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गंगा किनारे रहकर बिहार के इन उद्यानों को न देखा तो क्या देखा

भारत का पूर्वी राज्य बिहार मध्य बहती गंगा, उपजाऊ जमीन, कला-संस्कृति और अपने गौरवशाली इतिहास के लिए प्रसिद्ध है। प्राचीन काल में बिहार (मगध) वैदिक और व्यवहारिक शिक्षा का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता था। समय के साथ-साथ यहां कई राजा-सम्राटों ने राज किया और बिहार को ऐतिहासिक तौर पर मजबूत बनाने का काम किया। 

भारत का यह राज्य धार्मिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक दृष्टि से काफी उन्नत माना जाता है। गंगा नदी के कारण यह क्षेत्र जैव-विविधता के तौर पर भी काफी समृद्ध है।

इसी क्रम में आज हमारे साथ जानिए बिहार स्थित उन चुनिंदा राष्ट्रीय उद्यानों के बारे में जो अपने वन्य जीवन और प्राकृतिक सौंदर्यता के लिए प्रसिद्ध हैं। 

वाल्मीकि राष्ट्रीय उद्यान

वाल्मीकि राष्ट्रीय उद्यान

बिहार स्थित वाल्मीकि राष्ट्रीय उद्यान सोमेश्वर और दून पर्वत श्रृंखला के मध्य बसा है। यह पूरा इलाका विभिन्न वन्य प्राणियों के लिए एक सुरक्षित स्थान मुहैया कराता है। यह राष्ट्रीय उद्यान वनस्पतियों और जीवों के विकास के लिए आरक्षित किया गया है।

आप यहां के मुख्य जानवर जैसे तेंदुआ, काला भालू, गैंडा, आदि को आसानी से देख सकते हैं। इस राष्ट्रीय उद्यान की सैर के लिए दूर-दराज से सैलानी यहां तक का सफर तय करते हैं। इसके अलावा यहां पास में मदनपुर जंगल है, जो अपने फ्लाइंग फॉक्स के लिए प्रसिद्ध है।

फ्लाईंग फॉक्स चमगादर की एक प्रजाति है। इऩ्हें आप यहां किसी भी समय देख सकते हैं। इसके अलावा आप यहां विभिन्न पक्षी प्रजातियों को भी देख सकते हैं।

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राजगीर वन्यजीव अभयारण्य

राजगीर वन्यजीव अभयारण्य

बिहार के नालंदा जिले में स्थित, राजगीर वन्यजीव अभयारण्य 1978 में स्थापित किया गया था। लगभग 13.83 वर्ग मील में फैला यह वन्यजीव अभ्यारण्य विभिन्न प्रकार के औषधीय पौधों और जीव-जन्तुओं से भरा है। उष्णकटिबंधीय पर्णपाती जंगलों से घिरा यह अभयारण्य वर्षभर खुला रहता है।

आप यहां विभिन्न पक्षी प्रजातियों के साथ हिरण, तेंदुआ आदि जीवों को भी देख सकते हैं। यहां घूमने आए सैलानी नालंदा बंगलो में रूक सकते हैं। यह उद्यान वन्य जीवन को नजदीक से देखने का सबसे अच्छा विकल्प है।

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कावर झील पक्षी अभयारण्य

कावर झील पक्षी अभयारण्य

बिहार स्थित कावर झील पक्षी अभयारण्य 1987 में स्थापित किया गया था। ताकि इन इलाकों में आने वाले प्रवासी पक्षी प्रजातियों को सुरक्षित आश्रय प्रदान किया जा सके। यह पक्षी अभयारण्य कावर झील को संरक्षित कर बनाया गया है। इस झील को एशिया ताजे पानी की बड़ी ऑक्सीबो झीलों में शामिल किया गया है।

कावर झील के चारों ओर दलदली क्षेत्र है जो प्रवासी पक्षियों के लिए एक आदर्श निवास स्थान बनाता है। जानकारी के अनुसार यहां 60 से भी अधिक प्रवासी पक्षी प्रजातियों की संख्या दर्ज की गयी है।

इसके अलावा यहां 160 पक्षी प्रजातियां पहले से ही रहती हैं। पक्षियों के अलावा आप यहां जानवरों में कस्तूरी हिरण, तेंदुआ, काला भालू और लोमड़ी देख सकते हैं।

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 विक्रमशिला डॉल्फिन अभयारण्य

विक्रमशिला डॉल्फिन अभयारण्य

बिहार के भागलपुर जिले में स्थित विक्रमशिला गंगा डॉल्फिन अभयारण्य वर्ष 1991 में स्थापित किया गया था। इस जलीय अभयारण्य को बनाने का उद्देश्य गंगा नदी में रहने वाली डॉल्फिन्स को सुरक्षित आश्रय प्रदान करना था। राष्ट्रीय जलीय जानवर के रूप में घोषित डॉल्फ़िन के अलावा आप यहां ऊदबिलाव, ताजे पानी में पाए जाने वाले कछुए और कई अन्य जलीय पक्षियों को देख सकते हैं।

डॉल्फिन के साथ-साथअन्य जलीय प्राणियों के देखने के लिए आप यहां का प्लाना बना सकते हैं।

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कैमूर वन्यजीव अभयारण्य

कैमूर वन्यजीव अभयारण्य

बिहार के कैमूर जिले में स्थित कैमूर वन्यजीव अभयारण्य कैमूर की पहाड़ियों पर स्थित है। जहां कई प्राकृतिक झरने इस वन्य जीव क्षेत्र को एक खूबसूरत स्थान बनाने का काम करते हैं। यह अभयारण्य अपनी विभिन्न पक्षी प्रजातियों के साथ-साथ अन्य जीव-जन्तुओं के लिए यभी जाना जाता है। आप यहां बाघ, भालू, हिरण आदि जानवरों को देख सकते हैं।

इसके अलावा यहां की झीलें खूबसूरत मछलियों के लिए भी प्रसिद्ध हैं। यहां घूमने का सबसे सही समय अक्टूबर से जून का महीना है। भ्रमण के दौरान आप वन विभाग के अंतर्गत अतिथि भवनों में रूक सकते हैं।भोपाल : जिसने भी देखी यह रहस्यमयी पार्टी जिंदा नहीं लौटा !

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