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जोधपुर-उदयपुर के बीच में ख़ास तौर से देखे ये खूबसूरत जगहें

Written By: Goldi

राजस्थान के दो खूबसूरत शहर उदयपुर, जोधपुर पर्यटकों के बीच खासा मशहूर हैं । उदयपुर अपनी झीलों के लिए तो जोधपुर अपने नीले नीले घरों और बेहद ही खूबसूरत मेहरानगढ़ किले के लिए जाना जाता है।

उदयपुर से जोधपुर की दूरी 260 किमी की दूरी पर स्थित है, जिसे करीबन 5 घंटे के सफर तय किया जा सकता है। राजस्थान में रोड ट्रिप का अपना एक अलग ही मजा है, खासकर यह मजा सर्दियों के दौरान और भी हसीन हो जाता है।

वीकेंड में सैर करें रोमांचक राजस्थान की

जैसा कि, हम सभी राजस्थान के मौसम से वाकिफ हैं, गर्मियों के दौरान यहां तापमान काफी रहता है, जिससे यकीनन घूमने में दिक्कत होती है, लेकिन सर्दियों के समय राजस्थान घूमना सबसे अच्छा विचार है।

जाने! राजस्थान के रंगीन शहरों के बारे

वैसे भी साल छुट्टियों की भरमार पिछले साल की तरह काफी है, तो लॉन्ग वीकेंड्स के दौरान कुछ खास करना चाहते हैं, तो अपने दोस्तों के साथ इस बार राजस्थान के खूबसूरत शहर उदयपुर से जोधपुर की रोड ट्रिप जरुर प्लान करें..और हां साथ में कैमरा रखना बिल्कुल भी ना भूले..

हल्दीघाटी

हल्दीघाटी

हल्दीघाटी, उदयपुर से 40 किमी की दूरी पर स्थित, इतिहास में हल्दीघाटी की प्रसिद्ध लड़ाई, मेवाड़ के महाराणा प्रताप और एम्बर के राजा मान सिंह के बीच लड़े जाने के लिए जाना जाता है। लड़ाई 1576 में लड़ी गई थी जोकि रक्तपात और विनाश का एक बहुत बड़ा कारण बना था। इस जगह ने महाराणा प्रताप के लिए युद्ध के मैदान के रूप में सेवा की और यहीं पर उनके प्रसिद्ध घोड़े चेतक ने अपनी आखिरी सांस ली।

(छतरी) चेतक की स्मृति में निर्मित स्मारक युद्ध के मैदान से 4 किमी की दूरी पर स्थित है। यह स्मारक है, जो सफेद संगमरमर से बना है और वफादार घोड़े के सम्मान और प्रशंसा का प्रतीक है। क्षेत्र हल्दीघाटी के नाम से यहाँ के हल्दी के रंग की पीले मिट्टी के कारण जाना जाता है।

Pc:Dev Vora

दिलवाड़ा मंदिर का समूह

दिलवाड़ा मंदिर का समूह

माउंट आबू से ढाई किमी की दूरी पर स्थित दिलवाड़ा मंदिर जैन धर्म का धार्मिक स्थल है। इस दिलवाड़ा मंदिर में पाँच जैन मंदिर शामिल हैं जो अपनी धार्मिक और वास्तुकला की महत्ता के लिए प्रमुख तौर पर जाने जाते हैं। 11 से 13 वीं शताब्दी में बने ये मंदिर उस समय के चालुक्य वंश के शासनकाल के सबसे अच्छे मंदिरों के खूबसूरत नमूने हैं। ये साधारण पर आकर्षक मंदिर अपने संगमरमर की रचना नक्काशीदार खम्भे, दरवाज़े, छत और पैनल के लिए जाने जाते हैं जो हर एक मंदिर को अलग और विशेष चमक प्रदान करते हैं।

