सबने अपने स्कूल के दिनों में इतिहास के विषय में सिंधु घाटी सभ्यता के बारे में पढ़ा ही होगा। भले ही आपको उस समय इतिहास का विषय पसंद नहीं हो पर सिंधु घाटी सभ्यता के बारे में जानकार मज़ा तो आया ही होगा। सच में यह सबसे दिलचस्प स्थान है जो भारत के उत्तर पूर्वी भाग में पाया गया।
चलिए आज हम इस लेख के जरिए चलते हैं सिंधु घाटी सभ्यता के सबसे प्रसिद्ध शहर में। यह हड़प्पन शहर तब के ज़माने का प्रमुख केंद्र हुआ करता था। धौलावीर, कच्छ का खोद कर निकाला गया स्थान है जो हर बार पर्यटकों का ध्यान अपनी ओर खींचता है।

धौलावीर
Image Courtesy: Rahul Zota
धौलावीर पुरातात्विक स्थान, कच्छ के एक छोटे से द्वीप खादिर बेट द्वीप में बसा है। और दिलचस्प बात यह है कि खादिर एक मॉनसून द्वीप है। यह द्वीप मॉनसून के मौसम में चारों तरफ से समुद्र के पानी से घिरा होता है और बाकी दिनों में सफेद बालू से।
धौलावीर, कच्छ मरुस्थलीय वन्यजीव अभ्यारण्य का भी एक भाग है और यह हड़प्पा संस्कृति के 5 प्रमुख शहरों में से एक है।

धौलावीर के पास बसे गाँव
Image Courtesy: Travelling Slacker
धौलावीर में देखने लायक चीज़ें
धौलावीर में कई सारी चीज़ें देखने के लिए हैं और वहाँ के बचे हुए खंडहर जिनसे आपको उनकी संस्कृति के बारे में पता चलेगा, आपको हर बार हैरान करेंगे। आपके लिए अच्छा होगा कि आप किसी गाइड के साथ वहाँ जाएँ जिससे आपको उस जगह को और अच्छे से समझने का मौका मिलेगा। अन्यथा आपको यह जगह बस एक खंडहर ही प्रतीत होगा और आप वहाँ शायद बोर हो जाएँ।

धौलावीर में बनी पानी की टंकी
Image Courtesy: Travelling Slacker
सबसे पहले आप इस पौराणिक स्थल के सामने ही एक छोटा सा संग्रहालय है, उसकी सैर पर जाएँ। इस संग्रहालय में अपको इस शहर नियोजन के बारे में और इसकी विशेषताओं के बारे में पता चलेगा। अगर आप इतिहास के बारे में और जानना चाहते हैं, तो इस यात्रा के बाद आपके इतिहास के बारे में जानकारी और बढ़ जाएगी इसलिए निकल पड़िए इस हड़प्पन शहर की ओर।

धौलावीर का खंडहर
Image Courtesy: Travelling Slacker
यहाँ एक बड़ा सा बोर्ड, हड़प्पन भाषा के शिलालेख के साथ आपका इंतज़ार करता हुआ मिलेगा। हालाँकि इस शिलालेख पर लिखे हुए भाषा को अब तक पढ़ा नहीं जा सका है पर यह सिंधु घाटी सभ्यता के भाषाई ज्ञान को बखूबी दर्शाता है।

धौलावीर
Image Courtesy: Nagarjun Kandukuru
धौलावीर का एक दिलचस्प तथ्य यह है कि यह उस समय मुहर बनाने वाला प्रमुख शहर हुआ करता था। कुछ मुहर बनाए जाने वाले कार्यशालाओं में हड़प्पन शिलालेखों के साथ कुछ मुहरों के निशान, और जानवरों के चित्र पाए गये हैं। यह शहर जल नियोजन प्रणाली जैसे उत्तम कार्य के लिए भी मशहूर था जो कांस्य युग में भी वास्तुकला की उत्तम प्रतिभा को दर्शाता है।

धौलावीर
Image Courtesy: Travelling Slacker
अन्य शहरों के विपरीत जैसे मोहनजोदाड़ो, धौलावीरा की इमारतों को पत्थरों से बनाया गया था। अन्य शहरों की वास्तुकला ईंटों की है। यहाँ खुदाई के वक़्त कई कब्रिस्तानों की भी खोज हुई है पर कोई मानव कंकाल यहाँ नहीं पाए गये। यहाँ की वास्तुकला के अलावा, कई मिट्टी के बर्तन, घड़े, कांस्य के हथोड़े, धातुओं के कई अभाषुण आदि पाए गये हैं।

धौलावीर में लगा सूचना बोर्ड
Image Courtesy: Travelling Slacker
थोड़ा विचित्र पर फिर भी आकर्षक यह धौलवीरा शहर आपको पुरानी सभ्यता की झलक से रूबरू करता है और मानव जाति की प्रगतिशील समय के चिन्हों को दर्शाता है।
हम आज के ज़माने में यह सोचते हैं कि विज्ञान ही सबसे सही और उचित है। पर आप जब इन पुरातत्व शहरों की ओर देखेंगे जो हज़ारों सालों से अपनी सभ्यता के होने के चिन्ह को बखूबी दर्शाते हैं, तो आप एक दूसरे तरीके से भी सोचने पर मजबूर हो जाएँगे। तो अगली बार आप जब भी गुजरात के कच्छ की यात्रा पर जाएँ, इस पुरातत्व शहर के दर्शन करना ना भूलें।

धौलावीर में हड़प्पन संस्कृति के अवशेष
Image Courtesy: Rahul Zota
धौलावीर पहुँचें कैसे?
धौलावीर भुज से लगभग 220 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। आपके लिए सबसे बेहतर होगा कि अप कोई निजी गाड़ी बुक कराकर यहाँ तक की सैर करें।

धौलावीर में पक्षियों का समूह
Image Courtesy: Rahul Ajmera
आप यहाँ कच्छ के ग्रामीण परिदृश्य का भी मज़ा ले सकेंगे। धौलावीर के समीप ही बसे गाँवों की यात्रा करना बिल्कुल भी ना भूलें।
अपने महत्वपूर्ण सुझाव व अनुभव नीचे व्यक्त करें।
Read in English: Dholavira: Enter The World of Harappan Civilization
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