क्षेत्र अब चक्रवाती तूफान 'असना' में बदल चुका है। इस चक्रवाती तूफान का नाम पाकिस्तान ने दिया है। गुजरात में पहले बारिश व बाढ़ और अब तूफान से एक बार फिर से तबाही मचने का खतरा बन गया है। लेकिन चक्रवाती तूफान 'असना' भी कोई आम चक्रवात नहीं है, बल्कि कई मायनों ने इस चक्रवाती तूफान ने मौसम वैज्ञानिकों के भी होश उड़ा दिये हैं।
वहीं गुजरात में पिछले 3 दिनों में हुई मूसलाधार बारिश की वजह से लगभग 26 लोगों ने अपनी जान गंवा दी है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया गया है। वडोदरा के शहरी इलाकों में पानी भर जाने की वजह से वहां विशाल मगरमच्छ के घूमने की वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल भी हो रही है।

क्यों असना ने उड़ायी मौसम वैज्ञानिकों के रातों की नींद?
मिली जानकारी के अनुसार चक्रवाती तूफान असना 6 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से आगे बढ़ रहा है। बताया जाता है कि चक्रवाती तूफान असना गुजरात के नलिया से पश्चिम दिशा में 310 किमी दूर की दूरी पर है। मौसम विभाग ने संभावना जतायी है कि अगले 24 घंटों में यह भारतीय तटसीमा से और भी अधिक दूर चला जा सकता है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि चक्रवाती तूफान कोई आम तूफान नहीं है। यह एक ऐसा चक्रवाती तूफान है जो आमतौर पर नहीं बनता है।
क्यों अलग है चक्रवाती तूफान असना?
- चक्रवाती तूफान असना अरब सागर में बना है, जहां आमतौर पर परिस्थितियां अनुकूल नहीं होने की वजह से कम चक्रवात बनते हैं। ज्यादातर चक्रवाती तूफान बंगाल की खाड़ी में बनते हैं।
- इस समय अरब सागर के हालात चक्रवाती तूफान बनने के एकदम उलट हैं।
- मौसम विभाग के अनुसार वर्ष 1891 से 2023 के बीच अगस्त के महीने में अरब सागर में सिर्फ 3 चक्रवाती तूफान ही बने हैं - 1944, 1964 और 1976 में।
- जब समुद्र के पानी का 50 मीटर की गहराई तक तापमान 26.5 डिग्री सेल्सियस तक गर्म हो जाता है, तभी चक्रवात बनते हैं। इसलिए जुलाई के बाद और सितंबर तक ऐसे तूफानों का बनने की संभावना बहुत कम होती है, क्योंकि मानसून की वजह से समुद्र का तापमान कम बना रहता है।
- वर्ष 1976 के बाद यानी पिछले 48 सालों में ऐसा तूफान पहली बार बना है क्योंकि...
- आमतौर पर समुद्र में निम्न दबाव का क्षेत्र बनता है जो जमीन पर आकर बरसता है। लेकिन गुजरात में उलटा हो रहा है। गुजरात में जमीन पर निम्न दबाव का क्षेत्र बारिश की वजह बना और अब समुद्र में गहरा निम्न दबाव बना रहा है।
- यह सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात है, जिसकी वजह से इसे एक दुर्लभ घटना मानी जा रही है। स्थल भाग का एक बड़ा हिस्सा पार निम्न दबाव का क्षेत्र समुद्र में जाकर चक्रवाती तूफान बना रहा है।

मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि इस तूफान की तीव्रता पिछले कई दिनों में बिल्कुल भी कम नहीं हुई है। जो बहुत ही असामान्य बात है। इस वजह से सौराष्ट्र और कच्छ पर गहरा दबाव का क्षेत्र बन रहा है, जिससे यहां भारी से अतिभारी बारिश होने की आशंका भी बन रही है।
क्यों हो रहा है ऐसा?
मीडिया रिपोर्ट्स में किये गये दावों की मानें तो मौसम वैज्ञानिक इसके लिए ग्लोबल वॉर्मिंग की संभावनाओं से भी इंकार नहीं कर रहे हैं। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के पूर्व सचिव माधवन राजीवन ने भी अपने X हैंडल पर हैरानी जताते हुए लिखा है कि अरब सागर पर बने सिस्टम को देखकर मैं हैरान हूं।
हमने हमेशा यहीं जाना है कि इस समय उत्तरी अरब सागर ठंडा रहता है। यहां अगर चक्रवात बन रहा है तो इसका मतलब है कि वह गर्म है। यह ग्लोबल वॉर्मिंग और स्थानीय स्तर पर बढ़ते तापमान का नतीजा है। उन्होंने इस बारे में जांच करने की भी सलाह दी है।



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