दिल्ली से लेकर उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश तक...इस साल मानसून ने बस कहर ही बरपा रखा है। बारिश, बाढ़, भूस्खलन की वजह से उत्तर भारत के उन पर्यटन स्थलों पर जाने के बारे में सैलानी सोच भी नहीं पा रहे हैं जो मानसून की जान हुआ करते हैं।

कहीं जान का खतरा तो कहीं आगे बढ़ने का रास्ता ही पानी के कटाव में बह जाने की वजह से पर्यटक उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे पर्वतीय राज्यों में घूमने नहीं जा सकते हैं। लेकिन भारत ऐसा देश है जिसका हर कोना लाजवाब और हर प्रांत अपने आप में प्राकृतिक सुन्दरता का खजाना समेटे हुए हैं।
अगर आप भी इस साल मानसून में हिमाचल या उत्तराखंड की सुन्दरता को देखने नहीं जा पाने का मलाल कर रहे हैं तो एक बार जरा दक्षिण भारत का रुख करके भी देख लिजीए। यकीन मानिए, दक्षिण भारत के झरने और हरियाली आपको वहीं बांध कर रख लेंगे। आपका वहां से लौटने का दिल ही नहीं करेगा।
आपको दक्षिण भारत के कुछ लाजवाब वाटरफॉल्स के बारे में बताते हैं :
अथिराप्पिल्ली वाटरफॉल :
मानसून के समय भारत के जिन वाटरफॉल्स की सुन्दरता अपने पूरे शबाब पर होती है, उनमें केरल का अथिराप्पिल्ली वाटरफॉल भी शामिल है। 80 फीट की ऊंचाई से समानांतर धाराएं जब नीचे गिरती हैं तो ऐसा लगता है मानों झरने से पानी नहीं बल्कि दूध बह रहा हो।

मानसून के समय यह वाटरफॉल बिल्कुल नाइग्रा फॉल जैसा ही नजर आता है। केरल के त्रिशुर जिले में चालकुडी नदी में गिरने वाला यह झरना घने जंगलों से घिरा है। यह वाटरफॉल सुबह 8 बजे से शाम को 6 बजे तक पर्यटकों के लिए खुला रहता है।
जोग वाटरफॉल :
कर्नाटक का जोग वाटरफॉल भारत के सबसे ऊंचे झरनों में से एक है। कर्नाटक के शिमोगा जिले में स्थित यह वाटरफॉल खासतौर पर मानसून के समय बेहद शानदार नजारा प्रस्तुत करता है। खासतौर पर इस वाटरफॉल के ठीक ऊपर हर दूसरे मिनट बनता इंद्रधनुष इसे अलग ही लेवल की सुन्दरता प्रदान करता है जिसे शब्दों में बयां करना संभव नहीं है।

घने जंगलों के बीच में स्थित यह वाटरफॉल करीब 254 फीट की ऊंचाई से नीचे गिरता है। मानसून के समय घूमने के लिए जोग वाटरफॉल कर्नाटक का बेस्ट टूरिस्ट स्पॉट है। वाटरफॉल के बेस से सैलानियों को करीब 1400 कदमों का ट्रेकिंग करना पड़ता है।
कोर्टल्लम वाटरफॉल :
तमिलनाडू के तेनकाशी जिले में स्थित कोर्टल्लम वाटरफॉल मानसून के समय यहां का मुख्य आकर्षण होता है। वेस्टर्न घाट पर स्थित नदी चित्तर में गिरने वाले इस वाटरफॉल को 'मेडिकल स्पा' के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि इसके पानी में औषधिय पौधों की खुशबू आती रहती है। यह खुशबू वाटरफॉल के आसपास स्थित जंगलों के पौधों से पानी में घुलती है।

यहां हर साल जुलाई-अगस्त में जिला प्रशासन की तरफ से सरल विला, 8 दिवसीय उत्सव का आयोजन किया जाता है। सबरीमाला मंदिर और पापनाशनाथर मंदिर में आने वाले भक्त इस वाटरफॉल पर जरूर घूमने आते हैं। अगर आपकी किस्मत अच्छी हुई तो तेनकाशी से महज 5 किमी दूर स्थित कोर्टल्लम फॉल्स और पापनाशम मंदिर के बीच के रास्ते में अक्सर तेंदुए और बाघों को घूमते हुए भी आप देख सकते हैं।
इस वाटरफॉल में कुल 9 जलधाराएं हैं जो निम्न हैं :
- पेरारुवी (मुख्य धारा)
- ऐंथारुवी (फाइव फॉल)
- देवी अरुवी (शेंबागा फॉल)
- थेनारुवी (हनी फॉल)
- चित्रारुवी
- पुली अरुवी (टाइगर फॉल)
- पज़ाया अरुवी (ओल्ड फॉल)
- पुथु अरुवी (न्यू फॉल)
- पज़ाथोडा अरुवी (फ्रुट गार्डन फॉल)
सभी जलधाराएं 1 किमी के दायरे में स्थित हैं।
तालाकोना वाटरफॉल

आंध्र प्रदेश के चित्तुर जिले में श्री वेंकटेश्वरा नेशनल पार्क में स्थित तालाकोना वाटरफॉल राज्य का सबसे ऊंचा वाटरफॉल है। इस वाटरफॉल की ऊंचाई करीब 270 फीट है। वाटरफॉल के दोनों तरफ घने जंगल और उनसे होकर आती पेड़ों की सरसराहट इस पूरे रास्ते को बेहद सुन्दर और रोमांचक बना देती है। आंध्र प्रदेश का यह सबसे लोकप्रिय टूरिस्ट डेस्टिनेशन है। अगर आप बैंगलोर और अराकू वैली की तरफ जाने का प्लान बना रहे हैं तो इस वाटरफॉल को मिस करने की गलती बिल्कुल मत किजीएगा।
होगेनक्कल फॉल्स
तमिलनाडू और कर्नाटक के बार्डर पर स्थित होगेनक्कल वाटरफॉल्स को भी भारत का नाइग्रा फॉल कहा जाता है। कन्नड़ में 'होगेक्कल' का अर्थ चट्टान और धुआं होता है। यह वाटरफॉल कावेरी नदी से जुड़ा हुआ है। मानसून के समय दूसरे वाटरफॉल्स की तरह ही इस वाटरफॉल की सुन्दरता भी कई गुना बढ़ जाती है।

खास बात यह है कि इस वाटरफॉल तक पहुंचने के लिए आपको ट्रेकिंग नहीं बल्कि यहां नाव से पहुंचना पड़ता है। मानसून में उफनती नदी में नाव से वाटरफॉल तक पहुंचने का रास्ता बेहद रोमांचक होता है। जिन सैलानियों को रोमांच से बेहद प्यार है, उनके लिए यह वाटरफॉल Must Visit है।
कुंचिकल वाटरफॉल
भारत के सबसे ऊंचे झरनों में कर्नाटक के कुंचिकल वाटरफॉल की गिनती होती है। यह शिमोगा जिले में अगुंबे वैली के पास स्थित है। करीब 1493 फीट की ऊंचाई से वरही नदी में गिरने वाला यह वाटरफॉल बारिश के मौसम में सबसे शानदार दिखता है।

हालांकि बिजली उत्पादन की वजह से बने मानी डैम की वजह से साल के बाकी समय इस वाटरफॉल का पानी काफी घट जाता है। डैम की वजह से ही कुंचिकल वाटरफॉल वर्जित क्षेत्र बन गया है। इसलिए अगर आप इस खूबसूरत वाटरफॉल का दीदार करना चाहते हैं तो आपको विशेष पास लेने की जरुरत होगी।



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