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Navratri Special! वाराणसी में स्थापित मां की ऐसी अद्भुत प्रतिमा जो आज तक अपने स्थान से हिली नहीं..

धर्म नगरी से विश्व विख्यात वाराणसी में अपने धार्मिक रीति-रीवाज और प्राचीन मंदिरों के लिए जाना जाता है। इस शहर को वैसे तो शिव नगरी के नाम से जाता है लेकिन यहां पर मां दुर्गा के कई स्वरूपों के मंदिर भी है, जिनकी अपनी एक अलग मान्यता है। कुछ ऐसा ही है काशी के देवनाथपुरा में स्थापित मां की प्रतिमा, जो कोई मंदिर तो नहीं लेकिन किसी मंदिर से कम भी नहीं। इसे दुर्गाबाड़ी के नाम से जाना जाता है।

दुर्गाबाड़ी का इतिहास

कहते हैं काशी निराली है, इसका जीता जागता उदाहरण है दुर्गाबाड़ी में स्थापित मां दुर्गा की प्रतिमा। ये कोई साधारण प्रतिमा नहीं है, ये करीब 250 साल पुरानी दुर्गा की प्रतिमा है, जिसका आज तक विसर्जन नहीं हो सका। इस प्रतिमा को लेकर कहा जाता है कि जब साल 1767 में इस मूर्ति को स्थापित किया गया और फिर जब विसर्जन के लिए मूर्ति को हटाने का प्रयास हुआ तो मूर्ति वहां से हटी ही नहीं और न हीं किसी से हिली। इसके बाद से ही हर साल नवरात्रि के पहले दिन से नए परिधान के साथ माता की पूजा-अर्चना की जाती है। ऐसे में अगर आप भी इन दिनों वाराणसी में हैं तो माता के इस प्रतिमा को देखे बिना वापस नहीं आइएगा और अगर आप अगले साल के लिए प्लानिंग कर रहे हैं तो जाना न भूलिएगा और हां..आसपास के पंडालों को भी जरूर देखें। काशी के पंडाल काफी खूबसूरती के साथ सजाए जाते हैं।

durgabadi varanasi

बंगाली परिवार के घर में स्थापित है मां की प्रतिमा

मूर्ति को लेकर कहा जाता है कि मुखर्जी परिवार के घर में स्थापित मां की प्रतिमा को जब हटाया जा रहा था, तब मां की प्रतिमा अपने स्थान से नहीं हिली। फिर इसके बाद मां ने परिवार के मुखिया के सपने में आकर कहा, "मुझे विसर्जित मत करो, मैं यहीं रहना चाहती हूं।" तब से लेकर आज तक मां इसी बंगाली परिवार के घर में विराजमान है। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि इस प्रतिमा की ऊंचाई महज 5 से 6 फीट है। लेकिन आज तक इस प्रतिमा को कोई टस से मस नहीं कर पाया।

durgabadi varanasi

मिट्टी और पुआल से बनी है मां की प्रतिमा

दुर्गा बाड़ी के नाम से विख्यात मां की प्रतिमा मिट्टी, पुआल, बांस और सुतली से बनाई गई है, लेकिन इतने साल बीत जाने के बाद भी मां की प्रतिमा वैसे की वैसे ही है। माता के आश्चर्य की कहानी सुनकर ना सिर्फ काशी के लोग बल्कि आसपास के लोग भी माता के इस छोटे से मंदिर में मत्था टेकने आते हैं और मां का आशीर्वाद प्राप्त कर अपने आप को कृतार्थ समझते हैं। यहां आने वाले श्रद्धालुओं का कहना है कि उन्होंने ऐसी अद्भुत मां की प्रतिमा कहीं नहीं देखी।

बेहद आकर्षक है मां की प्रतिमा

दुर्गाबाड़ी की ये प्रतिमा दिखने में भी बेहद खास और आकर्षक है। यहां जो भी एक बार चला आता है, माता के दर्शन के बाद दुबारा आना नहीं भूलता। मां की इस प्रतिमा के दर्शन के लिए काफी दूर-दूर से लोग आते हैं। यहां आने वाले भक्तों का कहना है कि मां के दरबार में जो भी आता है मां उनकी मनोकामना जरूर पूरी करती हैं।

दर्शन करने का समय - शारदीय नवरात्रि

कैसे पहुंचें दुर्गाबाड़ी

दुर्गाबाड़ी स्थित मां की प्रतिमा का दर्शन करने के लिए यहां का नजदीकी एयरपोर्ट वाराणसी हवाई अड्डा है, जो यहां से करीब 30 - 32 किमी. है। वहीं, यहां का नजदीकी रेलवे स्टेशन वाराणसी जंक्शन (कैंट) है, जो यहां से करीब 8 - 10 किमी. है। इसके अलावा यहां आप बस से भी आ सकते हैं।

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