टिप्स- इन मन्दिरों में फोटोग्राफी वर्जित है।
Pc:Selmer van Alten

रणकपुर जैन मंदिर

रणकपुर जैन मंदिर

पाली जिले में स्थित रणकपुर जैन मंदिर उदयपुर से करीबन 90 किमी की दूरी पर स्थित है।

हल्के रंग के संगमरमर का बना यह मन्दिर बहुत सुंदर लगता है। किंवदंतियों के अनुसार, एक जैन व्यापारी सेठ धरना शाह और मेवाड़ के शासक राणा खम्भा द्वारा इस मंदिर का निर्माण किया गया था। मन्दिर के मुख्य परिसर चमुखा में कई अन्य जैन मंदिर शामिल हैं। मंदिर का तहखाना 48,000 वर्ग फुट पर फैला है। उस युग के कारीगरों की स्थापत्य उत्कृष्टता यहाँ के 80 गुंबदों, 29 हॉलों और 1444 खंभों पर दिखती है। खंभों की खास विशेषता यह है कि ये सभी अनोखे हैं। पर्यटक इन मंदिरों की सुंदर नक्काशी को देख सकते हैं जो उन्हें खजुराहो के मूर्तियों की याद दिलाते है।Pc: Ingo Mehling

बुलेट बाबा मंदिर

बुलेट बाबा मंदिर

बुलेट बाबा का मंदिर जोधपुर के नजदीक ही स्थित है..जहां 350सीसी की बुलेट की पूजा की जाती है। यह धाम बाबा ओम बन्ना को समर्पित है। जिनकी मृत्यु एक नब्बे के दशक में एक रोड एक्सीडेंट के दौरान हो गयी थी। बन्ना की मुअत के बाद पुलिस ने उनकी बुलेट को अपने कब्जे में ले लिया, लेकिन दूसरे ही दिन बुलेट थाने से गायब मिली, पुलिस वालो के लाख ढूढने पर उन्हें यह बुलेट बन्ना के एक्सीडेंट वाले स्थल पर बरामद हुई... लेकिन अगली सुबह फिर वही घटना हुई और मोटरसाइकिल ठिक उसी पेड़ के नीचे पड़ी मिली। बार-बार एक ही घटना होने के कारण पुलिस को भी मामला गंभीर लगा। बाद में पुलिस वालों ने स्‍थानीय ग्रामिणों से राय मशवरा कर इस बुलेट मोटरसाइकिल को पेड़ के नीचे ही एक चबुतरा बना कर रख दिया।

ऐसा माना जाता है, कि लोग एक्सीडेंट से बचने के लिए पाली-जोधपुर हाइवे पर इस मंदिर के सामने शीश जरुर नवाते हैं।
Pc: Sentiments777

कुम्बल्गढ़ किला

कुम्बल्गढ़ किला

भारत की ग्रेट वाल ऑफ़ चाइना के नाम से विख्यात कुम्बल्गढ़, राजस्थान में चित्तोड़गढ़ के बाद सबसे बड़े किलों में शुमार है । यह विशाल किला 13 गढ़, बुर्ज और पर्यवेक्षण मीनार से घिरा हुआ है। कुम्भलगढ़ किला अरावली की पहाड़ियों में 36 किमी में फैला हुआ है। इसमें महाराणा फ़तेह सिंह द्वारा निर्मित किया गया एक गुंबददार महल भी है। लंबी घुमावदार दीवार दुश्मनों से रक्षा के लिए बनवाई गई थी।

इस किले में सात बड़े दरवाजे हैं। इनमें से सबसे बड़ा राम पोल के नाम से जाना जाता है। किले की ओर जाने वाले मुख्य रास्ते हनुमान पोल पर पर्यटक एक मंदिर देख सकते हैं। हल्ला पोल, राम पोल, पाघरा पोल, निम्बू पोल, भैरव पोल एवं तोप-खाना पोल किले के अन्य दरवाजे हैं।

Pc:Ajith Kumar

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