बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से अपनी यात्रा शुरू करने वाला लगभग हर यात्री यहीं चाहता है कि उनका विमान टर्मिनल -2 से उड़ान भरे। ऐसा हो भी क्यों न, बेंगलुरु एयरपोर्ट का नाम आज दुनिया भर के सबसे शानदार एयरपोर्ट्स में जो शामिल हो चुका है। लेकिन क्या आपको पता है, जब हमारे देश को आजादी मिली थी, तब बेंगलुरु में कोई एयरपोर्ट ही नहीं था?
उस समय बेंगलुरु तक आने का जरिया सिर्फ ट्रेन या बस ही हुआ करती थी।

अब जब हम एक आजाद भारत की बात कर रहे हैं, तो चलिए तब से लेकर अब तक भारत के एविएशन सेक्टर में हुए विकास और बदलावों के बारे में भी बात करते हैं। अगर आप Google से आजादी से पहले भारत के एयरपोर्ट्स के इतिहास के विषय में पूछेंगे तो वह आपको कुछ चुनिंदा एयरपोर्ट्स के बारे में ही बताएगा। लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है।
साल दर साल भारत में एयरपोर्ट्स का विकास हुआ है, जो आज के विकसित इंटरनेशनल एयरपोर्ट्स में परिवर्तित हो चुके हैं। आइए स्वतंत्रता के समय हवाई अड्डों की संख्या और वर्तमान समय की तुलना करके देखें, जरा गौर फरमाइएगा।
वर्ष 1947 में जब भारत को आजादी मिली, उस समय भारत में सिर्फ 5 अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट्स ही थे - बम्बई (वर्तमान मुंबई), कलकत्ता (वर्तमान कोलकाता), दिल्ली, मद्रास (वर्तमान चेन्नई) और कराची। आजादी के समय हुए बंटवारे में कराची अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट पाकिस्तान के हिस्से आ गया।
आजादी से पहले विकसित हुए एयरपोर्ट्स

कोलकाता एयरपोर्ट
वर्ष 1924 में कोलकाता एयरपोर्ट का उद्घाटन हुआ था। यह भारत के सबसे पुराने एयरपोर्ट्स में से एक है। शुरुआत में इसका नाम कलकत्ता एयरोड्रोम था, जिसे बाद में नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम दिया गया। इस एयरपोर्ट पर लैंड करने वाला पहला विमान डकोटा 3 था। वर्ष 1924 में एम्सटर्डम से बटाविया (जकार्ता) के रूट पर आवाजाही करने वाले KLM का कोलकाता एयरपोर्ट पर ठहराव शुरू हुआ। वर्ष 1942 में हुए दूसरे विश्वयुद्ध के समय कलकत्ता एयरपोर्ट ने प्रमुख भूमिका निभायी थी, जब अमेरिकी वायु सेना के 7वें बमबारी समूह ने बर्मा (म्यांमार) पर B-24 लिबरेटर बम गिराने के लिए इस एयरपोर्ट का इस्तेमाल किया था।
अमृतसर एयरपोर्ट
ब्रिटिश शासनकाल के दौरान ही वर्ष 1930 में यह एयरपोर्ट शुरू हुआ था। शुरुआत में अमृतसर एयरपोर्ट का इस्तेमाल सिर्फ VVIP के आवाजाही के लिए किया जाता था। स्वतंत्रता मिलने के बाद इसे दिल्ली और श्रीनगर से जोड़ दिया गया। अमृतसर एयरपोर्ट से पहला अंतर्राष्ट्रीय विमान वर्ष 1960 में काबुल के लिए उड़ा था।
मद्रास एयरपोर्ट
चेन्नई मुख्य शहर से लगभग 21 किमी दक्षिण पश्चिम में चेंगलपट्टू जिले के तिरुसुलम में यह एयरपोर्ट मौजूद है। वर्ष 1915 में इस एयरपोर्ट से विमान सेवाएं शुरू हुई थी लेकिन आधिकारिक रूप से यह एयरपोर्ट वर्ष 1930 में शुरू हुआ।
दिल्ली एयरपोर्ट
वर्ष 1930 में दिल्ली एयरपोर्ट को बनाया गया था। इस एयरपोर्ट का वास्तविक 09/27 रनवे का निर्माण ब्रिटिश अधिकारियों ने करवाया था, जो करीब 2,816 मीटर लंबा और 60 मीटर चौड़ा है। इस रनवे का इस्तेमाल भी दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान किया गया था।
मुंबई एयरपोर्ट
इस एयरपोर्ट का निर्माण भी वर्ष 1930 में ही किया गया था। RAF सांताक्रुज पास में ही मौजूद जुहू एयरोड्रोम से बड़ा था और दूसरे विश्वयुद्ध में 1942 से 1947 के दौरान इसने कई RAF स्क्वॉड्रॉन्स की मेजबानी भी की थी।
त्रिवेंद्रम इंटरनेशनल एयरपोर्ट
वर्ष 1932 में इसकी स्थापना बतौर रॉयल फ्लाइंग क्लब हुई थी, जो लेफ्टी. कर्नल राजा गोडा वर्मण की पहल थी। 1 नवंबर 1935 को यहां से पहली से पहले विमान ने रॉयल अंचल (त्रावणकोर पोस्ट) से डाक ले जाने के लिए मुंबई के लिए उड़ान भरी थी।

