दिल्ली से प्रयागराज का सफर मात्र 7 घंटों में...जी ऐसा जल्द ही संभव होने वाला है। कैसे, अरे भई तेजी से बन रहा है लगभग 594 किमी लंबा गंगा एक्सप्रेसवे। संभावना जतायी जा रही है कि अगले साल प्रयागराज के संगमतट पर आयोजित होने वाले महाकुंभ मेले से पहले ही इसका उद्घाटन कर दिया जाएगा।
गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश सरकार की एक बहुवांछित परियोजना है, जिसके पूरा होने से दिल्ली से प्रयागराज तक का सड़क मार्ग से सफर महज 7 घंटों में पूरा किया जा सकेगा।

कब तक खुलने की है संभावना?
लगभग 594 किमी लंबा गंगा एक्सप्रेसवे, जो मेरठ के बिजौली से शुरू होता है और प्रयागराज के जुडापुर दांडु में जाकर खत्म होता है। अगर इसमें दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे को भी जोड़ लिया जाए तो दिल्ली से प्रयागराज तक यह सीधा संपर्क स्थापित करेगा।
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे और मेरठ-प्रयागराज 'गंगा' एक्सप्रेसवे के साथ दिल्ली से प्रयागराज तक का सफर मात्र 7 घंटे में पूरा किया जा सकेगा। Times of India की रिपोर्ट की मानें तो यह एक्सप्रेसवे महाकुंभ से पहले 31 दिसंबर तक खुल जाने की पूरी संभावना है।
मिली जानकारी के अनुसार राज्य सरकार ने इस एक्सप्रेसवे का निर्माण कर रही एजेंसी से दो प्रमुख ब्रिजों - मेरठ से बदायूं के बीच गंगा नदी पर 960 मीटर लंबा ब्रिज और बदायूं से हरदोई के बीच रामगंगा नदी पर 720 मीटर लंबा ब्रिज, के निर्माण में तेजी लाने के लिए कहा है।

क्या हैं गंगा एक्सप्रेसवे की खासियतें?
- 6 लेन चौड़ा
- 14 प्रमुख ब्रिज
- 7 रेलवे ओवर ब्रिज
- 32 फ्लाईओवर
- 3.5 किमी लंबी एयरस्ट्रीप, ताकि इमरजेंसी के समय शाहजहांपुर जिले के जलालाबाद इलाके में लड़ाकू विमानें उतर सकें।
कितनी है लागत?
उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल अथॉरिटी (UPEIDA) ने अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि सभी जरूरी संरचनाओं और हाई स्पीड कॉरिडोर का निर्माण डेडलाइन यानी 31 दिसंबर से पहले हो जाए। ताकि अगले साल जनवरी में प्रयागराज में आयोजित होने वाले महाकुंभ मेले के समय प्रयागराज की ओर जाने वाले वाहनों को सुविधा हो। मिली जानकारी के अनुसार गंगा एक्सप्रेसवे का निर्माण लगभग ₹36,230 की लागत से हुआ है जो 12 जिलों में संपर्क स्थापित करता है। यह परियोजना लगभग 7,453 हेक्टेयर के क्षेत्र में और 518 गांवों में फैला हुआ है।
मीडिया से बात करते हुए UPEIDA के अधिकारियों ने बताया कि एक बार पूरे स्ट्रेच का निर्माण कार्य संपन्न हो जाए, उसके बाद ही गति सीमा को निर्धारित किया जाएगा। हालांकि एक्सप्रेसवे का निर्माण कर रही एजेंसी से इसे 120 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ने वाली गाड़ियों के हिसाब से डिजाइन करने के लिए कहा गया है।

पूरे एक्सप्रेसवे का निर्माण 4 हिस्सों में बांटकर किया जा रहा है, जो निम्न हैं :
- मेरठ-बदायूं सेक्शन (129.70 किमी)
- बदायूं-हरदोई सेक्शन (151.70 किमी)
- हरदोई-उन्नाव सेक्शन (155.70 किमी)
- उन्नाव-प्रयागराज सेक्शन (156.85 किमी)
596 किमी लंबे स्ट्रेच में कुल 1481 संरचनाओं का निर्माण किया जाना है जिसमें से अब तक 1215 संरचनाओं का निर्माण संपन्न हो चुका है। दो मुख्य टोल प्लाजाओं का निर्माण मेरठ और प्रयागराज में किया जाएगा। जबकि पूरे रास्ते में 15 अन्य टोल प्लाजा का निर्माण होगा। इस एक्सप्रेसवे को लेकर आश्वस्त होते हुए UPEIDA के एक अधिकारी का कहना है कि यह एक्सप्रेसवे निश्चित रूप से पूर्व और पश्चिम उत्तर प्रदेश के बीच आवाजाही के समय को कम करने में मददगार साबित होगा।



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