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रामायण काल से जुड़ा है लेपाक्षी का इतिहास

By: Namrata Shatsri

पुरातात्विक महत्व और समृद्ध संस्कृति के लिए प्रसिद्ध लेपाक्षी एक लोकप्रिय पर्यटन स्‍थल है। इतिहासप्रेमियों को इस जगह पर बहुत कुछ मिल सकता है। आंध्र प्रदेश में स्थित लेपाक्षी हिंदुपुर से 15 किमी और बैंगलोर के अनंतपुर जिले से 120 किमी दूर है।

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इस प्राचीन स्‍थान पर भगवान शिव, विष्‍णु जी और वीरभद्रा के मंदिर हैं। इन धार्मिक स्‍थलों को 1336 से 1646 के मध्‍य विजयनगर शासनकाल के दौरान बनवाया गया था। इस मंदिर की दीवारों को भित्ति चित्र से सजाया गया है।

लेपाक्षी आने का सही समय

लेपाक्षी आने का सही समय

सर्दी के मौसम में लेपाक्षी आने का सबसे सही समय रहता है। गर्मी के दौरान सूरज की तपिश और दिन में गर्मी की वजह से आपको घूमने में बहुत दिक्‍कत हो सकतह है। वहीं मॉनसून के दौरान मौसम उमस भरा होता है।

आप लेपाक्षी अक्‍टूबर से फरवरी के बीच आ सकते हैं। लेपाक्षी में घूमने के लिए ये सबसे सही समय है। इस दौरान यहां का मौसम बेहद सुहावना रहता है।

सर्दी के मौसम में यहां पर 15 डिग्री से 30 डिग्री तक तापमान रहता है। रात के समय मौसम काफी ठंडा रहता है और दिन में भी आप आराम से लेपाक्षी के दर्शनीय स्‍थल देख सकते हैं।PC: Perched

कैसे पहुंचे लेपाक्षी

कैसे पहुंचे लेपाक्षी

फ्लाइट द्वारा : लेपाक्षी से निकटतम एयरपोर्ट 43 किमी दूर श्री सत्‍य साईं एयरपोर्ट है। बैंगलोर से श्री सत्‍य साईं एयरपोर्ट तक कई फ्लाइट आती हैं। यहां से आप लेपाक्षी तक कैब बुक करवा सकते हैं। बैंगलोर से श्री सत्‍य साईं एयरपोर्ट तक का सफर एक घंटे का समय लगता है।

ट्रेन द्वारा : बैंगलोर से लेपाक्षी के लिए कोई भी सीधी ट्रेन नहीं है। हालांकि आपको बैंगलोर से मलुगुर तक ट्रेन मिल जाएगी जिसमें तीन घंटे का समय लगता है। यहीं लेपाक्षी का निकटतम एयरपोर्ट है। पहले मलुगुर पहुंचकर आप यहां से टैक्‍सी और बस ले सकते हैं।

सड़क द्वारा : बैंगलोर से लेपाक्षी तक आप रोड़ ट्रिप पर भी जा सकते हैं। कार या बस ले सकते हैं। इस रोड़ ट्रिप में आपको रास्‍ते में कई खूबसूरत जगहें और नज़ारे देखने को मिलेंगें। इस रूट पर कई सरकारी और प्राइवेट बसें भी चलती हैं।

इस रूट पर चलने वाली बसों का किराया काफी सस्‍ता है। इस रूट पर कई तरह कह बसें चलती हैं। सरकार और प्राइवेट बस डीलर द्वारा सरकारी बसें, वॉल्‍वे बसें, स्‍लीपर बसें, एसी बसें और सेमी स्‍लीपर बसों की सुविधा मिलती है।

अपनी पसंद की सीट के लिए आप बस में पहले से ही बुकिंग करवा सकते हैं।

इस सफर पर आप कैब भी किराए पर ले सकते हैं या अपनी कार से भी जा सकते हैं। कार से इस रास्‍ते में आपको दो घंटे से ज्‍यादा का समय नहीं लगेगा और रास्‍ते में कई सुंदर गांव भी देखने को मिलेंगें।
pc: AbhijeetK

रूट मैप

रूट मैप

रूट 1 : बैगलोर - हेब्‍बल - येलाहांका - दोड्डालापुरा - गौरीबिदानुर - हिंदुपुर - लेपाक्षी।

रूट 2 : बैंगलोर - येलाहांका - देवानहल्‍ली - चिकाबलापुर - बागेपल्‍ली - लेपाक्षी

हालांकि, हम आपको पहले रूट से जाने की सलाह देंगें क्‍योंकि ये रास्‍ता बेहतर और ज्‍यादा सुंदर है।

बैंगलोर से हेब्‍बल तक पहला रूट शुरु होता है। सुमांगली सेवाश्रम मेन रोड़ और सर्विस रोड़ से विनायकनगर के बेलारी रोड़ तक चलें। 1.3 किमी के इस रास्‍ते में आपको सिर्फ 5 मिनट का समय लगेगा। 9.8 किमी के बाद आप एनएच 44 से बाहर आ सकते हैं।

इस रास्‍ते पर आपको येलाहांका तक सिर्फ 20 मिनट लगेंगें। रेलवे स्‍टेशन मेन रोड़ से एसएच 9 और फिर एसएच 9 से केजी गोविंगदपुरा तक। 25.6 किमी के बाद आप दोड्डाबल्‍लापुरा पहुंचेंगें।