नागपुर एयरपोर्ट
प्रथम विश्व युद्ध के दौरान 1917-18 में आरएफसी/आरएएफ के लिए तैयार किए गए नागपुर एयरपोर्ट की सुविधाओं का दूसरे विश्व युद्ध के दौरान नवीनीकरण किया गया और आरएएफ द्वारा एक स्टेजिंग एयरफील्ड के रूप में इस्तेमाल किया गया। अंग्रेजों के भारत से जाने के बाद इसे भारत सरकार को सौंप दिया गया।
आजादी से पहले के एयरस्ट्रिप जो भारत की आजादी के बाद बने एयरपोर्ट्स
कोची
वर्ष 1936 में कोची एयरपोर्ट का निर्माण एयरस्ट्रीप के तौर पर विलिंग्डन द्वीप पर किया गया था। इसका निर्माण कोची बंदरगाह के विकास के लिए आवाजाही करने वाले अधिकारियों की सुविधा के लिए कोची के महाराज द्वारा करवाया गया था। दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान उस समय भारत पर राज करने वाले ब्रिटिश अधिकारियों ने इस एयरस्ट्रीप को भारतीय नौसेना के लिए सैन्य एयरपोर्ट में परिवर्तित कर दिया था।
अहमदाबाद
वर्ष 1937 में बनाए गये अहमदाबाद एयरपोर्ट से शुरुआत में सिर्फ घरेलू विमान ही आवाजाही किया करती थी। बाद में इस एयरपोर्ट का नाम सरदार बल्लभभाई पटेल अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट रखा गया और 23 मई 2000 से यह एक अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट बना।
पुणे
वर्ष 1939 में RAF पुणे के तौर पर इस एयरफिल्ड की स्थापना मुंबई को एयर सिक्योरिटी प्रदान करने के लिए किया गया था। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान इसने स्क्वॉड्रोन जैसे डी हैवील्लैंड मॉसक्यूटो, विकर्स विल्लिंगटन बॉम्बर और सुपरमरीन स्पीटफायर फाइटर विमानों की मेजबानी भी की थी।
बैंगलोर हाल
वर्ष 1942 में सैन्य सुरक्षा के उद्देश्य से बैंगलोर हाल (HAL) की स्थापना की गयी थी लेकिन बाद में 1970 के दशक से इसका इस्तेमाल घरेलू उड़ानों के लिए किया जाने लगा।
जोधपुर
वर्ष 1920 में महाराजा उमेद सिंह ने जोधपुर फ्लाइंग क्लब की स्थापना अपने चित्तर पैलेस (उम्मेद भवन पैलेस) के पास एक छोटे से एयरफिल्ड में की थी। अगले 30 सालों के दौरान इस एयरफिल्ड ने प्रसिद्धि हासिल की और दूसरे विश्व युद्ध के दौरान इस एयरफिल्ड ने बतौर रॉयल एयर फोर्स (RAF) अपनी सेवाएं भी प्रदान की। वर्ष 1950 में रॉयल इंडियन एयर फोर्स के गठन के साथ इसे भी विकसित किया गया जो बाद में भारतीय वायु सेना में परिवर्तित हुआ।

