राजस्थान में बीकानेर के पास लुणकरणसर में पिछले महीने ही अचानक एक दिन किसानों ने खेत पर काम करने जाते समय सड़क के किनारे एक छोटा सा गड्ढ़ा देखा जो जमीन धंस जाने की वजह से बनी थी। वह गड्ढ़ा लगातार चौड़ा और गहरा होता जा रहा था और देखते-ही-देखने वह छोटा सा गड्ढ़ा 70 फीट से ज्यादा गहरे और लगभग डेढ़ बीघा की जमीन में फैल गया।
गड्ढ़े के आसपास जितने भी पेड़ थे और पास से गुजरी सड़क भी इस गड्ढ़े में समा गयी। इसके बावजूद यहां जमीन का धंसना बंद नहीं हुआ। आखिरकार इस मामले की जांच के लिए ज्योलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (GSI) के वैज्ञानिकों को लुणकरणसर पहुंचना पड़ा। लगभग 6 दिनों तक बीकानेर में रहकर वैज्ञानिकों ने जमीन के धंसने की असली वजहों की जांच की।

मीडिया रिपोर्ट्स से मिली जानकारी के अनुसार 30 अप्रैल को वैज्ञानिक अपना काम पूरा कर वापस लौट गये हैं स्थानीय भूगर्भ वैज्ञानिकों के मुताबिक बीकानेर में जमीन धंसने की मुख्य वजह है पानी। जी हां, भूमिगत जल के कारण ही बीकानेर में लगभग 70 फीट और डेढ़ बीघा से ज्यादा की जमीन पर विशालाकार गड्ढ़ा बन गया है।
क्या कहा वैज्ञानिकों ने?
16 अप्रैल को बीकानेर के लुणकरणसर की जमीन में विशालाकार गड्ढ़ा बना और 24 अप्रैल को GSI के वैज्ञानिक इसकी जांच करने पहुंचे। जमीन धंसने के प्राथमिक कारणों के बारे में भूगर्भ शास्त्री से की गयी बात के मुताबिक जमीन धंसने की मूल वजह पानी का प्राकृतिक स्रोत है।
बताया जाता है कि इस स्थान पर किसी जमाने के अंदर पानी का विशाल स्रोत था, जो किसी कारणवश सुख गया है। पानी सुख जाने के कारण यहां वैक्यूम बन गया और जब वह वैक्यूम किसी भी कारण से अचानक खत्म हो गयी तो जमीन अंदर धंसने लगा।
क्यों खत्म हो गया भूजल?
भूगर्भ वैज्ञानिकों का मानना है कि इस इलाके में जमीन से अलग-अलग सोर्सेज से अनियंत्रित तरीके से पानी निकाला गया है। इसके साथ ही यहां वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम और भूजल को फिर से रिचार्ज करने की व्यवस्था भी ठीक से नहीं की गयी थी।
यहीं वजह से पानी के प्राकृतिक स्रोत खत्म तो होने लगे लेकिन भूजल फिर से वापस अपनी पुरानी स्थिति में नहीं आ सका। इसके साथ ही इलाके में भूजल का स्तर नीचे जाने का एक प्रमुख कारण कम बारिश का होना भी माना जाता है।

हालांकि अभी तक ज्योलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के वैज्ञानिकों ने इस बारे में कोई बयान नहीं दिया है। मिली जानकारी के अनुसार GSI के वैज्ञानिकों ने अपनी जो रिपोर्ट सौंपी है, उसमें उन्होंने धंसी हुई जमीन के पास सड़क को फिर से नहीं बनाने की बात कही है। सड़क को गड्ढ़े से दूर एक नयी जगह पर बनाया जाएगा।
अगर स्थानीय लोगों की बात की जाए तो वे जमीन के धंसने की वजह प्राकृतिक पानी के स्रोत को मानने से इंकार कर दिया है। स्थानीय लोग इसे दैवीय अथवा प्राकृतिक प्रकोप मान रहे हैं। इसके साथ कुछ लोगों का तो यह भी कहना है कि यहां कई सालों पहले आकाशीय बिजली गिरी थी, जिस कारण यह विशालाकार गड्ढ़ा बन गया है। सभी लोगों के अपने अलग-अलग तर्क हैं।



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