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क्या जैसलमेर में जमीन से बाहर निकली विलुप्त सरस्वती नदी? क्यों किया जा रहा है ऐसा दावा?

हमारे देश में कदम-कदम पर जिस तरह भाषाएं बदलती रहती हैं, ठीक उसी तरह से हर जगह के साथ कोई न कोई पौराणिक कहानी जरूर जुड़ी होती है। इन दिनों खबरों की सुर्खियों में छाया हुआ है महाकुंभ मेला जो 12 सालों बाद प्रयागराज के संगम तट पर आयोजित होने वाला है। संगम के बारे में हम सभी जानते हैं कि यहां गंगा, यमुना और विलुप्त नदी सरस्वती का संगम होता है।

सरस्वती नदी को विलुप्त क्यों कहा जाता है, इस बारे में ठीक-ठीक कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है लेकिन कहा जाता है कि ऋग्वेद में सरस्वती नदी के बारे में करीब 80 जगहों पर उल्लेख किया गा है। कहा जाता है कि लगभग 5000 सालों पहले सरस्वती नदी जलवायु परिवर्तन की वजह से सुख गयी। वहीं कुछ लोग यह भी कहते हैं कि सरस्वती नदी धरती के अंदर से होकर बहती है, जिस वजह से वह दिखाई नहीं देती है।

jaisalmer saraswati river

लेकिन क्या आप जानते हैं राजस्थान में अचानक फिर से विलुप्त हो चुकी सरस्वती नदी के दिखाई देने या सामने आने की बातें कही जा रही हैं। दरअसल, राजस्थान के जैसलमेर के पास तारागढ़ गांव में चापाकल लगाने के लिए खुदाई की जा रही थी। मोहनगढ़ के चक 27 बीडी के पास जब जमीन की खुदाई की जा रही थी तभी अचानक जमीन नीचे धंसने लगी और करीब 22 टन वजनी मशीन से लदा हुआ ट्रक भी जमीन में 850 फुट गहरे गड्ढे में धंस गया।

इसके बाद जमीन के नीचे से पानी का फव्वारा बाहर निकलने लगा, जिसके साथ ही बड़ी मात्रा में प्राकृतिक गैस भी बाहर निकलने लगी। जमीन से बाहर पानी इतनी ज्यादा मात्रा में बाहर आने लगी कि देखते ही देखते वहां एक छोटे से तालाब का निर्माण हो गया। यह वीडियो भी इन दिनों सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। इस घटना के बाद से स्थानीय लोग दावा कर रहे हैं कि जमीन के नीचे से निकल रहा पानी ही विलुप्त हो चुकी सरस्वती नदी है।

पर क्या वाकई में यह विलुप्त हो चुकी वहीं सरस्वती नदी है, जिसका उल्लेख हमारे वेद-पुराणों में कई बार किया गया है? क्या कहना है इस बारे में वैज्ञानिकों का?

Times of India की एक रिपोर्ट में भूजल वैज्ञानिक के हवाले से बताया गया कि यह घटना आर्टेसियन स्थिति की वजह से घटित हुई। बताया जाता है कि जब भूजल एक जगह से बहते हुए नीचले हिस्से में एक प्वाएंट पर जमा होता है और वहां से फिर वह आगे बहता है। ऐसा एक परत के अंदर होता है जो भूजल के बहाव को रोकता है। इस घटना के बाद एक बार फिर से यह बहस छिड़ गयी है कि यह घटना एक ऐसी जगह पर हुई है, जहां सरस्वती नदी के बहने का दावा सदियों से किया जाता रहा है।

मीडिया से बात करते हुए भूजल विशेषज्ञ डॉ. नारायण दास ने बताया कि यह एक हिमस्खलन जैसी घटना है। यह एक दुर्लभ घटना है जो कई दिनों तक हो सकती है। उन्होंने इस बारे में समझाते हुए कहा कि यह घटना इसलिए हुई क्योंकि पानी बलुआ पत्थर और कीचड़ की मोटी परत के नीचे दबी हुई थी। जब ड्रील मशीन ने उस परत को तोड़ा तो पानी फव्वारे के साथ बाहर निकल आयी।

लेकिन अभी भी लोग यह सवाल जरूर उठा रहे हैं कि जैसलमेर के पास ट्यूबवेल के लिए ड्रील करते समय पानी का जो फव्वारा बाहर निकला क्या वह पानी विलुप्त हो चुकी सरस्वती नदी का है या माजरा कुछ और ही है? बता दें, मीडिया रिपोर्ट्स में किये गये दावों के मुताबिक ऋग्वेद में सरस्वती नदी को नदियों में श्रेष्ठा माना जाता है।

दावा किया जाता है कि यह नदी हिमालय से निकलती थी और हरियाणा, पंजाब, राजस्थान व गुजरात के रास्ते बहती थी। कहा जाता है कि इस नदी का मुख्य जलस्रोत सतलुज और यमुना नदी हुआ करती थी। जब इन नदियों ने अपना रास्ता बदल लिया तो सरस्वती नदी की जलधारा में पानी नहीं बचा और समय के साथ वह विलुप्त हो गयी।

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