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चेट्टीनाड का स्पाइसी खाना और अंबुर दम बिरयानी और कांजीवरम साड़ी कुछ ऐसा है तमिलनाडु

By Belal Jafri

यदि हम आपसे ये कहें कि आज हम आपको सांस्‍कृतिक भूमि की एक अद्धुत यात्रा पर ले जाएंगे तो शायद आपको सुनने में थोडा अजीब लगे। तो चलिए आपका डाउट क्लीयर कर दें। आज हम आपको अवगत कराने वाले हैं तमिलनाडु से साथ ही हम आपको ये भी बताने का प्रयास करेंगे कि कैसे दक्षिण के इस खूबसूरत राज्य की यात्रा आपके ज़िन्दगी भर याद रहेगी।

तमिलनाडु में आज जहां एक तरफ सुन्दर हिल स्टेशन और पहाड़ियां हैं तो वहीं दूसरी तरफ कई खूबसूरत बीच हैं । साथ ही आज भी यहां आपको वो प्राचीन द्रविड़ कल्चर देखने को मिलेगा जिसके बारे में या तो आपने केवल सुना होगा या पढ़ा होगा। तो चाहिए अब आपको बताते हैं कि जब आप तमिलनाडु में हों तो आपको क्या क्या करना चाहिए।

मीनाक्षी सुन्दरेश्वर मन्दिर

मीनाक्षी सुन्दरेश्वर मन्दिर

मीनाक्षी अम्मा मंदिर भगवान शिव और देवी पार्वती को समर्पित है। देवी पार्वती को मीनाक्षी भी कहा जाता है। यह मंदिर मदुरई के साथ पूरे देश का एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थान है। किवदंती है कि मदुरई देवी का निवास स्थान था तथा उनसे विवाह करने के लिए भगवान शिव यहाँ आये थे। यह मंदिर वैगई नदी के दक्षिण में स्थित है तथा इसका निर्माण ईसा पश्चात 2500 में हुआ था। मंदिर के वर्तमान रूप का निर्माण नायक शासकों ने किया।

वेल्‍लोर की अंबुर दम बिरयानी

वेल्‍लोर की अंबुर दम बिरयानी

तमिलनाडु राज्य विशेषकर अपने खाने के लिए जाना जाता है। जब आप तमिलनाडु में हों तो यहां के वेल्‍लोर शहर की अंबुर दम बिरयानी खाना न भूलें। आपको बताते चलें कि अंबुर वेल्‍लोर के अंतर्गत एक छोटा सा क़स्बा है।

रेशम के लिए काँचीपुरम

रेशम के लिए काँचीपुरम

काँचीपुरम या कांजीवरम साड़ियों को मुख्यतः काँचीपुरमके स्थानीय बुनकरों द्वारा तैयार किया जाता है। ये साड़ियां अपने कलर, डिज़ाइन और पैटर्न के कारण दुनिया भर के कला के कद्रदानों के आकर्षण का केंद्र हैं। आपको बताते चलें कि इन साड़ियों को ज़री के काम की तरह बनाया जाता है।

कराईकुडी का चेट्टीनाड खाना

कराईकुडी का चेट्टीनाड खाना

चेट्टीनाड भोजन को कराईकुडी भोजन के नाम से भी जाना जाता है। इस भोजन को स्थानीय लोगों द्वारा कराईकुडी कि शान का भी दर्जा दिया गया है। चेट्टीनाड भोजन की सबसे बड़ी ख़ास बात ये है कि आज भी इन्हें परंपरागत तरीके से अलग अलग मसालों द्वारा तैयार किया जाता है। यहां के स्थानीय लोग इस चेट्टीनाड भोजन को अची समायल के नाम से जानते हैं। चेट्टीनाड भोजन की सबसे बड़ी ख़ास बात ये है कि इसे वहां रहने वाले चेट्टियार समुदाय द्वारा बनाया जाता है। ये भोजन तीखा और स्वादिष्ट होता है।

