रुक गई है छुक-छुक कर धुंआ उड़ाती हुई पटरियों पर दौड़ती टॉय ट्रेन के पहिए। वर्ल्ड हेरिटेज साइट दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे (DHR) ने टॉय ट्रेन को बंद करने का फैसला लिया है। लेकिन घबराइए मत, दार्जिलिंग की जान टॉय ट्रेन्स को हमेशा के लिए बंद नहीं किया गया है। दरअसल, मानसून में काफी ज्यादा बारिश होने की वजह से DHR ने अगले कुछ समय के लिए टॉय ट्रेन को बंद रखने का फैसला लिया है।

जानकारी के मुताबिक, दार्जिलिंग से घूम स्टेशन के बीच 8 किमी का सफर तय करने वाली टॉय ट्रेन को 31 अगस्त तक बंद रखने का निर्णय लिया गया है। इस बारे में नॉर्थ फ्रंटियर रेलवे की तरफ से बताया गया है कि 20 जुलाई से 31 अगस्त तक 3 स्टिम जॉय राइड और 1 डिजल राइड को बंद रखा जाएगा। रेलवे की तरफ से दावा किया गया कि हिमालय की घाटी में बसे दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे की टॉय ट्रेन एक यूनेस्को हेरिटेज साइट है, जो पर्यटकों को देशभर में सबसे अच्छा टॉय ट्रेन जॉय राइड प्रदान करता है।

बता दें, वर्ष 1999 में इसे यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट घोषित किया गया था। उस समय से लगातार हिमालयन रेलवे नैरोगेज टॉय ट्रेन की सेवा पर्यटकों को उपलब्ध करवा रहा है। देश के 17 रेलवे ज़ोन में से नॉर्थ फ्रंटियर रेलवे एक प्रमुख ज़ोन है, जो पूर्वोत्तर राज्यों के साथ-साथ पश्चिम बंगाल के 7 और बिहार के 5 जिलों में भी ट्रेन सेवाएं प्रदान करता है। इसी रेलवे के तहत न्यू जलपाईगुड़ी से दार्जिलिंग के बीच टॉय ट्रेन की सेवा प्रदान की जाती है। इस पूरे रास्ते के दौरान लगभग 500 छोटे ब्रिज और शानदार प्राकृतिक नजारों की वजह से उत्तर बंगाल में घूमने आने वाले पर्यटकों का यह प्रधान आकर्षण है।
दार्जिलिंग की सड़कों और बाजारों से होकर गुजरती यह टॉय ट्रेन सच में किसी खिलौना ट्रेन जैसा ही फील देती है। दार्जिलिंग टॉय ट्रेन के सफर में आपको बर्फ से ढके कुछ पहाड़ों, कंचनजंघा की चोटी (अगर आपकी किस्मत अच्छी हुई तो), खड़ी ढ़ाल जैसे नजारे दिखेंगे। छुक-छुक कर चलती टॉय ट्रेन जॉय राइड आपको बतासिया लुप से होते हुए 7,404 फीट की ऊंचाई पर बने घूम स्टेशन पर लेकर जाती है जो एशिया का सबसे ऊंचा और दुनिया का दूसरा सबसे ऊंचा स्टेशन है।



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