अगर आप दिल्ली या आसपास के NCR के रहने वाले हैं और वीकेंड पर कहीं 2-3 दिनों के लिए घूमने जाने की जगह तलाश रहे हैं तो आगरा आपके लिए एक अच्छा विकल्प हो सकता है। मुगल साम्राज्य की राजधानी रहे आगरा को ताजनगरी भी कहा जाता है।
ताजमहल के अलावा आगरा में ऐसी कई और ऐतिहासिक जगहें हैं, जहां घूमें बिना आगरा की कोई भी ट्रिप अधूरी ही मानी जाएगी। हम यहां आगरा के उन सभी ऐतिहासिक जगहों और उनके महत्व का यहां जिक्र करने वाले हैं, जिन्हें अपने वीकेंड ट्रिप पर आपको जरूर शामिल करना चाहिए।

1. ताजमहल
आगरा के ताजमहल के बारे में देश क्या दुनिया भर के बच्चे-बच्चे को पता है। अपनी बेगम मुमताज महल की याद में मुगल बादशाह शाहजहां ने आगरा में यमुना नदी के किनारे सफेद संगमरमर से ताजमहल का निर्माण करवाया था। ताजमहल UNESCO की विश्व धरोहर सूची में शामिल होने के साथ ही यह दुनिया के सात अजूबों में से भी एक है। ताजमहल के तहखाने में मुमताज बेगम के साथ बादशाह शाहजहां की भी कब्र है, जिसे देखने के लिए हर साल लाखों लोग यहां आते हैं।
2. फतेहपुर सिकरी
आगरा से लगभग 37 किमी दूर मुगल बादशाह अकबर ने फतेहपुर सिकरी का निर्माण करवाया था। कहा जाता है कि अकबर एक सफल बादशाह होने के साथ-साथ कलाप्रेमी भी थे। फतेहपुर सिकरी 1571 से 1585 तक मुगल साम्राज्य की राजधानी रहा है। इस नगर को अकबर ने अपनी देखरेख में बसाया था। कहा जाता है कि जब अकबर निःसंतान थे तब उसने संत शेख सलीम चिश्ती की दरगाह पर प्रार्थना की थी।
इसके बाद उसे पुत्र संतान की प्राप्ति हुई और उससे उत्साहित बादशाह ने फतेहपुर सिकरी को अपनी राजधानी बनाने का फैसला लिया। लेकिन यहां पानी की कमी होने की वजह से मात्र 15 साल बाद ही राजधानी को आगरा स्थानांतरित कर देना पड़ा।

3. बुलंद दरवाजा
गुजरात पर विजय प्राप्त करने की खुशी में अकबर ने फतेहपुर सिकरी में बुलंद दरवाजा का निर्माण करवाया था। वर्ष 1602 में बनवाया गया यह दरवाजा आज भी विश्व का सबसे बड़ा दरवाजा माना जाता है। जमीन से इसकी ऊंचाई 280 फीट है। यह हिंदू और फारसी स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना है। लाल बलुआ पत्थर से बने इस दरवाजे के आगे और स्तंभों पर कुरान की आयतें लिखी हुई हैं।
अष्टकोणिय आकार का यह दरवाजा अकबर के खुले विचारों को दर्शाता है। दरवाजे पर बाइबल की कुछ पंक्तियां भी अंकित हैं, जो उसके धार्मिक सहिष्णुता की प्रतिक है। दरवाजे के अंदरुनी हिस्से में सफेद और काले संगमरमर से नक्काशी की गयी है। इसके बाईं ओर जामा मस्जिद और सामने शेख का मजार है। मजार तक जाने के लिए इस दरवाजे से होकर ही गुजरना पड़ता है। सुबह 8 बजे बुलंद दरवाजा खुलता है और शाम को 7 बजे बंद हो जाता है। प्रवेश शुल्क ₹50 है।
4. मीना बाजार
आगरा के मीना बाजार की शुरुआत हुमायूं के शासनकाल में हुई थी लेकिन इसे प्रसिद्ध अकबर के शासनकाल में मिली। मीना बाजार को मूल रूप से महल में रहने वाली महिलाओं के लिए ही लगाया जाता था। इस बाजार में आने वाला एकलौता पुरुष शहंशाह हुआ करता था। मीना बाजार में ही सबसे पहले शाहजहां और मुमताज महल मिले थे।
मीना बाजार से जुड़ी और भी दिलचस्प जानकारियों के लिए हमारा यह आर्टिकल जरूर पढ़ें :

5. अकबर का मकबरा
कहा जाता है कि अकबर चाहता था कि उसकी मृत्यु के बाद एक मकबरे का निर्माण किया जाए। अकबर के बेटे जहांगीर ने उसकी इस इच्छा को पूरा किया। वर्ष 1613 में अकबर के मकबरे का निर्माण किया गया। यह मकबरा आगरा से करीब 23 किमी की दूरी पर मौजूद है। कहा जाता है कि इस मकबरे को बनने में करीब 8 सालों का वक्त लगा। मकबरे में अकबर के अवशेषों को एक कब्र में दफनाया गया है। इसमें प्रवेश करने के लिए प्रति व्यक्ति ₹15 का शुल्क चुकाना पड़ता है।

6. आगरा का किला
इस्लामिक और हिन्दू वास्तुशैलियों के मिश्रण से इस किले का निर्माण किया गया है। किले में लाल बलुआ पत्थरों के साथ-साथ सफेद संगमरमरों का शानदार काम देखने को मिलता है। किले में दो मुख्य द्वार हैं, एक दिल्ली गेट और दूसरा लाहौरी गेट। लाहौरी गेट को अमर सिंह गेट भी कहा जाता है, जिसका नाम शाहजहां के एक दरबारी और राजपूत ठाकुर अमर सिंह राठौर के नाम पर रखा गया है। किला में 94 एकड़ के परिसर में महलों का निर्माण किया गया है। किला परिसर के अंदर 3 मस्जिद भी हैं।



Click it and Unblock the Notifications














