दिल्ली भारत के समृद्ध इतिहास और शान-ओ-शौकत की कहानियां सुनाता है। कई शासकों ने दिल्ली को अपनी राजधानी बनाया था। इसलिए दिल्ली हमेशा से ही लोगों के आकर्षण का केंद्र रही है। दिल्ली की हर मीनार और किला इतिहास की कहानियां सुनाती हैं। कहीं बादशाह अकबर, तो कहीं औरंगजेब और कहीं अलाउद्दीन खिलजी का इतिहास दिखता है।

दिल्ली में कई ऐतिहासिक इमारतें जैसी कुतुब मीनार, लाल किला, हुमायूं का मकबरा से लेकर कई बाजार जैसे मीना बाजार और चोर बाजार तक हैं। लेकिन क्या आपने कभी दिल्ली के चोर मीनार के बारे में सुना है। जी हां, आपने सही सुना, चोर मीनार जिसका नाम सुनते ही लोगों की रुह तक कांप जाती थी।
चलिए आपको इस मीनार की खौफनाक इतिहास के बारे में बताते हैं :
कब और किसने बनवाया था चोर मीनार
इतिहासकारों के मुताबिक चोर मीनार को अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल में बनाया गया था। इस मीनार का निर्माण 1290-1321 के बीच किया गया था। मीनार का निर्माण गुनाहगारों को सजा देने के लिए किया गया था। लेकिन इस मीनार में सजा ऐसे दी जाती थी कि गुनाहगार तो छोड़िए आम लोगों की रुह तक कांप जाती थी। बता दें, मीनार में गोलाई से करीब 225 सुराख बनाएं हुए हैं।
अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल में इन्हीं सुराखों के जरिए दोषियों को सजा देने का प्रावधान था। अलाउद्दीन खिलजी काफी क्रुर शासक था जो अपने खिलाफ उठने वाली हर आवाज को कुचल देने में विश्वास करता था। संजय लीला भंसाली की फिल्म 'पद्मावत' में रणवीर सिंह के किरदार अलाउद्दीन खिलजी को जितना क्रुर दिखाया गया था, वास्तव में अलाउद्दीन खिलजी उससे कई गुना ज्यादा क्रुर था।
क्यों बनाया गया था चोर मीनार

चोर मीनार को बनाने का उद्देश्य अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल में दोषियों को सजा देना था। लेकिन जब सजा अलाउद्दीन खिलजी दे रहा हो, तो उसमें रहम की गुंजाइश कैसे हो सकती है। दरअसल, अलाउद्दीन दोषियों के सिर काटकर चोर मीनार की दिवारों में बने 225 सुराखों से लटका देता था, ताकि लोग उसे देख सकें। उसके साम्राज्य में चोरी, हेरा-फेरी से लेकर ऐसे व्यक्ति जो उसके शासन को चुनौती देता हो, सबके लिए यही सजा का प्रावधान था। इतिहासकारों का यह भी मानना है कि अलाउद्दीन ने चोर मीनार का निर्माण मुख्य रूप से मंगोल आक्रमणकारियों को सजा देने के लिए करवाया था। अलाउद्दीन को कई बार मंगोल आक्रमणकारियों से जुझना पड़ा है।
अलाउद्दीन की क्रुरता के किस्से इतिहास के पन्नों में दर्ज
अलाउद्दीन खिलजी की क्रुरता के किस्से इतिहास के पन्नों में दर्ज हैं। अलाउद्दीन ने अपने परिवार तक को नहीं बख्शा था। वह अपने चाचा की हत्या करने के बाद ही दिल्ली के तख्त पर बैठ सका था। उसने अपने भतिजों को भी नहीं छोड़ा था। उनकी आंखें निकलवाकर उसने उनका सिर कलम करवा दिया और चोर मीनार पर ही टंगवा दिया था।

अलाउद्दीन खिलजी के पास विशाल सेना थी लेकिन उन्हें कम वेतन देना पड़े, इसलिए वह बाजार को नियंत्रित करता था। बाजार में ना तो कालाबाजारी होने देता और ना ही किसी भी दुकानदार या व्यवसायी को सामानों का मूल्य बढ़ाने देता था। यहां तक की अकाल पड़ने के बावजूद उसने बाजार पर अपना नियंत्रण बनाए रखा।
हॉन्टेड मानते हैं यह जगह
चोर मीनार दिल्ली के हौज खास इलाके में है। हौज खास इलाके में घूमने आने वाले लोग इस मीनार के पास तो जाते हैं लेकिन मीनार परिसर में प्रवेश नहीं करते हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह मीनार हॉन्टेड है। मीनार के आसपास नेगेटिव वाइब्स आती हैं। मीनार के पास एक पार्क है, जहां लोग बैठकर दूर से ही इस मीनार के साथ अपनी फोटो क्लीक करवाते हैं।
कैसे पहुंचे चोर मीनार
चोर मीनार दिल्ली के हौज खास इलाके में है। मेट्रो के येलो लाइन पर यह ग्रीन पार्क मेट्रो स्टेशन के पास है। मेट्रो स्टेशन से ऑटो में आप चोर मीनार पहुंच सकते हैं। अगली बार जब भी आप चोर मीनार जाएं तो हमें जरूर बताएं कि क्या आपने भी वहां पर कोई नेगेटिव वाइब्स महसूस किया या फिर यह सिर्फ अफवाह है।
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