यहां से नीलामंगला - चिक्‍काबल्‍लापुरा / तुबागेरे - दोड्डाबल्‍लापुरा रोड़ और फिर गौरीबिदानुर से एसएच 9। 38.7 किमी बाद विनायक मोबाइल सर्विस से बाएं मुड़कर गौरीबिदानुर।

यहां से आप पूर्व की ओर एसएच 9 पकड़ें और राजेश्‍वरी मोबाइल एंड फैंसी गिफ्ट सेंटर से आएं मुड़ जाएं। अब बाएं ओर रेलवे स्‍टेशन रोड़ पर चलें। 2 किमी के बाद ओम शिर्डी साई कॉमन बैड सेंटर पहुंचकर 2.9 किमी के बाद दाएं जाएं और 41 मिनट बाद 24.7 किमी दूर आप हिंदुपुर पहुंच जाएंगे।

अब दक्षिण में 60द मीटर चलें और फिर लेपाक्षी रोड़ पर तीसरा एग्जिट लें। 19 मिनट में आप लेपाक्षी पहुंच जाएंगें।

रास्‍ते में आपको सबसे बड़े ईस्‍कॉन मंदिर के दर्शन करने को मिलेंगें। आप चाहें तो कुछ समय के लिए यहां रूक सकते हैं।

विश्‍वेश्‍वराय औद्योगिक और तकनीकी संग्रहालय भी काफी सुंदर है। इसके बाद जयप्रकाश नारायण बायोडाइवर्सिटी पार्क जा सकते हैं।

प्रकृति प्रेमियों के लिए रास्‍ते में लुंबी गार्डन पड़ेगा जहां आप कुछ देर चाय और स्‍नैक्‍स के साथ आराम फरमा सकते हैं। यहां पर प्रसिद्ध और सुंदर तीन छोटे मंदिर स्‍थापित हैं। ये मंदिर हैं शनिश्‍वरा स्‍वामी मंदिर, बसावनपल्‍ली शिव मंदिर और श्री वेंकटरमन मंदिर।

 लेपाक्षी मंदिर

लेपाक्षी मंदिर

इस जगह का सबसे बड़ा मुख्‍य आकर्षण है लेपाक्षी मंदिर। ये मंदिर विजयनगर शैली की स्‍थापत्‍यकला में बना है एवं इसके हैंगिंग पिलर्स मंदिर का सबसे खूबसूरत हिस्‍सा है। ये पिलर सोलहवीं शताब्‍दी के इंजीनियरों की कुशलता का नमूना है।

ऐसा कहा जाता है कि भारत में ब्रिटिश शासन के दौरान ब्रिटिशों ने इन खंभों के रहस्‍य के बारे में जानने की कोशिश की थी लेकिन वो असफल हो गए। लोक कथाओं के अनुसार यह मंदिर रामायण काल से जुड़ा हुआ है।

किवदंती है कि इस जगह पर जटायु आकर गिरा था। रावण द्वारा भगवान राम की पत्‍नी माता सीता का हरण किए जाने पर युद्ध के दौरान घायल होकर जटायु यहां आकर गिरा था। भगवान रात ने जटायु को देखकर ले पाक्षी कहा था। स्‍थानीय भाषा में इसका मतलब हे पक्षी होता है।

इस जगह पर नाट्य और कल्‍याण मंडप पर की गई प्राचीन कलाकृतियों पर बनाए गए चित्र भी आकर्षण का केंद्र है। ये चित्र लोकप्रिय स्‍थापत्‍य कला का बेजोड़ नमूना है।PC: Srihari Kulkarni

वीरभद्रा मंदिर

वीरभद्रा मंदिर

लेपाक्षी को वीरभद्र मंदिर के लिए भी जाना जाता है एवं यह आंध्र प्रदेश का लोकप्रिय मंदिर है। इस मंदिर में स्‍थानीय देवता वीरभद्र स्‍वामी की पूजा होती है। ये मंदिर अपनी खूबसूरत शिल्‍पकला और प्राचीन इतिहास के लिए पर्यटकों और स्‍थानीय लोगों के बीच मशहूर है।

ये मंदिर रामायण काल से जुड़ा हुआ है। मान्‍यता है कि रावण द्वारा भगवान राम की पत्‍नी सीता का हरण करने पर जटायु नामक पक्षी ने रावण ये युद्ध और माता सीतों को बचाने का प्रयास किया था। इस स्‍थान से जुड़ी कथा के अनुसार यहां पर माता सीता के पद चिह्न भ्‍ज्ञी हैं। इतिहास के इस शानदार चिह्न को देखने के लिए बड़ी संख्‍या में पर्यटक यहां आते हैं।PC:Bhaswati Guha Majumder

नंदी बैल

नंदी बैल

वीरभद्र मंदिर से निकट स्थित है लेपाक्षी का अन्‍य खूबसूरत आकर्षण नंदी बैल का मंदिर। मंदिर में नंदी बैल की ग्रेनाइट से बनी विशाल मूर्ति स्‍थापित है। नंदी बैल की इस मूर्ति की लंबाई 4.5 मीटर और चौड़ाई 8.23 मीटर है जोकि भारत की सबसे विशाल नंदी की मूर्ति है...pc:Hari Krishna

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