गुजरात के अपने दौरे को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई मायनों में बेहद खास बना दिया। एक तरफ उन्होंने गुजरात की मुख्य भूमि को कच्छ की खाड़ी से जोड़ते सुदर्शन ब्रिज को राष्ट्र को समर्पित किया। यह देश का सबसे लंबा केबल ब्रिज है, जिसे 900 करोड़ से अधिक की लागत से तैयार किया गया है।
वहीं दूसरी ओर पीएम मोदी स्कूबा डाइविंग कर अरब सागर में डूबी द्वारका नगरी के दर्शन और पूजा की। इसे उन्होंने बड़ा ही दिव्य अनुभव करार दिया।

रविवार को पीएम मोदी द्वारकाधीश मंदिर में दर्शन किये। वहां उन्होंने द्वारिका पीठ के शंकराचार्य के भी दर्शन किये। वहां से वापस लौटकर नौसेना के जवानों के साथ गोमती घाट पर मौजूद सुदामा सेतु पार कर पंचकुई बीच पर पहुंचे। यहां से करीब 2 नॉटिकल मील दूर समुद्र में गोता लगाने के लिए बोट में बैठकर गये।
सोशल मीडिया पर अपनी इस रोमांचक धार्मिक यात्रा की पीएम मोदी ने तस्वीरें भी शेयर की है, जिसमें वह गोताखोरों वाला सफेद रंग का हेलमेट लगाए हुए नजर आ रहे हैं। हेलमेट पर भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा भी बना हुआ है। गेरुआ रंग के वस्त्रों में पीएम मोदी समुद्र की गहराईयों में ध्यान में तल्लीन नजर आ रहे हैं।
बता दें, द्वारिका को धार्मिक नगरी के रूप में जाना जाता है। अब इस शहर को पर्यटन क्षेत्र के तौर पर विकसित किया जा रहा है, जिसका मुख्य आकर्षण स्कूबा डाइविंग होने वाला है। पीएम मोदी ने तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा है, "पानी में डूबी द्वारिका नगरी में प्रार्थना करना बहुत ही दिव्य अनुभव था।
मुझे अध्यात्मिक वैभव और भक्ति के एक प्राचीन युग से जुड़ाव महसूस हुआ। भगवान श्रीकृष्ण हम सभी को आर्शीवाद दें।" उन्होंने आगे लिखा है, "आज मैं भावविभोर हूं। दशकों तक जो सपना संजोया और आज उस पवित्र भूमि को स्पर्श करके पूरा हुआ। आप कल्पना कर सकते हैं कि मेरे भीतर कितना आनंद होगा।"
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गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में ब्रजभूमि, गोकुल और नंदगांव में जहां भगवान श्रीकृष्ण के बाल-गोपाल और नटखट स्वरूप की पूजा होती है, वहीं देवभूमि द्वारिका में श्रीकृष्ण द्वारकाधिश के रूप में विराजते हैं।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण के आदेश द्वारका नगरी का निर्माण अरब सागर के बीच में एक द्वीप पर विश्वकर्मा ने किया था। कलयुग के प्रारंभ में जब यदुवंश समाप्त हुआ और श्रीकृष्ण की जीवनलीला पूर्ण हुई, उसके बाद ही द्वारिका नगरी समुद्र के तल में समा गयी। आज भी इस नगरी के अवशेष समुद्र की गहराईयों में मौजूद हैं।



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