देश की सांस्कृतिक राजधानी कोलकाता में दुर्गापूजा की धुन अब धीरे-धीरे सुनाई देने लगी है। जिन परिवारों में दुर्गापूजा होती है वहां के 'ठाकुर दालान' (घर का वह हिस्सा जहां दुर्गापूजा आयोजित की जाती है) में मां दुर्गा के साथ गणेश, कार्तिकेय, लक्ष्मी, सरस्वती, इन सबके वाहन और महिषासुर की मूर्तियों का निर्माण शुरू हो चुका है।

विभिन्न पूजा कमेटियों ने भी पूजा पंडालों के लिए बांस बांधने का काम शुरू कर दिया है। इधर कुम्हारटोली में भी व्यस्तता काफी बढ़ गयी है। हो भी क्यों ना...बस 2 महीनों का ही तो इंतजार है, इसके बाद शुरू होगा कोलकाता का सबसे बड़ा उत्सव 'दुर्गापूजा'।

इस साल दुर्गापूजा 19 अक्टूबर से 24 अक्टूबर तक आयोजित होगी। हालांकि 24 अक्टूबर को विजयादशमी के बाद भी कोलकाता में दुर्गापूजा की धुम मची रहेगी। लेकिन दुर्गापूजा के बाद जो चीज लोगों व खासतौर पर दुर्गापूजा के मौके पर कोलकाता आने वाले पर्यटकों को सबसे ज्यादा आकर्षित करता है, वह है राज्य सरकार द्वारा आयोजित होने वाला दुर्गापूजा कार्निवल। देश में एकलौता दुर्गापूजा कार्निवल कोलकाता में ही आयोजित होता है। इसे यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज लिस्ट में भी शामिल किया जा चुका है।

महानगर के रेड रोड पर बड़े ही धुमधाम से आयोजित होने वाले दुर्गा पूजा कार्निवर का आयोजन इस साल 27 अक्टूबर को होगा। अगर आप पूरे दुर्गापूजा के दौरान महानगर के सभी नामचीन पूजा पंडालों में घूमकर वहां देवी मां की प्रतिमाएं नहीं देख पाएं हैं या विसर्जन से पहले एक बार फिर से इन प्रतिमाओं का दीदार करना चाहते हैं तो दुर्गा पूजा कार्निवल से बेस्ट जगह और कहीं नहीं हो सकती है।

कार्निवल के दौरान ही राज्य सरकार दुर्गा पूजा पुरस्कारों की भी घोषणा करती है। इतना ही नहीं...जब कार्निवल है तो सांस्कृतिक राजधानी भी भला पीछे कैसे रह सकती है। दुर्गापूजा कार्निवल के दौरान रेड रोड पर कई नामी-गिरामी कलाकार अपनी प्रस्तुतियां भी देते हैं।
इस साल दुर्गापूजा के मौके पर राज्य सरकार ने राज्य भर के 43,000 क्लबों को 70,000 रुपयों का अनुदान देने की भी घोषणा की है। बता दें, पिछले साल तक राज्य सरकार दुर्गापूजा आयोजित करने वाली सभी क्लबों को 60,000 रुपये का अनुदान देती थी, जिसे इस साल बढ़ाया गया है।
इसके साथ ही कोलकाता में दुर्गापूजा का काउंटडाउन शुरू हो चुका है।



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