पिछले 22 जनवरी को धुमधाम के साथ रामलला की मूर्ति को श्रीराम जन्मभूमि पर नवनिर्मित भव्य मंदिर के भूतल में बने गर्भगृह में स्थापित कर दिया गया है। रामलला की प्रतिमा में प्राण-प्रतिष्ठा अनुष्ठान की वजह से लंबे समय तक निर्माण कार्य बंद रहने के बाद तीन मंजीला बन रहे इस मंदिर के प्रथम तल, जहां राम दरबार होगा, का निर्माण कार्य फिर से शुरू हो गया है।

राम मंदिर के आखिरी और 5वें शिखर का निर्माण होना भी अभी बाकी है जिसके लिए फिर से क्रेन आदि मशीनों को लगाया जा रहा है। इसके साथ ही राम मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था को और भी चौकस बनाया जा रहा है। मंदिर के हर एक कोने पर निगरानी करने के लिए AI आधारित CCTV कैमरे लगाए जा रहे हैं, जो हर चीज और चेहरे पर बारीकी से अपनी नजरें बनाएं रखेंगे।
श्रीराम जन्मभूमि पर बन रहे इस मंदिर परिसर में मुख्य मंदिर के अलावा और भी कई मंदिरों का निर्माण होगा और कुछ मंदिरों का प्रस्ताव दिया गया है। इस बारे में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की तरफ से ही विस्तृत जानकारी साझा की जा चुकी है।
सरकारी आवास में रहेंगे राम मंदिर के सुरक्षाकर्मी
राम मंदिर की सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकर्मियों के रहने के लिए कोई स्थायी प्रबंध नहीं है। मीडिया रिपोर्ट्स से मिली जानकारी के अनुसार इन जवानों को अब तक विभिन्न सरकारी भवनों और निजी स्थानों पर ठहराया जाता था। लेकिन सोमवार (29 जनवरी) को जारी एक आदेश के मुताबिक माध्यमिक शिक्षा विभाग के स्वामित्व की 18.08 एकड़ जमीन को उत्तर प्रदेश विशेष सुरक्षा बस (UPSSF), PAC और अन्य संस्थानों की स्थापना के लिए लोक हित में गृह विभाग को निःशुल्क हस्तानांतरित करने का फैसला लिया गया है।
बताया जाता है कि राज्य सरकार ने अयोध्या की सदर तहसील के मलिकपुर और गंजा गांव में आवासीय भवन बनाने का फैसला लिया है जहां इन सुरक्षाकर्मियों को रखा जाएगा।

नया तीर्थ हब बनकर उभर रही है अयोध्या
राम मंदिर के उद्घाटन और रामलला की प्रतिमा में प्राण प्रतिष्ठा समारोह के मद्देनजर अयोध्या पिछले कुछ दिनों से दुनियाभर की निगाहों में छाया हुआ है। हर दिन लाखों की संख्या में श्रद्धालु रामलला के दर्शन करने अयोध्या पहुंच रहे हैं। वहीं विदेशों से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या भी हजारों में है। श्रीराम जन्मभूमि को वैश्विक तीर्थस्थल के रूप में परिवर्तित करने के उद्देश्य से ही विकसित किया जा रहा है।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से मिली जानकारी के अनुसार राम मंदिर परिसर में मुख्य मंदिर के अलावा करीब 13 अन्य मंदिरों का निर्माण भी किया जाएगा। बताया जाता है कि इनमें से 6 मंदिर राम मंदिर परिसर के अंदर और 7 मंदिर परिसर के बाहर बनाए जाएंगे।
राम मंदिर परिसर के अंदर कौन-कौन से मंदिर
मुख्य मंदिर के चारों तरफ आयताकार परकोटा बनाया जाएगा। चारों दिशाओं में इसकी कुल लंबाई 732 मीटर और चौड़ाई 14 फीट होगी। परकोटे के चारों कोनों पर सूर्यदेव, मां भगवती, गणपति और भगवान शिव के 4 मंदिरों का निर्माण किया जाएगा। परिसर की उत्तरी भुजा में मां अन्नपूर्णा और दक्षिणी भुजा में हनुमान जी का मंदिर बनाया जाएगा।
मुख्य मंदिर के प्रथम और दूसरे तल व एक शिखर का संपूर्ण निर्माण कार्य इस साल दिसंबर तक पूरा कर लेने की संभावना है। जबकि परिसर के अंदर व बाहर अन्य सभी निर्माण कार्य का दिसंबर 2025 तक संपन्न करने का लक्ष्य रखा गया है।

परिसर के बाहर कौन-कौन से मंदिर
राम मंदिर परिसर के बाहर 7 मंदिरों का प्रस्ताव दिया गया है जिसमें सिर्फ देवी-देवताएं ही नहीं बल्कि ऋषियों के मंदिर भी शामिल हैं। अयोध्या में जिन ऋषियों के मंदिर बनाने का प्रस्ताव दिया गया है उनमें महर्षी वाल्मीकि, महर्षि वशिष्ठ, महर्षि विश्वामित्र, महर्षि अगस्त्य, निषादराज, माता शबरी और ऋषिपत्नी देवी अहिल्या का मंदिर शामिल है।
अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर पिछले करीब 500 सालों से राम मंदिर बनाने का श्रद्धालुओं का सपना आखिरकार पूरा हुआ है। राम मंदिर के निर्माण से न सिर्फ अयोध्या का अध्यात्मिक विकास हुआ है बल्कि पर्यटन के दृष्टिकोण से भी अयोध्या का काफी तेजी से विकास हो रहा है।



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