लाल-लाल चमकती आंखें, रह-रह कर हिलती पुंछ और चिंघाड़ ऐसी कि कोई भी इंसान अंदर तक कांप जाए। ऐसे किसी डायनासोर के साथ सेल्फी लेना चाहेंगे? अरे भई हम मजाक नहीं कर रहे हैं। लेकिन जरा रूकिए...धरती पर कोई भी डायनासोर अब जिंदा नहीं बचा है और ना ही किसी अंडे से डायनासोर के बच्चे को निकालने में वैज्ञानिकों ने कोई सफलता ही प्राप्त की है। तो फिर इस पार्क में इतने डायनासोर आएंगे कैसे?

दरअसल, दिल्ली के सराय काले खान पार्क में देश का पहला डायनासोर पार्क तैयार किया जाएगा। इस पार्क में एक या दो नहीं बल्कि पूरे 40 डायनासोर खुला घुमने वाले हैं।
वेस्ट टू आर्ट का है नमूना
पिछले कई समय से दिल्ली में वेस्ट टू आर्ट के कई नमूने पेश किये जा चुके हैं जिनमें 7 वंडर पार्क भी शामिल है। ठीक उसी तर्ज पर दिल्ली के सराय काले खान पार्क में डायनासोर की थीम पर डायनासोर पार्क बनाया जा रहा है। पार्क में सिर्फ कबाड़ से ही विभिन्न प्रजातियों के डायनासोर के मॉडल तैयार किये गये हैं।

मिली जानकारी के अनुसार पार्क को बनाने का काम करीब 80% पूरा हो चुका है। दावा किया जा रहा है कि यह पार्क पूरे भारत में अपनी तरह का पहला पार्क होगा। 3.5 एकड़ के क्षेत्र में तैयार हो रहे इस पार्क में लगभग 15 प्रजातियों के अलग-अलग डायनासोर के मॉडल बनाए जा रहे हैं।
कितनी आयी लागत
दिल्ली के सराय काले खान पार्क में बन रहे डायनासोर थीम पार्क में डायनासोर के मॉडल्स को बनाने में लगभग 250-300 टन कबाड़ का इस्तेमाल किया गया है। इसमें धातु, टायर, कार और कृषि यंत्रों के पार्ट-पुर्जे आदि का इस्तेमाल किया गया है। सभी डायनासोर को ऐसे बनाया जा रहा है कि दिखने में वे बिल्कुल जिंदा लगे। इस पार्क को बनाने में लगभग 13.72 करोड़ रूपए की लागत आयी है।

पूरे पार्क को सिर्फ डायनासोर ही नहीं बल्कि और भी दूसरे तरह के लाइट्स से सजाया जाएगा। पूरे पार्क को सजाने और डायनासोर के मॉडल्स को तैयार करने में कुल 8 कलाकार और 60 से अधिक कर्मचारियों ने दिन-रात मेहनत की है। कबाड़ से बने डायनासोर को जंग से बचाने के लिए उन पर पीयू कोटिंग की जा रही है। इससे ये वाटर प्रूफ हो जाएंगे। इसके अलावा ताड़ के पत्तों से बने डायनासोर के ऊपर विशेष रसायनिक लेप लगाया गया है, जिससे ये सालों साल ऐसे ही बने रहेंगे।
किस-किस प्रजाति के डायनासोर मिलेंगे

- कोयरोफायसीस
- ब्रॉन्टोसॉरस
- वेलोकीरैप्टर
- सिन्टॉसॉरस
- डायनोसॉकस
- डायनोनायकस
- राजासॉरस
- प्रेनोसेपहल
- एंक्लोसॉरस
- ट्रिसेराटॉप्स
- अमरगासॉरस
- स्पाइनोसॉर
- टाइरैनोसॉर
- डिप्लोडोकस
- स्टैगोसॉरस
कब खुलेगा यह पार्क

मिली जानकारी के अनुसार डायनासोर पार्क में जितना काम अभी बाकी है उसे पूरा करने में करीब 2 हफ्तों का समय और लग सकता है। इसलिए संभावना जतायी जा रही है 25 दिसंबर से इस पार्क को आम लोगों के लिए खोल दिया जाएगा। हालांकि इसकी अभी तक आधिकारिक रूप से कोई पुष्टि नहीं हो सकी है। पार्क में रेस्तरां के साथ ही बैठने की सुविधा भी होगी।
संभावना जतायी जा रही है कि वेद वन की तरह ही दिल्ली का डायनासोर पार्क भी लोगों को खूब आकर्षित करेगा। हालांकि अभी तक पार्क में एंट्री टिकट की कीमत का निर्धारण नहीं किया गया है लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पार्क की एंट्री फीस 100 रूपए हो सकती है।
पूरा फिल्मी होगा यह पार्क

डायनासोर पार्क में कुल डायनासोर के मॉडल रखे जाएंगे जिनमें से 24 छोटे और 16 बड़े होंगे। सबसे बड़ा डिप्लोडोकस डायनासोर हो जिसकी ऊंचाई 60 फुट, लंबाई 71 फुट और चौड़ाई 13 फुट होगी। खास बात है कि इस डायनासोर के पेट में पार्टी करने की जगह भी होगी। है न मजेदार बात। इसे सीधे पार्क की कैंटीन से जोड़ा जाएगा।
बच्चों के पसंदीदा टी-रेक्स कैरेक्टर वाले डायनासोर यहां बनाएं जाएंगे, जिनके मुंह से आग निकलेगी और पूंछ भी हिलेगी। सबसे महत्वपूर्ण बात है कि इस पार्क को तैयार करने के लिए एक भी पेड़ काटा नहीं गया है बल्कि फिल्मी वातावरण तैयार करने के लिए और भी पेड़ों व झाड़ियों को उगाया जा रहा है।

इस थीम पार्क को बच्चों की पसंद को ध्यान में रखते हुए ही खासतौर पर डिजाइन किया जा रहा है। पूरे जगह का वातावरण कुछ ऐसा होगा जैसे लगेगा कि आप किसी घने जंगल में मौजूद हैं। डायनासोर के चारों ओर घने पेड़ बनाए जा रहे हैं। लाइटिंग इफेक्ट के लिए जमीन के नीचे से वायरिंग की गई है। लाइटिंग कंट्रोल सिस्टम से अचानक अंधेरा हो जाएगा, रंगीन लाइट जल उठेगी और कभी डायनासोर की आंख से रंगीन लेजर लाइट निकलने लगेगी।



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