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शुरू हो रहा है राजस्थान की कला और संस्कृति को दर्शाता 'कुंभलगढ़ फेस्टिवल'

राजस्थान की कला और संस्कृति ही हर साल लाखों की संख्या में पर्यटकों को इसके अलग-अलग कोने तक खींच लाती है। खासतौर पर सर्दियों के मौसम में राजस्थान में एक के बाद एक कई त्योहार और मेले आयोजित होते हैं। हाल ही पुष्कर में विश्व प्रसिद्ध ऊंट मेला का आयोजन किया गया था। अब कल से यानी 1 दिसंबर से 3 दिनों के कुंभलगढ़ फेस्टिवल का आयोजन किया जाने वाला है।

festival

कोई भी सैलानी जो राजस्थान की कला और संस्कृति को अनुभव करना चाहता है उसके लिए इस फेस्टिवल में शामिल जरूरी है। इस फेस्टिवल का आयोजन कुंभलगढ़ किले के आसपास ही किया जाएगा।

मेवाड़ की समृद्ध शासन व्यवस्था और इस राजस्थानी लोककथाओं के लिए मशहूर कुंभलगढ़ फेस्टिवल राजस्थान को देखने-समझने में पर्यटकों की काफी मदद करता है। कुंभलगढ़ फेस्टिवल का आयोजन 1 से 3 दिसंबर तक राजस्थान के राजसमंद जिले में किया जाता है, जो अरावली की पहाड़ी के ठीक नीचे ही मौजूद है। साल में एक बार आयोजित होने वाला यह फेस्टिवल मुख्य रूप से दिसंबर में ही आयोजित होता है जब राजस्थान का मौसम सुहाना रहता है। इससे यहां आने वाले पर्यटकों को अधिक ठंड की परेशानी भी नहीं होती है।

kumbhalgarh fort

राजस्थान के हर प्रमुख त्योहार और आयोजनों की तरह ही इसमें भी देश और दुनियाभर से सैलानी पहुंचते हैं, क्योंकि यह राजस्थान को देखने का दोहरा मौका जो प्रदान करता है। कुंभलगढ़ फेस्टिवल के साथ-साथ इस समय सैलानियों की भीड़ कुंभलगढ़ किले को भी निहारने का मौका नहीं चुकती है। बता दें, राजस्थान का कुंभलगढ़ किला UNESCO का वर्ल्ड हेरिटेज साइट है।

कुंभलगढ़ फेस्टिवल के मुख्य आकर्षण

कुंभलगढ़ फेस्टिवल का मुख्य आकर्षण यहां शाम के समय आयोजित होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम हैं। कुंभलगढ़ किले के ठीक पास में ही आयोजित होने वाले इन सांस्कृतिक कार्यक्रमों में दुनियाभर से आने वाले प्रसिद्ध कलाकार शामिल होते हैं। इन सांस्कृतिक कार्यक्रमों में स्थानीय लोगों से कहीं अधिक बाहर से आने वाले पर्यटकों की भीड़ हर साल इकट्ठा होती है। कुंभलगढ़ फेस्टिवल का प्रमुख आकर्षण घूमर, कल्बेलिया और भवई होता है, जो राजस्थान के फोक डांस फॉर्म हैं, जिनकी ख्याति भारत से बाहर दुनियाभर में फैल चुकी है।

kumbhalgarh

फेस्टिवल के दौरान जब लोकगायक सारंगी की धुन, तबला और ढोल की थाप के बीच 'केसरिया बालम...पधारो म्हारे देस' जैसे लोकगीतों का सुर छेड़ता है तो हर किसी के लिए ऐसा लगता है मानों समय कुछ देर के लिए थम सी गयी है। इन सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ आप यहां शॉपिंग का आनंद भी उठा सकते हैं। फेस्टिवल के दिनों में कुंभलगढ़ किला परिसर में हाट बैठती है, जिसमें आप राजस्थानी पारंपरिक गहने और दूसरी काफी अच्छी चीजें जिनमें हर किसी का फेवरेट हैंडीक्राफ्ट की चीजें भी खरीद सकते हैं।

विशेष नोट :- अगर आप कुंभलगढ़ फेस्टिवल में जाते हैं तो वहां पारंपरिक राजस्थानी दाल बाटी चुरमा और लाल मास खाना मत भूलें। भले ही आपके शहर में ये व्यंजन कितने भी स्वादिष्ट तरीके से पकाकर मिलते हो लेकिन राजस्थान की जो खुशबू आपको वहां मिलेगी, हम दावे के साथ कह सकते हैं कि आपको अपने शहर में नहीं मिलेगी। और हां, फेस्टिवल में सुन्दर तरीके से सजाकर लाये गये ऊंटों के साथ फोटो खिंचवाना या सेल्फी लेने का मौका बिल्कुल मत छोड़िएगा।

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