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इस नवंबर करें राजस्थान की यात्रा और शमिल हो रंगीन उत्सवों में

By Goldi

भारत में राजस्थान

जी हां, और वह है, यहां के मेले और त्यौहार जो पर्यटकों को अपनी ओर रिझाते है। आख़िरकार इस राज्य में रंगीन संस्कृती और सभ्यता को पीढ़ी दर पीढ़ी काफी अच्छे से संयोजित कर रखा गया है। यहां का लोक संगीत,पारंपरिक वेषभूषा आदि सब इन प्रमुख त्योहारों और मेलों में देखा जा सकता है।

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इतना ही नहीं सर्दियों के दौरान यहां कई पर्व और त्यौहार मनाये जाते हैं, जिसमे शामिल होकर आप यहां की संस्कृति को जान और समझ सकते हैं। इसी क्रम में हम आपके लिए लेकर आये हैं राजस्थान 2017 के कुछ खास पर्वों और त्योहारों की एक लिस्ट, जिनमे आप शिरकत कर सकते हैं।

पुष्कर ऊंट मेला

पुष्कर ऊंट मेला

राजस्थान के सबसे लोकप्रिय त्योहारों में से एक, पारंपरिक पुष्कर कैमल महोत्सव सिर्फ पर्यटकों को ही नहीं बल्कि फोटोग्राफर को आकर्षित करने के लिए जाना जाता है। यह एक पशुधन मेला है, जिसमे हर साल करीबन तीस हजार ऊंट इकट्ठा होते हैं, जिन्हें बेहद खूबसूरती से सजाया जाता है, और इनके लिए कई प्रतियोगिता भी आयोजित होती है। इसके अलावा इस मेले का दूसरा मुख्य आकर्षण होता है गर्म हवा का गुब्बारा..जिसमे बैठकर आप आसमान में उड़ते हुए मेले का आनन्द उठा सकते हैं।

कब: 28 अक्टूबर से 4 नवंबर तक

कहां: जयपुर हवाई अड्डे से 146 किलोमीटर दूर पुष्कर

PC:sheetal saini

कोलायत मेला

कोलायत मेला

यह मेला कपिल मुनी मेला के रूप में भी जाना जाता है, कोलायत मेला से धार्मिक भावनाएं जुड़ी हुई हैं..यह मेला कार्तिक पूर्णिमा पर आयोजित होता है। यह बीकानेर जिले का सबसे बड़ा मेला है। इस मेले का हिस्सा बनने वाले लोग 52 घाटों वाली झील में डुबकी लगाते हैं, कार्तिक पूर्णिमा पर इस झील में डुबकी लगाना बेहद शुभ माना गया है।इस दौरान रात के समय इस झील के हजारों की संख्या में दीपों को तैरते हुए देखा जा सकता है।

कब: 2नवंबर से 4नवंबर

कहां: बीकानेर, जिसका अपना हवाई अड्डा है और दिल्ली और अन्य शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है।

चंद्रभागा मेला

चंद्रभागा मेला

झालरापाटन, झालावाड़ से महज 6 किलोमीटर की दूरी पर है। यह मेला हर साल कार्तिक महीने में लगता है। ये मेला चंद्रभागा नदी के सम्मान में मनाया जाता है, जिसमें कार्तिक मास के पूरे चांद में स्नान करना उत्तम माना गया है। इस दिन दूर दूर से श्रद्धालु आकर डुबकी लगाते हैं।

कब: 3 से 5 नवंबर 2017

जहां: झलावर, कोटा से 85 किमी और इंदौर से 240 किलोमीटर दूर

बूंदी उत्सव

बूंदी उत्सव

बूंदी राजस्थान के रंगीन शहरों में से एक है...यह हर वर्ष एक वार्षिक उत्सव मनाया जाता है। इस मेले के मुख्य आकर्षण शोभा यात्रा,लोक संगीत,पगड़ी प्रतियोगिता, सांस्कृतिक प्रदर्शन और पारंपरिक चीजों के साथ राजस्थनी खेल होते हैं। यह मेला ख़ुशी के रंग लेकर बूंदी की आवोहवा को बेहद खुशनुमा कर देता है।

कब: 6-8 नवंबर

कहां: बूंदी, जयपुर हवाई अड्डे से 210 किमी की दूरी पर स्थित है...

PC:Nanji Sharma

मत्स्य फेस्टिवल

मत्स्य फेस्टिवल

राजस्थान के प्रमुख त्योहारों में से एक मत्स्य पर्व का मुख उद्देश्य इस पर्व के जरिये राज्य की पारंपरिक मूल्य को जीवित रखना है। यह पर्व हर साल राजस्थान के अलवर में आयोजित होता है, इस त्यौहार खूबसूरत बनाते हैं, यहां के लोक गायक, लोक नृत्य और शिल्प मेले।

कब: 25-26 नवंबर

कहां: अलवर, जयपुर हवाई अड्डे से 162 किमी और सड़क से दिल्ली से 167 किमी दूर

कबीर यात्रा

कबीर यात्रा

कबीर यात्रा राजस्थान के उन पर्वों में से एक है, जिसमे राजस्थनी लोक संगीत को बढ़ चढ़कर प्रोत्साहित किया जाता है..यह मेला उन लोगो के एकदम बेस्ट है, जो पारंपरिक संगीत से प्यार करते हैं..और कबीर यात्रा सबसे ज्यादा यूनिक इसलिए है क्योंकि यह एक यात्रा संगीत समारोह है,जो बीकानेर से लेकर वहां के आसपास के क्षेत्रों में यात्रा करते हुए पूरा होता है। इस दौरान यहां के स्थानीय गायक इस यात्रा को अपने संगीत से लोगो का दिल जीतते हैं।

कब: नवंबर 11-16

कहां: बीकानेर में और उसके आसपास, एक हवाई अड्डा है और दिल्ली और अन्य शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है

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