अपनी अलौकिक खुबसूरती की वजह से लद्दाख को भारत का मुकुट कहा जाता है। ऊंची पहाड़ियां, झील और दर्रों से घिरे लद्दाख तक मोटरसाइकिल से आने का सपना लगभग हर युवा देखता है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी बाइक पर लद्दाख आने से खुद को नहीं रोक सकें। पिछले दिनों उन्हें लद्दाख में अलग-अलग जगहों पर बाइक पर घुमते हुए देखा गया था। लद्दाख सिर्फ ऊंची पहाड़ियों से ही नहीं घिरा हुआ है।

यहां भारत का एकमात्र ठंडा सफेद रेगिस्तान हैं, तो खारदुंग ला पास पर पर्पल माउंटेन भी है। आज हम जिस लद्दाख के जिस पास की बात कर रहे हैं, वह 'फोतु ला पास'। सफेद ठंडे रेगिस्तान के बीच में अगर स्याह सी काली पहाड़ियां और काली चट्टानों वाला रेगिस्तान देखना है तो आपको 'फोतु ला पास' जरूर आना चाहिए।
लद्दाख का फोतु ला पास लेह शहर को जम्मु और कश्मीर की राजधानी श्रीनगर से जोड़ता है। हिमालयी पर्वतों का यह पहाड़ी दर्रा लेह से श्रीनगर को जोड़ने वाली राष्ट्रीय राजमार्ग 1 पर स्थित है। यह पास 13,478 फीट की ऊंचाई पर मौजूद है जो लद्दाख के प्रसिद्ध जोजि ला पास से भी अधिक ऊंचा है। श्रीनगर से जब आप लेह की तरफ आगे बढ़ते हैं तो रास्ते में गहरे काली रंग की पहाड़ियां मिलती हैं।

आमतौर पर बर्फ से ढंका रहने वाला यह रास्ता गर्मी के मौसम में पूरा साफ नजर आता है और साथ में दिखाई देते हैं ये शानदार Black Mountains भी। यानी लेह-लद्दाख में प्रवेश के दो रास्ते, पहला श्रीनगर से फोतु ला पास होकर। अगर आप इस तरफ से सड़क मार्ग से आते हैं तो आपको लद्दाख के Black Mountains के शानदार नजारे दिखेंगे। अगर आप दूसरा रास्ता यानी मनाली से होकर लेह में प्रवेश करते हैं तो आपको खारदुंग ला पास से होकर आना पड़ेगा, जहां आपको दिखेगा पर्पल माउंटेन।

फोतु ला पास के यात्रा टिप्स
- फोतु ला पास में चिकित्सकिय सुविधाओं का अभाव है। इसलिए वहां जाते समय अपने साथ हमेशा सेफ्टी और फर्स्ट एड किट लेकर जाएं।
- फोतु ला पास में नेटवर्क की समस्या होती है। इसलिए वहां आप ना तो ऑनलाइन वीडियो बना सकते हैं और ना ही किसी से संपर्क कर सकते हैं।
- कश्मीर में प्रवेश करने के साथ ही आपका प्री-पेड सिम कार्ड काम करना बंद कर देता है। इसलिए कश्मीर से आगे के रास्ते के लिए आपको पोस्ट-पेड सिम कार्ड का इस्तेमाल करना पड़ेगा।
- बाइक या गाड़ी से फोतु ला पास जाने पर गाड़ी या बाइक में पर्याप्त मात्रा में पेट्रोल/डिजल भरवाकर ही यात्रा पर निकलें।
- सर्दियों के समय यहां का तापमान काफी नीचे चला जाता है, खासतौर पर सूर्यास्त के बाद। बर्फबारी के कारण कई बार रास्ते भी बंद हो जाते हैं। इसलिए यहां आने का बेस्ट समय हल्की सर्दियां ही होती हैं।



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