दिल्ली दिलवालों की नगरी कहलाती है। राष्ट्रीय राजधानी होने की वजह से दिल्ली में प्रशासनिक भवनों की कोई कमी नहीं है और हर भवन की वास्तुकला एक से बढ़कर एक है। वहीं दूसरी तरफ मुगलों से लेकर महाभारतकाल तक दिल्ली विभिन्न घटनाओं की साक्षी रही है। इस वजह से इसका ऐतिहासिक महत्व भी काफी ज्यादा है।

सीधे-सरल शब्दों में अगर कहा जाए तो आधुनिकता के साथ बिल्कुल सही मात्रा में मिले ऐतिहासिकता की मिलीजुली खिचड़ी है दिल्ली। दिल्ली के दक्षिणी तरफ मौजूद है महरौली का आर्कियोलॉजिकल पार्क। यह न सिर्फ भारत के इतिहास बल्कि दिल्ली शहर के इतिहास की कहानी भी कहता है। सर्दियों की शाम (दोपहर) हो और परिवार के साथ कहीं घूमने का मन बन गया हो तो महरौली आर्कियोलॉजीकल पार्क बिल्कुल आदर्श जगह है।
दिल्ली में घूमने के इरादे से आने वाले किसी भी घुमक्कड़ की ट्रिप महरौली आर्कियोलॉजीकल पार्क में घूमे बिना पूरी हो ही नहीं सकती है।
क्या है महरौली आर्कियोलॉजीकल पार्क
महरौली आर्कियोलॉजीकल पार्क एक विशाल परिसर में फैला क्षेत्र है, जिसमें उन सभी राजवंशों से जुड़े स्मृति चिन्ह विराजमान हैं जो कभी न कभी दिल्ली की गद्दी पर बैठे हैं। मूल रूप से दिल्ली सल्तनत पर मुगलों का शासन स्थापित होने के बाद ही महरौली क्षेत्र का विकास हुआ था। आज भी इस क्षेत्र में कई वास्तुशिल्प के शानदार उदाहरण मौजूद हैं जिन्हें देखने के लिए पर्यटकों की भीड़ यहां जमा होती है।
महरौली आर्कियोलॉजीकल पार्क के प्रमुख आकर्षण
कुतुब मीनार

दिल्ली की पहचान कुतुब मीनार महरौली इलाके में ही स्थित है। 13वीं शताब्दी में इस मीनार का निर्माण कुतुबुद्दीन-ऐबक ने शुरू किया था। कुतुबुद्दीन ऐबक ही दिल्ली सल्तनत का संस्थापक भी कहलाता है। यह ऐसी संरचना है जो आज न सिर्फ दिल्ली बल्कि भारत की पहचान के तौर पर भी प्रसिद्ध है। यह यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज साइट की लिस्ट में भी शामिल है।
कुवतुल-इस्लाम मस्जिद
कुतूब मीनार से सटा ही कुवतुल-इस्लाम मस्जिद भी मौजूद है, जो भारत में बने सबसे पुराने मस्जिदों में से एक है। इस मस्जिद की वास्तुकला हिंदू-इस्लामिक आर्टिकेचर से प्रेरित है। कुतूब मीनार आने वाला हर पर्यटक एक बार इस मस्जिद में जरूर घूमने जाता है।
लौह स्तंभ

महरौली आर्कियोलॉजिकल पार्क का लौह स्तंभ एक अजूबा ही है। हजारों सालों से खुली हवा, पानी, धुप में रहने के बावजूद इस लौह स्तंभ पर जंग का कोई नामो निशान तक नहीं है। स्तंभ पर गुप्त राजवंश के सम्राट चंद्रगुप्त द्वीतिय के सम्मान में संस्कृत में श्लोक भी खुदे हुए हैं।
मुगलों की कब्रें

महरौली आर्कियोलॉजिकल पार्क में कई मुगल शासकों की कब्रें भी हैं जिनमें बलबन का मकबरा भी शामिल है। इसके साथ ही यहां इल्तुतमिश का मकबरा भी मौजूद है। इस मकबरे की सुन्दरता ऐसी है कि हर देखने वाला बस देखता ही रह जाता है। इसके साथ ही जमाली कमाली मस्जिद की जटिल संरचनाएं और उनकी शानदार वास्तुकला भी पर्यटकों को यहां आकर्षित करती है। अगर इस जगह को दिल्ली में मुगल विरासत या उनकी यादों का खजाना कहा जाए, तो यह कहना बिल्कुल गलत नहीं होगा।

महरौली आर्कियोलॉजिकल पार्क सालभर सैलानियों के लिए खुला रहता है। जो लोग इस ऐतिहासिक जगह के महत्व को गहराई से समझना चाहते हैं उनके लिए यहां टूर गाईड की सुविधा भी उपलब्ध है। अगर आप कभी भी दिल्ली आते हैं तो महरौली आर्कियोलॉजिकल पार्क में घूमना बिल्कुल मत भूलिए। सर्दियों में धूप का आनंद उठाते हुए इतिहास की गलियों में घूमने की परफेक्ट जगह है दिल्ली का महरौली आर्कियोलॉजिकल पार्क।



Click it and Unblock the Notifications














