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सिर्फ अग्रसेन की बावली ही नहीं, वीकेंड पर घूम आएं दिल्ली की दूसरी बावलियां

ऐतिहासिक शहर दिल्ली में देखने के लिए काफी कुछ है। किले, स्मारक, संग्रहालय और बावलियां। दिल्ली में मुख्य रूप से अग्रसेन की बावली ही सबसे फेमस बतायी जाती है, जो एक संरक्षित इमारत है। इस बावली के साथ कई तरह की कहानियां भी जुड़ी हुई है। लेकिन यहां घूमने आने वाले लोगों की संख्या में कोई कमी नहीं होती है। दिल्ली में अग्रसेन की बावली के अलावा और भी कई बावलियां हैं, जहां आप वीकेंड पर परिवार के साथ घूम सकते हैं।

baoli

दिल्ली की बावलियों के बारे में बताने से पहले आपको बता दें, बावली होती क्या है! बावलियां कुओं की तरह ही होते हैं। एक कुआं और बावली में फर्क बस इतना होता है कि बावली में सीढ़ियां होती हैं, जिनसे होकर पानी लेने के लिए नीचे उतरा जा सकता है। दरअसल, बावली बनाते समय पहले विशाल और गहरी खाई खोदी जाती है। फिर पत्थर की दीवार और सीढ़ियां बना दी जाती हैं। बावलियों में दो रास्ते होते हैं, पहला जहां से पानी आता है और दूसरा पानी लेने के लिए जहां से सीढ़ियों की मदद से नीचे उतरा जाता है।

Step well

पानी की सतह नीचे चले जाने पर सीढ़ियों से होकर नीचे उतरकर पानी भरा जाता था। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश में इन्हें बावली कहा जाता है जबकि राजस्थान में ये बावड़ी कहलाते हैं। बावलियों का निर्माण हजारों सालों से किया जाता रहा है। बावलियों की देहाती और सुन्दर वास्तुकला लोगों को चौंकाती हैं।

अब आपको दिल्ली में मौजूद बावलियों के बारे में बताते हैं :

दिल्ली में कई बावलियां मौजूद हैं

1. अग्रसेन की बावली हेली रोड, कनॉट प्लेस
2. हजरत निजामुद्दीन की बावली निजामुद्दीन वेस्ट
3. पुराना किला बावली मथुरा रोड (चिड़ियाघर के पास)
4. तुगलकाबाद किला बावलियां तुगलकाबाद किला (दो बावलियां)
5. लाल किला बावली नेताजी सुभाष रोड, चांदनी चौक
6. राजों की बावली मेहरौली
7. गंधक की बावली मेहरौली आर्कियोलॉजिकल पार्क के पास
8. फिरोज शाह कोटला बावली मथुरा रोड

दिल्ली के कुछ प्रमुख बावलियों के बारे में विस्तार से बताते हैं :

अग्रसेन की बावली

दिल्ली में मौजूद सभी बावलियों में सबसे फेमस अग्रसेन की बावली है। हालांकि इस बावली का निर्माण किसने और कब करवाया था, इस बारे में कोई स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं है। लेकिन दावा किया जाता है कि इस बावली का निर्माण महाभारतकाल में महान महाराजा अग्रसेन ने करवाया था। बताया जाता है कि भीषण गर्मी से राहत देने के लिए खास तौर पर महिलाओं के लिए इस बावली का निर्माण किया गया था।

agrasen ki baoli

यहां 100 से अधिक सीढ़ियां हैं, जो आपको जलस्तर तक ले जाती हैं। नीचे उतरने के साथ-साथ तापमान में भी बदलाव महसूस होता है। दिल्ली के सबसे अधिक Haunted जगहों में अग्रसेन की बावली का नाम आता है। कहा जाता है कि इस बावली के पानी में कुछ ऐसा था, जो लोगों को इसमें डूबकर आत्महत्या करने के लिए बाधित करता था।

हजरत निजामुद्दीन की बावली

700 सालों से ज्यादा समय पहले हजरत निजामुद्दीन के शागिर्द फौजा नसीरुद्दीन ने इस बावली का निर्माण करवाया था। जिस समय इस बावली का निर्माण करवाया गया था, उस समय दिल्ली के सुल्तान गयासुद्दीन तुगलक, तुगलकाबाद में किले का निर्माण करवा रहे थे। जो मजदूर दिन में किला बनाते वहीं मजदूर रात को बावली का निर्माण करते। इससे चिढ़कर सुल्तान ने ग्यासपुर में तेल की बिक्री पर पाबंदी लगवा दी ताकि रात को अंधेरे में खुदाई का काम नहीं हो सकें।

hazrat nizamuddin ki baoli

लेकिन निजामुद्दीन औलिया ने नसीरुद्दीन से पानी से चिराग चलाने का आदेश दिया और चिराग जल भी गये। इसके बाद ही नसीरुद्दीन को हजरत निजामुद्दीन औलिया ने चिराग-ए-दिल्ली के खिताब से नवाजा था। बावली की सफाई करने वाले मजदूरों का कहना है कि इस बावली में पानी के कुल 7 स्रोत हैं, जिनसे पानी निकलता है।

गंधक की बावली

गंधक की बावली के पानी में प्रचुर मात्रा में गंधक होने की वजह से ही इसे यह नाम मिला था। इतिहासकारों का मानना है कि गंधक की बावली का निर्माण गुलाम वंश के सुल्तान इल्तुतमिश के शासनकाल में किया गया था। बताया जाता है कि इस बावली में 5 मंजीलें हैं। दिल्ली के इतिहास में उल्लेख किया गया है कि लोग अपनी त्वचा के रोगों का इलाज करने के लिए इस बावली में नहाते और बोतल में इस बावली का पानी भरकर घर ले जाते थे।

gandhak ki baoli

पानी के स्तर तक पहुंचने के लिए बावली में 105 सीढ़ियां उतरनी पड़ती है। कहा जाता है कि 1975 को गंधक की बावली सूख गयी थी लेकिन बाद में साफ-सफाई और जल संचयन पर ध्यान देने की वजह से बावली में फिर से पानी भरा।

लाल किला की बावली

लाल किला की बावली का निर्माण राजा अनंगपाल तोमर द्वितीय द्वारा करवाया गया था। दो मंजीला इस बावली का निर्माण बड़े-बड़े पत्थरों से किया गया है। बावली के दोनों तरफ चबुतरे के बाद कई कमरे हैं, जहां संभवतः उस समय महिलाएं गर्मी के दिनों में ठंड महसूस करने के लिए विश्राम किया करती थी।

lal qila ki baoli

कहा जाता है कि इस बावली का निर्माण करीब 1000 साल पहले किया गया था। कहा जाता है कि जब देश में आजादी की लड़ाई शुरू हुई थी, तब अंग्रेज अधिकारी क्रांतिकारियों को इस बावली के कमरों में कैद करके रखते थे। इस बावली की दीवार पर आपको कई जगह बेड़ियां लगी दिख जाएंगी, जिनसे क्रांतिकारियों को जकड़ा जाता था।

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