पूंछ
कश्मीर घाटी तक अपनी पहुंच के कारण रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पूंछ को 1947 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान एक गंभीर नाकाबंदी का सामना करना पड़ा था, जब 21 नवंबर को पाकिस्तानी सेना ने इसे घेर लिया था, जिससे शेष भारत के साथ सभी संपर्क कट गए थे। हालांकि इस दौरान सभी आपूर्ति हवाई मार्ग से गिराई गई थी, लेकिन वे सेना और 40,000 शरणार्थियों दोनों के लिए अपर्याप्त थीं।
आजादी के बाद बने प्रमुख एयरपोर्ट्स
- 1948- इंदौर एयरपोर्ट, इंदौर
- 1955- गोवा इंटरनेशनल एयरपोर्ट
- 1962- भुवनेश्वर एयरपोर्ट, भुवनेश्वर
- 1968- भोपाल एयरपोर्ट, भोपाल
- 1969- उदयपुर एयरपोर्ट, राजस्थान
- 1974- देहरादून एयरपोर्ट,देहरादून
- 1983- वाराणसी एयरपोर्ट, वाराणसी
- 1986- लखनऊ एयरपोर्ट, लखनऊ
- 2002- बागडोगरा एयरपोर्ट, पश्चिम बंगाल
- 2005- जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जयपुर
- 2008- केम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, बेंगलुरु
- 2008- राजीव गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट, हैदराबाद
भारत में एयरपोर्ट्स की वर्तमान स्थिति

भारत के एविएशन सेक्टर का विकास व विस्तार उल्लेखनीय रूप से हुआ है। वर्तमान में भारत में कुल 157 एयरपोर्ट हैं, जहां से विमानों का संचालन होता है। इनमें से 33 एयरपोर्ट अंतर्राष्ट्रीय हैं, जो वैश्विक संपर्कों को बढ़ावा देते हैं। वहीं 11 एयरपोर्ट ऐसे हैं जो आवश्यकताओं को पूरी करने के लिए कस्टम एयरपोर्ट के रूप में काम करते हैं। साथ ही देश में 113 घरेलू एयरपोर्ट हैं, जो देश के अंदर आवाजाही को आसान बना देते हैं। इसके साथ ही 7 एयरपोर्ट संयुक्त उद्यम अंतर्राष्ट्रीय केन्द्रों के रूप में कार्य करते हैं और 85 उड़ान योजना का हिस्सा हैं, जिसका उद्देश्य क्षेत्रीय सम्पर्क को बढ़ाना है।
किसी भी दिन, भारत का आसमान गतिविधियों से भरा रहता है। देश भर में 3,025 से ज़्यादा घरेलू उड़ानें उड़ान भरती और उतरती हैं, जबकि 563 अंतर्राष्ट्रीय उड़ानें भारतीय शहरों को दुनिया से जोड़ती हैं। घरेलू एयरपोर्ट पर यात्रियों की संख्या प्रभावशाली है, जहां से रोज़ाना लगभग 8,77,613 लोग गुज़रते हैं। इस बीच, अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर हर दिन लगभग 2,11,511 यात्रियों का महत्वपूर्ण प्रवाह संभालते हैं, जो वैश्विक यात्रा में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है।
*Aviation मंत्रालय से मिली जानकारी के आधार पर
उम्मीद करते हैं कि उपरोक्त तथ्यों से आपको अपने देश भारत पर जरूर गर्व हुआ होगा। जय हिंद।



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