कन्याकुमारी में सूर्योदय

कन्याकुमारी में सूर्योदय

अगर आपको आसमान के बदलते रंग देखने हैं तो आप अवश्य ही कन्याकुमारी जाएं। ये स्थान अपने खूबसूरत सूर्योदय और सूर्यास्त के लिए जाना जाता है। कन्याकुमारी भारतीय प्रायद्वीप के सबसे दक्षिणी छोर पर स्थित है। कन्याकुमारी ऐसे स्थान पर स्थित है जहाँ पर हिन्द महासागर, बंगाल की खाड़ी और अरब सागर मिलते हैं।

मरीना बीच पर टहलना

मरीना बीच पर टहलना

मरीना समुद्र तट चेन्नई का एक खूबसूरत तट है। बंगाल की खाड़ी से बना यह समुद्री किनारा शहर के उत्तरी छोर पर बने सेंट जॉर्ज किले के साथ-साथ है। मरीना समुद्र तट की कुल लंबाई करीब 13 किमी है। यह भारत का सबसे बड़ा और विश्व का दूसरा सबसे बड़ा समुद्री किनारा है। ज्ञात हो कि अपने अनुपम सौंदर्य के कारण कभी मरीना समुद्र तट पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय हुआ करता था।

तंजावुर की पेंटिंग और गुड़ियां

तंजावुर की पेंटिंग और गुड़ियां

यदि आप तमिलनाडु में हैं तो यहां के तंजावुर आइये और यहाँ की पेंटिंग और गुड़ियों जिन्हें स्थानीय भाषा में थलायटटी बोम्मई कहते हैं को खरीदकर अपने घर अवश्य ले जाइये आज ये स्थान अपने मंदिरों के अलावा इन दो चीजों के लिए भी जाना जाता है।

रामेश्‍वरम का पंबन ब्रिज

रामेश्‍वरम का पंबन ब्रिज

पंबन ब्रिज को आधिकारिक रूप से एनाई इंदिरा रोड ब्रिज नाम दिया गया। इस पुल की खासियत यह है कि इसे पाल्‍क स्‍ट्रेट पर एक कैंटीलिवर ब्रिज के रूप में मनाया गया है। यह ब्रिज, रामेश्‍वरम को देश के अन्‍य हिस्‍सों से जोड़ता है। यह ब्रिज, समुद्र पर बना अपनी तरह का अनोखा ब्रिज है। यह देश का दूसरा सबसे बड़ा समुद्री पुल है जिसकी लम्‍बाई 2.3 किमी. है। इस पुल को दक्षिण भारतीय रेलवे परियोजना के हिस्‍से के रूप में बनाया गया था।

त्रिची का कल्लानाई बाँध

त्रिची का कल्लानाई बाँध

कावरी नदी पर निर्मित कल्लानाई बाँध को ग्राण्ड अनीकट के नाम से भी जाना जाता है। बाँध 146.70 वर्ग किमी का क्षेत्र घेरता है। इस बाँध को चोल वंश के शासक करीकलन द्वारा पहली शताब्दी ईसा पूर्व में निर्मित कराया गया था और इसे विश्व के प्राचीनतम पानी नियन्त्रित करने वाली संरचनाओं में माना जाता है जिसका प्रयोग आज भी किया जा रहा है। यह बाँध 329 मीटर लम्बा और 20 मीटर चौड़ा है। श्री रंगम टापू पहुँचने पर बाँध की धारायें दो भागों में बँट जाती हैं और उत्तरी धारा कोल्लिदम पूमपुहार में बंगाल की खाड़ी में समाप्त होती है।

शिवकाशी के पटाखे

शिवकाशी के पटाखे

चाहे दीवाली हो या फिर घर में शादी पटाखे हमेशा से ही बच्चों के अलावा बड़े के भी आकर्षण का केंद्र रहे हैं। बात जब पटाखों कि हो और ऐसे में हम शिवकाशी का जिक्र न करें तो बात अधूरी है। तमिलनाडु का ये शहर जहां अपने शिवलिंग के लिए प्रसिद्ध है तो वहीँ इसे यहां निर्मित होने वाले पटाखो के लिए भी जाना जाता है।

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