प्रभू श्री राम की नगरी अयोध्या को रामराज्य की तरह सजाने व संवारने का काम बड़े ही जोरो से चल रहा है। एक तरफ विशाल राममंदिर को आकार दिया जा रहा है, नेपाल से लायी गयी शालीग्राम शिला से मंदिर में स्थापित होने वाली मूर्तियां तैयार की जा रही है तो दूसरी तरफ अयोध्या नगरी को भी सजाने का काम चल रहा है।

अयोध्या में रास्तों में जगह-जगह भगवान राम की मूर्तियां स्थापित की जाएंगी ताकि हर आने-जाने वाले व्यक्ति को यह अहसास हो सके कि वो भगवान राम की पवित्र नगरी अयोध्या में है। इस काम के लिए मूर्तियां बनाने का काम अयोध्या नहीं बल्कि अयोध्या से दूर पश्चिम बंगाल के एक गांव में किया जा रहा है। मूर्तियां भी मिट्टी या किसी धातु नहीं बल्कि एक खास चीज से बनायी जा रही है। धूप या बारिश इन मूर्तियों का कुछ नहीं बिगाड़ सकती हैं।
किस चीज से बन रही हैं मूर्तियां
भगवान राम की आदमकद मूर्तियों का निर्माण पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के एक छोटे से गांव में किया जा रहा है। जिले के दत्तपुकुर इलाके में फाइबर से बनी इन मूर्तियों का निर्माण किया जा रहा है। यहीं पर बनी फाइबर की भगवान राम की मूर्ति को हाल ही में अयोध्या के लिए रवाना किया गया है। दत्तपुकुर की सीमा में प्रवेश करने के बाद सड़कों के दोनों किनारों पर बड़ी संख्या में मूर्ति निर्माण के लिए वर्कशॉप बने हुए हैं, जहां पिछले करीब 100 सालों से मिट्टी की मूर्तियां बनाने का काम चल रहा है। लेकिन पिछले 5-6 सालों से इन वर्कशॉप में बनी फाइबर की मूर्तियों की मांग बढ़ी है।
अयोध्या गयी भगवान श्रीराम की मूर्ति

हाल ही में अयोध्या में स्थापित करने के लिए भगवान श्रीराम की फाइबर से मूर्ति का ऑर्डर इस वर्कशॉप को मिला था। सिर्फ एक नहीं बल्कि भगवान राम की कई मूर्तियों को अयोध्या भेजा जा चुका है। इसके अलावा राजस्थान से शिवाजी की फाइबर से बनी मूर्ति का भी ऑर्डर मिला है। मिट्टी की मूर्तियों के मुकाबले फाइबर से बनी मूर्तियां महंगी जरूर होती हैं लेकिन मौसम की मार से बची रहने के कारण जिन मूर्तियों को खुले स्थानों पर स्थापित किया जाना होता है, उन मूर्तियों के लिए फाइबर से बनी मूर्तियों की मांग काफी ज्यादा है।
कहां-कहां से आता है मूर्तियों का ऑर्डर
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिम बंगाल के इस छोटे से गांव में मूर्तियां बनाने का ऑर्डर कई राज्यों के अलावा विदेशों से भी आता है। भगवान राम की मूर्ति बनाने वाले मूर्तिकार का कहना है कि उन्हें अमेरिका, दुबई और दक्षिण अफ्रिका से भी फाइबर की मूर्तियां बनाने का ऑर्डर मिला है। हालांकि विदेशों से आने वाले ऑर्डर भगवान की मूर्तियों के ना होकर वहां पार्क में बैठाने के लिए फेयरी, बाघ, ऊंट, पक्षी और अन्य जानवरों के होते हैं। भारत के दूसरे राज्य जैसे दिल्ली, ओडिशा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश से भगवान की फाइबर से बनी मूर्तियों को ऑर्डर आता है।
10 फीट की देवी दुर्गा की मूर्ति गयी विदेश
सिर्फ हमारे देश ही नहीं बल्कि विदेशों में रहने वाले बंगाली समुदाय के लोग भी बड़े ही धुम-धाम से दुर्गा पूजा का आयोजन करते हैं। जिसके लिए भारत से ही मूर्तियां मंगायी जाती हैं। विदेशों में जाने वाली अधिकांश मूर्तियां फाइबर से बनी होती हैं, क्योंकि इनके टूटने या क्षतिग्रस्त होने का खतरा कम रहता है। इन मूर्तियों का निर्माण पश्चिम बंगाल के विभिन्न वर्कशॉप में किया जाता है।

दत्तपुकुर के इस वर्कशॉप में पहली बार इस साल दुबई से 10 फीट की देवी दुर्गा की प्रतिमा बनाने का ऑर्डर आया था। इन मूर्तियों को बनाने वाले आर्टिस्ट दिपंकर मंडल का कहना है कि वह इन्हें अलग-अलग हिस्सों में ना बनाकर एक ही बार में 10 फीट की मूर्तियां बना देते हैं। आर्ट कॉलेज से प्रशिक्षण प्राप्त उक्त कलाकार का कहना है कि साल 2022 में उन्हें 30 फुट ऊंची स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी की प्रतिकृति बनाने का ऑर्डर मिला था, जिसे उन्होंने 3 भागों में तैयार किया था।
बता दें, राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा की तैयारियां भी शुरू हो चुकी हैं। इस मौके पर करीब 50,000 से 1 लाख लोगों के ठहरने, खाने-पीने की व्यवस्था को लेकर तैयारियां की जा रही है जिसमें पीएम नरेंद्र मोदी समेत कई वीआईपी और वीवीआईपी व्यक्ति भी शामिल होंगे।



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