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सिक्किम के बारे में ये बातें शायद ही सुनी होंगी आपने....

Written By: Goldi

पूर्वोत्तर भारत में सिक्किम एक बेहद ही खूबसूरत राज्य है..जोकि चारों और खूबसूरत पहाड़ो घिरा हुआ है। नदियां, झीलें, बौद्ध मठ और स्तूप तथा हिमालय के बेहद लुभावने दृश्यों को देखने के अनेक स्थान, ये सभी हर प्रकृति प्रेमी को बाहें फैलाए आमंत्रित करते हैं।

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विश्व की तीसरी सबसे ऊंची पर्वतचोटी कंचनजंगा (28156 फुट) यहां की सुंदरता में चार चांद लगाती है। सूर्य की सुनहली किरणों की आभा में नई-नवेली दुलहन की तरह दिखने वाली इस चोटी के हर क्षण बदलते मोहक दृश्य सुंदरता की नई-नई परिभाषाएं गढ़ते हुए से लगते हैं।

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सिक्किम को भारत के सुन्दर शहरों में से एक माना जाता है और प्रकृति के वरदान से भरी यह जादुई जगह हिमालय पर्वत क्षेत्र में स्थित है। ऐसी कई जगहों में यह जगह भी कई महत्वपूर्ण स्थानों के लिए मशहूर है और यह कहा जाता है कि अपने जीवनकाल में आप यहाँ नहीं गए तो आपने कुछ खोया है।आइये इस अज्ञात पहाड़ी वाले भारतीय राज्य के बारे में कुछ जानें।

सिक्किम भारत का हिस्सा कब बना

सिक्किम भारत का हिस्सा कब बना

सन 1947 को भारत अंग्रेजो से आजादी मिली..हालांकि भारत में कई ऐसे राज्य है जोकि आजादी के बने..जिनमे सिक्किम भी है। सिक्किम भारत का हिस्सा सन 1975 में बना।PC:Anuj Kumar Pradhan

अंतर्राष्ट्रीय पुष्प महोत्सव

अंतर्राष्ट्रीय पुष्प महोत्सव

सिक्किम में हर साल मार्च से मई माह के बीच अंतर्राष्ट्रीय पुष्प महोत्सव का आयोजन होता है। इस छोटे से राज्य में 600 तरह के पुष्प मिलते हैं, जो 240 तरह के पेड़-पौधे। सिक्किम प्राकृतिक रूप से भारत के सबसे समृद्ध राज्यों में आती है।

नेपाली मूल के लोगों की बहुतायत

नेपाली मूल के लोगों की बहुतायत

सिक्किम भारत के खूबसूरत राज्यों में से एक है..यह भारत भारत का एकमात्र ऐसा राज्य है, जहां के स्थानीय लोग अलग देश के मूल निवासी हैं। जी हां, सिक्किम में रहने वाले अधिकतर लोग नेपाली मूल के हैं।

PC:Carsten.nebel

पक्षियों का स्वर्ग

पक्षियों का स्वर्ग

जिस तरह आप सिक्किम में प्राकृतिक खूबसूरती को निहार सकते हैं..ठीक उसी प्रकार आप यहां पक्षियों की विभिन्न प्रजाति भी देख सकते हैं..इसमें कोई शक नही कि सिक्किम पक्षियों के लिए स्वर्ग की तरह है। सिक्किम में पक्षियों की 552 प्रजातियां मिलती हैं, जो कीट-पतंगों की 690 प्रजातियां। वहीं हिमालयन गिद्ध अपने अनोखी पहचान रखते हैं।

PC: Dibyendu Ash

भूम चू

भूम चू

जिस तरह उत्तर भारत में गंगा एक पवित्र नदी मानी जाती है, ठीक वैसे ही सिक्किम में भूम चू पवित्र जल है, जिससे लोगों को पवित्र किया जाता है। ताशिदिंग बौद्ध मठ में भूम चू द्वारा लोगों को पवित्र किया जाता है। ये यहां की पुरानी परंपरा है।

चांग

चांग

चांग यहां का स्थानीय मद्य है। जो खास मौके पर पिया जाता है। ये शराब बांस से बनती है।

नेचुरल स्पॉ

नेचुरल स्पॉ

सिक्किम में हमेशा तापमान काफी कम रहता है..बावजूद यहां गर्म पानी के स्रोतों की बहुतायत है। जिसमें आप नहाकर खुद को तरोताजा कर सकते हैं। जो सिक्किम हमेशा ठंडा रहता है, वहां ये बड़े राहत की बात है।

थंका पेंटिंग

थंका पेंटिंग

थंका पेंटिंग सिक्किम की स्थानीय कला है, जो बौद्ध संस्कृति से जुड़ी हुई है। इसमें बुराइयों पर अच्छाइयों की जीत को दर्शाया जाता है।

रुमटेक बौद्ध मठ

रुमटेक बौद्ध मठ

गंगटोक से 23 किमी दूर रुमटेक में शानदार बौद्ध मठ है। जहां ग्यालवा करमापा की प्रतिमा स्थापित है।PC: wikimedia.org

धार्मिक स्थलों का मंत्रालय

धार्मिक स्थलों का मंत्रालय

सिक्किम भारता का एकमात्र राज्य है, जहां मंदिर, मस्जिद, चर्च और गुरुद्वारों की देखरेख एक अलग ही मंत्रालय करती है। लगभग 200 धार्मिक स्थलों के रखरखाव का जिम्मा इसी मंत्रालय पर है।PC:Ambuj.Saxena

बाबा हरभजन सिंह का मंदिर

बाबा हरभजन सिंह का मंदिर

बाबा हरभजन सिंह कोई भगवान नहीं बल्कि इन्सान है, बाबा हरभजन को नाथुला के हीरो के नाम से जाना जाता है, जिन्होंने अपनी जान की बाजी लगातर चीनियों को रोके रखा और काफी सैनिकों की जान बचाई।

PC: Indrajit Das

सिद्धेश्वर धाम

सिद्धेश्वर धाम

सिद्धेश्वर धाम भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से है। यह मंदिर नामची के नजदीक सोलोफोक पहाड़ी पर स्थित है। इस मंदिर में भगवान शिव की 108 फिट लंबी प्रतिमा है। ये मंदिर सिक्किम के प्रमुख पर्यटन केंद्रों में से है।

भाषा

भाषा

नेपाली भाषा सिक्किम में बहुतायत में बोली जाती है।वहीं आधिकारिक भाषा अंग्रेजी है। सिक्किम में कई स्थानीय भाषाएं बोली जाती हैं। हिंदी बोलने वाले भी सिक्किम में काफी लोग हैं।PC:Indrajit Das

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