पिछले शनिवार (9 मार्च) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अरुणाचल प्रदेश में तैयार दुनिया की सबसे बड़ी दो लेन वाली सेला सुरंग (Tunnel) का उद्घाटन किया। 13,000 फीट की ऊंचाई पर बनी यह सुरंग विपरित मौसम में भी अरुणाचल प्रदेश के तवांग को देश के दूसरे हिस्सों से जोड़े रखेगा।
बता दें, खासतौर पर सर्दियों के मौसम में होने वाली भारी बर्फबारी के कारण कई महीनों के लिए अरुणाचल प्रदेश के तवांग का संपर्क देश के दूसरे हिस्सों से पूरी तरह से टूट जाता है। इसके अलावा बारिश के मौसम में भी पहाड़ों से लैंडस्लाइडिंग जैसी परेशानियां भी अक्सर यहां सामने आती रहती हैं।

825 करोड़ रुपए की लागत से 2 लेन वाली इस परियोजना को पूरा किया गया है, जो कुल 8.6 किमी लंबी है। इसमें हर रोज लगभग 3000 कार और 2000 ट्रकों को समायोजित करने की क्षमता है। टनल से होकर गुजरने वाली गाड़ियों की अधिकतम 80 किमी/घंटा की रफ्तार निर्धारित की गयी है। सेला टनल की प्राथमिक सुरंग 980 मीटर लंबा है और दूसरा टनल जिसमें इमरजेंसी एग्जिट है, वह 1.5 किमी लंबा है।
बता दें, सेला टनल, भारत-चीन सीमा पर LOC (लाइन ऑफ कंट्रोल) से काफी पास में मौजूद है। इस वजह से यह रणनीतिक रूप से काफी अधिक महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस टनल के बन जाने से तवांग और चीन से सटे अन्य सीमावर्ती क्षेत्रों में सालभर पहुंचना आसान हो गया है।

सेला सुरंग की डिजाइन यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए किया गया है। 4200 मीटर की ऊंचाई पर मौजूद सेला पास के ठीक नीचे स्थित यह सुरंग एक गेम-चेंजर साबित होने वाला है। यह तवांग और आसपास के क्षेत्रों तक लोगों को निर्बाध रूप से पहुंचाने का दावा करता है।
क्योंकि इस टनल के खुल जाने से यहां खासतौर पर सर्दियों और बारिश के मौसम में होने वाली भारी बर्फबारी और भूस्खलन जैसी समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ेगा। इससे यहां रहने वाले स्थानीय लोगों का देश के दूसरे हिस्सों से संपर्क तो बना ही रहेगा, चीन की सीमा तक भारत की पहुंच भी पूरे साल बनी रहेगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फरवरी 2019 में सेला टनल परियोजना का शिलान्यास किया था। चुनौतीपूर्ण भौगोलिक स्थितियों के साथ-साथ कोविड-19 अतिमारी ने भी टनल निर्माण को प्रभावित किया था। लेकिन आखिरकार 5 साल बाद साल 2024 के मार्च में पीएम मोदी ने इस टनल का उद्घाटन कर दिया है।



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