कोलकाता में हर साल दुर्गापूजा पर अलग-अलग थीम पर पंडाल बनाए जाते हैं जिसमें कई बार सामाजिक मुद्दे और ट्रेंड भी शामिल होते हैं। ऐसे में चंद्रयान 3 की सफलता का जश्न ना मनाया जाए, ऐसा कैसे हो सकता है। इस वजह से कई पूजा कमेटियों ने चंद्रयान 3 की थीम पर पूजा पंडाल तैयार करने का फैसला लिया है।

कोलकाता और बंगाल की रेल नगरी चित्तरंजन में की पूजा कमेटियों ने इस बार चंद्रयान 3 की थीम पर पूजा पंडाल तैयार करने की घोषणा की है।
पहले राजधानी कोलकाता के पूजा पंडाल के बारे में बताते हैं :
हाल ही में महानगर के विधाननगर इलाके में स्थित बीजी ब्लॉक रेजिडेंट्स एसोसिएशन की खूंटी पूजा आयोजित की गयी। इसी पूजा के दौरान क्लब ने चंद्रयान 3 की थीम पर पूजा पंडाल बनाने की घोषणा की है। मिली जानकारी के अनुसार पूजा पंडाल को किसी पुराने घर के तर्ज पर तैयार किया जाएगा। लेकिन देवी दुर्गा की प्रतिमा चंद्रयान 3 के लैंडर विक्रम पर बैठी नजर आएंगी।

खूंटी पूजा के मौके पर लैंडर विक्रम का मॉडल को ड्रोन की मदद से हवा में उड़ाकर चांद के दक्षिणी ध्रुव पर भारत के पहले कदम पड़ने और चंद्रयान 3 की सफल लैंडिंग का जश्न मनाया। बताया जाता है कि इस दुर्गा पूजा पंडाल का उद्घाटन इसरो के एक वैज्ञानिक, जो चंद्रयान 3 की टीम में शामिल हैं, के पिता के हाथों होगा।
बता दें, विधाननगर में होने वाली यह पूजा 62 साल पुरानी है और पूजा कमेटी की पूजा 39 साल पुरानी।
रेलनगरी में भी चंद्रयान की धूम
दूसरी तरफ बंगाल की रेल नगरी चित्तरंजन भी इन दिनों चंद्रयान 3 की सफलता की खुशियां मना रही है। चित्तरंजन के सिमजुरी सार्वजनिक पूजा कमेटी ने अपने पंडाल के लिए यह थीम चुना है। बताया जाता है कि पूजा पंडाल का निर्माण बेकार पड़े सामानों से किया जाएगा। पूजा कमेटी ने पंडाल तैयार करने का काम भी शुरू कर दिया है। मिली जानकारी के अनुसार इस पूजा पंडाल में करीब 60 फीट ऊंचा चंद्रयान 3 का रॉकेट लॉन्चर बनाया जाएगा जिसमें भारत के मून मिशन से जुड़ी सभी पहलुओं को काफी बारिकी के साथ दर्शाया जाएगा।

पूजा कमेटी का दावा है कि उन्होंने चंद्रयान 3 की सफलता से पहले ही इस थीम को चुन लिया था। पूजा पंडाल बनाने की जिम्मेदारी शांतिनिकेतन के एक कलाकार को दी गयी है। चंद्रयान 3 की सफलता के बाद पंडाल की साज-सजावट में हल्के-फुल्के बदलाव किये जाएंगे।
बता दें, पूजा पंडाल बनाने की प्रक्रिया शुरू करने से पहले शुभ मुहूर्त पर केवल एक बांस को खूंटी की तरह गाड़कर उसकी विधिवत पूजा की जाती है। खूंटी पूजा संपन्न होने के बाद ही उस स्थान पर पूजा पंडाल का निर्माण कार्य शुरू होता है। पुरी में जगन्नाथ रथ यात्रा के दिन से ही पश्चिम बंगाल में विभिन्न पूजा पंडाल खूंटी पूजा करना शुरू कर देते हैं।



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