
हिमालय अपनी विशालता के साथ-साथ अद्भुत कुदरती नजारों के लिए भी जाना जाता है। बर्फ से जमी घाटियां, झीलें, पहाड़ी वनस्पतियों से भरे घने जंगल हिमालय को सबसे खास बनाने का काम करते हैं। इसलिए हिमालय के अंतर्गत आने वाले भारतीय राज्य अपनी पहाड़ी सौंदर्यता के लिए जाने जाते है।
वैसे अगर झीलों की बात की जाए तो भारत में खूबसूरत झीलों के कमी नहीं हैं, लेकिन अगर आपको बर्फ से ढकी झीलें देखनी हैं तो हिमालय की तरफ रूख करना ही होगा। क्योंकि रोमांच पैदा कर देने वाली बर्फीली झीलें आपको सिर्फ हिमालय क्षेत्र में ही दिखेंगी। इसी क्रम में आज हमारे साथ जानिए भारत की सबसे खास 'फ्रोजन लेक्स' के बारे में।

चांगू झील , सिक्किम
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हिमालय क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली चांगू झील सिक्किम की पहाड़ियों पर लगभग 3780 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। इस झील को त्सोंगमो के नाम से भी जाना जाता है। बर्फीले क्षेत्र में होने के कारण यह झील सर्दियों में पूरी तरह जम जाती है। यह झील स्थानीय बौद्धों और हिंदुओं के लिए एक आस्था का केंद्र है। झील में पानी आसपास मौजूद ग्लेशियर के पिघलने से आता है।
इसलिए इस झील में पानी कभी कमी नहीं होती। यह स्थान खूबसूरत प्राकृतिक दृश्यों का आनंद उठाने का मौका देता है। वसंत के मौसम में यह झील रंग-बिरंगे जंगली फूलों से घिर जाती है।

चंद्रताल, हिमाचल प्रदेश
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चंद्रताल हिमाचल प्रदेश के स्पीति जिले में लगभग 4250 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। अपने खास आकार के कारण इस झील को चंद्र झील नाम दिया गया है। इस झील का पानी शीशे की तरह चमकता है, जो पूरी तरह प्रदूषण से मुक्त है। इस झील का इलाका कभी स्पिति और कुल्लू जाने वाले तिब्बत और लद्दाखी व्यापारियों के लिए खास स्थान हुआ करता था।
अब यह झील देश-दुनिया के ट्रैवलर्स और एडवेंचर प्रेमियों का गढ़ मानी जाती है। यह माना जाता है कि चंद्र झील वह स्थान है जहां से भगवान इंद्र के रथ ने पांच पांडवों में सबसे बड़े युधिष्ठिर को उठाया था।

गुरूडोंगमर झील, सिक्किम
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सिक्किम स्थित गुरूडोंगमर झील हिन्दुओं और बौद्ध अनुयायियों के लिए एक पवित्र झील मानी जाती है। जो समुद्र तल से लगभग 17800 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। गुरूडोंगमर झील गंगटोक से करीब 190 किमी के फासले पर स्थित है। इस झील से एक धार्मिक मान्यता जुड़ी है, माना जाता है कि कई सालों पहले यहां पीने योग्य पानी का अभाव था और यह झील बर्फ से ढकी रहती है। तब यहां गुरू पद्मसंभव का आगमन हुआ।
सिद्ध पुरुष माने जाने वाले गुरू पद्मसंभव से यहां के ग्रामीणों ने जल की व्यवस्था करने को कहा। गुरू पद्मसंभव ने अपनी दिव्य शक्ति से इस झील के एक भाग से बर्फ हटा दी। माना जाता है कि कड़ाके की ठंड में भी झील के इस भाग पर बर्फ नहीं जमती।

रूपकुंड झील, उत्तराखंड
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उत्तराखंड स्थित रूपकुंड झील हिमालय की सबसे रहस्यमयी झीलों में एक है। प्राकृतिक रूप से बेहद खूबसूरत लगने वाली यह झील रह्स्यों का गढ़ मानी जाती है। राज्य के चमोली जिले में स्थित यह झील लगभग 5000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। सर्दियों में बर्फ से ढकी रहने वाली यह झील गर्मियों में सबके होश उड़ा देती है। माना जाता है कि इस झील में लगभग 12वीं सदी के नरकंकाल तैरते हैं।
यहां का मौसम ठंडा रहता है इसलिए ये इंसानी शव सुरक्षित रहते हैं। लेकिन इतने खौफनाक दृश्यों के बावजूद इसकी लोकप्रियता और खूबसूरती में कोई कमी नहीं आई है। इसे देखने के लिए देश-दुनिया से सैलानी यहां तक का सफर तय करते हैं।

पंगोंग झील , लद्दाख
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लद्दाख स्थिय पंगोंग झील 4,250 फीट की ऊंचाई पर चांगथांग क्षेत्र में स्थित है। यह एक अनोखी झील है जिसका पानी नमकीन स्वाद देता है। सर्दियों के दौरान यह झील पूरी तरह बर्फ से ढक जाती है।
इस झील की खूबसूरती का अंदाजा इस बात ये लगाया जा सकता है कि यहां के दृश्यों को बॉलीवुड फिल्मों में भी जगह दी गई है।
झील की खूबसूरती के साथ-साथ आप यहां बारहमासी जड़ी बूटियों को भी देख सकते हैं। ऐसा माना जाता है कि यह झील अपना रंग बदलती है। झील के पास मौजूद धाटियों में कुछ बौद्ध मठ स्थित है।



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